सागवान की खेती कैसे की जाती है ,जानिए आवश्यक जलवायु ,तापमान ,और रोग व् रोकथाम के उपाय

Written by Saloni Yadav

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Teak Cultivation Information :

आप बता दे की सागवान की खेती से किसानो को अधिक लाभ होता है ,सागवान के पेड़ काफी कीमत के आते है ,इनकी पत्तिया ,लकड़ी और पेड़ की सभी चीजे उपयोगी होती है। आप सबने सागवान का नाम तो सुना ही होगा ,सागवान की लकड़ी काफी महगी होती है। इसकी लकड़ी काफी हल्की होती है और इसकी लकड़ी में दीमक नहीं लगती है। सागवान की लकड़ी की बहुत विशेषता होती है ,इसकी लकड़ी मजबूत होती है ,सालो साल इसकी लकड़ी वैसी ही रहती है। इसकी लकड़ी इमरती होती है ,जिसकी लम्बाई 70 से 100 फ़ीट लम्बे पाए जाते है। सागवान के पौधे जून जुलाई के महीने में लगते है। अगर आप चाहे तो इसके पेड़ को फसल के चारो तरफ भी उगा सकते है। इसकी लकड़ी से किसानो को अधिक फायदा होता है , इसकी खेती कम रिस्क पर भी अधिक पूंजी मिलती है।

सागवान की वानस्पतिक नाम ”टेक्टोना ग्रंडिस” होता है ऐसा पौधा 200 वर्ष तक जीवित रह सकता है। इसकी लकड़ी काफी कठोर , लकी ,और रोगो से रहित होती है ,इसको अनेक नामो से जाना जाता है जैसे – सग ,टीकवुड और सगुन आदि नामो से भी जाना जाता है।
इसकी खेती लकड़ियों के लिए की जाती है , बाजार में इसकी लकड़ी की बहुत मांग होती है। इसकी लकड़ी से फर्नीचर बनाये जाते है ,जिस पर पोलिस भी अच्छे से हो जाती है। इसका पेड़ लगभग 100 वर्षो तक जीवित रह सकता है। इनके पेड़ अधिक ऊंचे तथा सीधे होते है ,यानि टेड़े – मेडे नहीं होते है ,अधिक उचाई पर जाकर इसकी टहनिया निकली होती है,यानि शीर्ष पर जाकर टहनियों का निर्माण होता है।

अगर आप भी इसकी खेती करने का मन बना रहे है तो आज हम आपको इसकी खेती कैसे की जाती है ,और इसकी खेती से होने वाले लाभ ,और इसके लिए आवश्यक जलवायु ,मिट्टी और पैदावार की सम्पूर्ण जानकरी देंगे।

सागवान का पेड़ केसा होता है ?

आपको बता दे की सागवान की खेती से किसानो को काफी लाभ होता है ,इसका पेड़ लगभग 200 वर्षो से भी अधिक समय जीवित रह सकता है। इसके पेड़ की प्रत्येक वस्तु काफी उपयोगी होती है ,इसकी लकड़ी की कीमत अच्छी होती है। सागवान का पेड़ काफी लम्बा होता है और उसके शीर्ष भाग पर टहनिया निकलती है और नीचे से बिलकुल सीधा होता है। इसकी लकड़ी से फर्नीचर जैसी चीजे बनाई जाती है। इसकी खेती कर किसान मालामाल हो सकता है।

सागवान की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और मिट्टी

आपको बता दे की सागवान की खेती के लिए आद्र और शुष्क जलवायु इसकी खेती के लिए अच्छी मानी जाती है।इसकी खेती के लिए ठंडी जलवायु अच्छी नहीं मानी जाती है। सामान्य जलवायु में इसके पौधे अच्छे विकास करते है।

दोमट मिट्टी में भी इसकी खेती अच्छी की जा सकती है। सागवान की फसल के अच्छी पैदावार के लिए जलोढ़ मिट्टी अच्छी मानी जाती है। अच्छी पैदावार के लिए भूमि का PH मान 6 से 7 के बीच होना आवश्यक होता है। जलभराव की स्थिति को खेत में नहीं होने दे क्योकि रोग होने का खतरा बना रहता है।

सागवान की खेत के लिए आवश्यक तापमान और सिचाई

सागवान के पौधे सामान्य जलवायु में अच्छे से विकास करते है अधिक ठंड इसकी खेती को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए इसकी खेती सामान्य तापमान वाले प्रदेशो में की जानी चाहिए।

आपको बता दे की इसके पौधे को अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसके पौधे की पहली सिचाई पौध रोपाई के तुरंत बाद की जाती है ,इसके बाद आवश्यकता होने पर या खेत में नमी बनाये रखने के लिए हल्की – हल्की सिचाई करनी चाहिए। और बारिश के मौसम में आवश्यकता होने पर ही इसके पौधे को पोनी देना चाहिए।

सागवान की उन्नतशील किस्मे

आपको बता दे की सागवान की कई किस्मे होती है ,जो किसानो का अच्छी पैदावार से लाखो की कमाई देती है ,इसकी कुछ किस्मे कम समय में भी अच्छी पैदावार देती है। और कुछ किस्मे जलवायु और मिट्टी के अनुसार पैदावार देती है। सागवान की कुछ किस्मे इस प्रकार है – अदिलाबाद सागवान, नीलांबर (मालाबार) सागवान, कोन्नी सागवान ,
मध्य अमेरिका सागवान और पश्चिमी अफ्रीकी सागवान आदि किस्मे है ,वैसे तो इनके पोधो की लम्बाई अधिक पाई जाती है ,ऐसी प्रकार इनकी किस्मो की लम्बाई भी अलग – अलग पाई जाती है।

सागवान के पौधे में होने वाले रोग व् कीट और रोकथाम के उपाय

गुलाबी बीमारी रोग

यह रोग पौधे की पत्तियों पर सीधे आकर्मण करता है और पत्तियों के ऊपर सफेद और हल्का गुलाबी रंग का पदार्थ छोड़ा है ,जिससे पत्तिया पूरी तरह नष्ट हो जाती है और पौधे प्रकाश संश्लेषण की नहीं कर पता है। और पौधे विकास करना बंद कर देते है।

रोकथाम
इस रोग के रोकथाम के लिए एम-45 की 400 GM की मात्रा का छिड़काव करना चाहिए।

जड़ गलन रोग

सागवान के पोधो में कीट और रोग दिखाई देते है ,पोधो में काली सुंडी और भुंडी रोग आदि हो जाते है। इस रोग का आकर्मण अधिक होता है ,जिससे पौधे की पत्तिया जगह – जगह से कट जाती है।

रोकथाम
इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे की जड़ो पर वीर M – 45 का छिड़काव करना चाहिए।

इसके आलावा भी सागवान के पोधो में अनेक रोग दिखाई देते है ,जैसे – कीट रोग , पत्तों पर सफेद धब्बे और भुंडी और काली सुंडी रोग दिखाई देता है।

सागवान की खेती के लिए खेत को तैयार करना

आपको बता दे की फसल की अच्छी उपज के लिए खेत की अच्छी से गहरी जुताई करनी चाहिए ,उसके बाद खेत में पुरानी फसल के अवशेषो का पूरी तरह नष्ट करना चाहिए उसके बाद खेत में गोबर की खाद डालनी चाहिए ,और उसको खेत की मिट्टी में अच्छे से मिलानी चाहिए ,उसके बाद खेत में फिर से गहरी जुताई करनी चाहिए। जब खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाये तब उसमे पाटा लगवा देना चाहिए उसके बाद खेत में 10 फ़ीट की दुरी पर गड्डो को तैयार करना चाहिए ,उसके बाद उसमे उर्वरक की मात्रा डालनी चाहिए उसके लिए 500 GM N.P.K.की मात्रा में गड्डो में डालकर मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए।

सागवान के पौध की रोपाई और रोपाई का सही समय

सागवान के फसल की बुआई पौध के रूप में की जानी चाहिए। उसे लिए पौधे को नर्सरी में तैयार करके 1 से 2 साल पुराने पौध लगनी चाहिए ,खेत में इनके पोधो की रोपाई करनी चाहिए। और नर्सरी से तैयार पौध जाली पैदावार देती है। ध्यान दे की नर्सरी से पौधे बिलकुल स्वस्थ होने चाहिए। उसके बाद पौधे को गड्ढे में लगाए ,और उसके बाद उसमे पानी भी देना चाहिए। आप को बता दे की सागवान के पौधे की पौध रोपाई गर्मी के मौसम में करनी चाहिए ,सर्दियों में नहीं करे। इसकी रोपाई मई और जून के महीने में की जनि चाहिए।

सागवान की फसल में खरपतवार को नियंत्रण करना

आपको बता दे की किसी भी फसल की अच्छी पैदावार के लिए खेत में खरपतवार को नियंत्रित करना आवश्यक है ,क्योकि खरपतवार पोधो को अच्छे से पोषकतत्वों को ग्रहण नहीं करने देते है ,जिससे पौधे अच्छे से विकास नहीं करते है ,इसलिए फसल में खरपतवार के नियंत्रण के दो तरिके होते है लेकिन इसकी खेती में प्राकृतिक तरिके से खेत में निराई – गुड़ाई करनी चाहिए। खरपतवार नियंत्रण करने से खेत में अच्छी पैदावार होती है।

सागवान की खेती से प्राप्त पैदावार

सागवान के पेड़ो को काटने के लिए सरकार द्वारा अनुमति लेनी होती है ,इसके पेड़ो को काटना कानून के खिलाफ होता है ,सागवान के एक पेड़ से 11 से 12 क्यूबिक फ़ीट लकड़ी प्राप्त होती है जिसका बाजारी भाव 2500 के आस पास होता है। खेत के चारो तरफ काफी पेड़ लगा सकते है ,इसकी खेती से किसानो को अधिक मात्रा में लाभ होता है ,और इसकी अच्छी पैदावार से किसानो को अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है

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