Mustard Farming: सरसों में चेपा रोग के लिए वैज्ञानिकों की सलाह, रोकथाम के लिए तुरंत करें ये उपाय

Written by Priyanshi

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Mustard Aphid Disease – किसान भाइयों की सरसों की फसल इस समय फूलों से लदी है और ऐसे में सरसों में चेपा रोग के लगने की संभावना भी बहुत अधिक है। किसान भाइयों को सरसों की फसल को चेपा रोग से बचाने के लिए कुछ जरुरी कदम उठाने बहुत जरुरी हैं।

इस समय पुरे उत्तर भारत में सर्दी का कहर जारी है और सर्दी अधिक होने के कारण सरसों में चेपा रोग के लगने की संभावना अधिक हो जाती है। जनवरी और फरवरी का महीना किसानो के लिए बहुत अहम होता है और एन महीनों में किसानो को सरसों की फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए बहुत से जरुरी काम करने होते है।

चेपा रोग क्या होता है

चेपा रोग सरसों की सफल में लगने वाला एक रोग है जो जिसको मोयला के नाम से भी जाना जाता है। ये रोग ठण्ड के मौसम में सरसों की फसल में लग जाता है और इसके कारण सरसों की फसल में बहुत अधिक पैदावार में कमी आ जाती है। जब मौसम का तापमान 10 डिग्री के आसपास होता है तो इस रोग के लगने की संभावना बहुत अधिक हो जाती है।

इस रोग के चलते सरसों के पौधों में फलियां अच्छे से ग्रोथ नहीं कर पाती और छोटी और पतली रह जाती है। जिसके कारण उनके अंदर सरसों के दाने भी सही से नहीं बन पाते। ये रोग पुरे खेत के खेत को तबाह कर देता है। चेपा एक तरफ का एक किट होता है और ये सरसों के पौधों के नरम भागों पर हमला करता है। इस किट के कारण पौधे के फूल और कलियाँ सबसे अधिक प्रभावित होती है।

चेपा रोग से बचाव कैसे करें

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार ठण्ड में अत्यधिक बढ़ौतरी देखने को मिल रही है और ऐसे में किसानो को इस बार अधिक सचेत रहने की जरुरत है। कृषि वैज्ञानिक बताते हैं की अगर इसका समय रहते उपाय नहीं किया गया तो ये आपकी फसल को पूरी तरफ से बर्बाद कर देंगे। इसलिए समय रहते किसान भाइयों को अपनी सरसों की फसल में कीटनाशकों का छिड़काव करना होगा। किसान भाई अपने नजदीकी कृषि केंद्र पर सलाह करने के बाद सुझाई गई दवाओं का छिड़काव करके इस रोग से रोकथाम कर सकते हैं।

चेपा रोग से बचाव की दवाई

चेपा रोग आपकी फसल में लग गया है या फिर अभी तक आपकी फसल चेपा रोग से बची हुई है तो भी दोनों ही सूरत में आपको समय रहते अपने खेत में छिड़काव करना बहुत जरुरी है। जिस प्रकारका अभी मौसम चल रहा है उस हिसाब से हर साल के मुकाबले में इस बार इस रोग में 20 से 30 फीसदी की अधिक बढ़ौतरी देखने को मिल सकती है।

किसान भाई मेलाथियॉन 5% प्रस्तावित मात्रा में, प्रति हेक्टेयर 25 किलो, सवा लीटर प्रति हेक्टेयर 50 ई.सी. या डायमेथोएट 30 ई.सी. प्रति हेक्टेयर एक लीटर की दवा को लेकर उसका 400 से 500 लीटर पानी में घोल तैयार करें और फिर उस घोल का छिड़काव अपनी सरसों की फसल पर करें। ऐसा करने से उनकी फसल में चेपा रोग का प्रकोप ख़त्म हो जायेगा।

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