तरबूज है सेहत का खजाना, खेती बनाएगी मालामाल

Written by Priyanshi Rao

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गर्मी का मौसम शुरू हो चूका है। और इस मौसम में नकदी की फसल की बुआई शुरू हो जाती है। ऐसे में किसान सब्जियों के साथ साथ तरबूज की खेती कर सकते है। इससे खेती से अतिरिक्त कमाई कर सकते है। गर्मी के दिनों में तरबूज की मांग काफी अधिक होती है। और स्वास्थय के लिए भी तरबूज काफी फायदेमंद होता है। शरीर में पानी की पूर्ति करता है। खनिज तत्वों की पूर्ति भी करता है। और किसान के लिए आय बढ़ाने में भी मददगार है।

तरबूज के फायदे

गर्मी के मौसम तरबूज एवं खरबूजे की मांग काफी अधिक हो जाती है। लोग बड़े ही चाव के साथ इस फल को खाते है। तरबूज शरीर में जो पानी की कमी होती है उसको पूर्ण करता है। साथ में पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण शरीर में प्राकृतिक रूप से सभी पोषक तत्वों की पूर्ति भी करता है। तरबूत की बोई जनवरी से शुरू हो जाती है। जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में तरबूज मार्च के आसपास होती है। काली भूमि पर तरबूज काफी अच्छी पैदावार देता है। तरबूज शरीर के साथ साथ किसानो के लिए भी फायदेमंद है। क्योकि ये एक नकदी फसल है और कुछ महीने के मेहनत में अच्छा पैसा दे सकता है।

तरबूज की बुआई के साथ मौसम

तरबूज की बुआई ऐसे स्थानों पर होती है। जहा पर मौसम गर्म होता है और धुप की अधिकता होती है। जहा पर जमीं अच्छे पानी की निकासी एवं पोष्टक तत्वों से भरपूर होती है उन स्थानों पर इसकी अच्छी पैदावार मिलती है। तरबूज में कई किस्मे आती है। इसमें शुगर बेबी, अर्का, पूसा बेदाना वैरायटी काफी अच्छी कही जाती है। तरबूज की फसल बुआई के दो महीने के अंतराल पर हार्वेस्टिंग का कार्य शुरू हो जाता है। ये जो किस्मे यहाँ बताई है। इनमे फल जल्दी आता है और हार्वेस्टिंग भी जल्दी शुरू की जा सकती है।

तरबूज की बुआई के लिए पहले खेत को अच्छे से तैयार करना होता है। यद्पि तरबूज एक बेलिय पौधा है। तो इसके लिए खेतो में काफी जगह छोड़कर बुआई की जाती है। तरबूज की बुआई का सीजन दिसम्बर से जनवरी के बिच में शुरू होता है लेकिन जो पहाड़ी क्षेत्र है उनमे मार्च से अप्रेल के महीने में इसकी बुआई शुरू होती है। जबकि भारत के उत्तरी हिस्सों में फरवरी से मार्च महीने में तरबूज की बुआई की जाती है।

तरबूज की खेती के लिए खाद एवं सिंचाई

तरबूज की खेती के लिए आमतौर पर सिंचाई बुआई के 5 से 7 दिनों के अंतराल पर की जाती है। इसके बाद जब फल आने लगते है तो 8 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जरुरत होती है। तरबूज की खेती में अच्छा उत्पादन लेने के लिए अच्छी खाद का भी उपयोग करना जरुरी होता है। इसके लिए देशी ऑर्गनिक खाद का उपयोग भी कर सकते है। इसके साथ ही तरबूज की खेती के लिए आपको कीटो से बचाव के लिए कीटनाशकों की जरुरत होती है। इसके लिए आपको खुद से डॉक्टर बनने की जरुरत नहीं है । स्थानीय कृषि विभाग से इसके सम्बन्ध में जानकारी लेकर ही कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए।

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