2023 शिमला मिर्च की खेती कैसे करे ,जानिए इसकी खेती में आवश्यक जलवायु ,सिचाई ,कमाई और उन्नतशील किस्मे और रोग व् रोकथाम

Written by Saloni Yadav

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Cultivation Of Shimla :

शिमला मिर्च की खेती सब्जी के लिए की जाती है ,भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से की जाती है। जो मुख्य रूप से इन राज्यों में की जाती है – कर्नाटक, हरियाणा ,झारखण्ड ,पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट और हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में की जाती है। शिमला मिर्च को अन्य नामो से जाना जाता है जैसे – Green paper ,Bell paper ,Sweet paper आदि है। शिमला मिर्च में विटामिन की मात्रा भी पाई जाती है ,इसके अलावा इसमें फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम ,आयरन, मैग्नीशियम ,कैरोटीनॉयड,मैंगनीज़ और ज़िंक आदि खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। इसकी खेती मैदानी क्षेत्रों में की जाती है। शिमला मिर्च की खेती का का महत्वपूर्ण स्थान है ,शिमला मिर्च की सब्जी भी बनाई जाती है ,इसका स्वाद काफी अच्छा होता है ,भारत में शिमला मिर्च की अच्छी मांग होती है। शिमला मिर्च का सेवन करने से काफी लाभ मिलता है ।

शिमला मिर्च की खेती से किसानो को काफी लाभ मिलता है ,इसकी खेती कम समय में भी अच्छी पैदावार देती है। और किसानो को मालामाल कर देती है ,इसकी खेती भारत में मुख्य रूप से की जाती है ,शिमला मिर्च की अनेक उन्नत किस्मे पाई जाती है आपको बता दे की अन्य सब्जियों की भाति शिमला मिर्च का दाम काफी अच्छा होता है। शिमला मिर्च की खेती की देखभाल करने से अच्छी पैदावार पैदावार होती है ,और अच्छी कमाई होती है ,आजकल बहुत से किसान इसकी खेत करने लगे है।

शिमला मिर्च की खेती भारत के अनेक राज्यों में उच्च स्तर पर की जाती है ,इसकी खेती से किसानो को लाखो का मुनाफा होता है और यह फसल प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 300 से अधिक किवंटल की पैदावार देती है ,अगर आप भी इसकी खेती कर मुनाफा प्राप्त करना चाहते है तो हमारी यह पोस्ट आपके लिए काफी लाभदायक होने वाली है। जानिए शिमला मिर्च की खेत की सम्पूर्ण जानकारी।

शिमला मिर्च की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान

आपको बता दे की शिमला मिर्च की खेत के लिए नर्म और आद्र जलवायु अच्छी मानी जाती है। इसके पौधे को अधिक गर्मी और अधिक सर्दी अच्छी नहीं होती है इसके खेती के लिए सामन्य मौसम की जलवायु अच्छी होती है

शिमला मिर्च के लिए कम और अधिक मात्रा में तापमान हानिकारक होता है ,इसलिए इसके पौधे सामान्य तापमान में अच्छे से विकास करते है ,और अच्छी पैदावार देते है ,शिमला मिर्च की फलस अधिकतम 40 डिग्री तापमान और न्यूनतम 10 डिग्री तापमान को सहन करने की क्षमता रखता है।

शिमला मैच की खेती के लिए आवश्यक सिचाई और मिट्टी

आपको बता दे की इसकी फसल को अधिक मात्रा में अधिक सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी खेती में पहली सिचाई पौध रोपाई के तुरंत बाद करनी चाहिए ध्यान रहे की सिचाई ड्रिप विधि से की जाये ,ताकि बीज बह जाने का डर नहीं हो। ड्रिप विधि से सिचाई करने से फसल की जड़ो तक पानी आसानी से पहुंच जाता है ,और फसल की पैदावार भी बेहतर होती है।

इसकी खेत के लिए चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है ,इसकी खेती के लिए उचित जल निकास वाली पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी अच्छी मानी जाती है। शिमला मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए भूमि का PH मान 6 से 7 के मध्य अच्छा होता है।

शिमला मिर्च की उन्नत किस्मे

आपको बता दे की इसकी अनेक उन्नत किस्मे होती है ,जलवायु के आधार पर किस्मे अच्छी पैदावार देती है। कुछ किस्मे कम समय में भी अच्छी पैदावार देती है। शिमला मिर्च की कुछ उन्नत किस्मे इस प्रकार है –

  • कैलिफोर्निया वन्डर
  • पूसा दीप्ति किस्म
  • सोलन हाइब्रिड –1 किस्म
  • सोलन हाइब्रिड – 2 किस्म
  • येलो वन्डर किस्म
  • सोलन भरपूर किस्म
  • पूसा ग्रीन गोल्ड किस्म
  • रॉयल वंडर किस्म
  • अर्का गौरव किस्म

शिमला मिर्च की खेत के लिए खेत को तैयार करना

इसकी खेत के लिए सबसे पहले खेत को अच्छे से तैयार किया जाता है ,उसके लिए खेत में गहरी जुताई करे ,और उसके बाद खेत में गोबर की खाद डाले और खाद को मिट्टी में अच्छे से मिला ले ,उसके बाद खेत में गहरी जुताई करके खेत में पानी से पलेव करे। उसके बाद खेत में जब मिट्टी कुछ सूखने लगे तब उसमे फिर से जुताई करे ताकि खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाये। खेत में अंतिम जुताई पर उर्वरक खाद का छिड़काव करना चाहिए उसके लिए 60 KG सल्फर की मात्रा देनी चाहिए।

शिमला की खेती के लिए पौध रोपाई और सही समय

आपको बता दे की शिमला की फसल की पौध रोपाई बीज के रूप में न होकर पौध के रूप में की जाती है। बीजो की बुआई के लिए बीजो को उपचारित करना आवश्यक है क्योकि फसल में रोगो के लगने का खतरा कम होता है। बीजो को नर्सरी में पौध के रूप में तैयार किया जाता है नर्सरी से तैयार पौध कम समय में पैदावार देने लगती है। ध्यान रहे की पौधे 1 साल पुराने और स्वस्थ होने चाहिए।

उसके बाद इसकी पौध रोपाई के लिए खेत में मेड को तैयार करे ,और प्रत्येक मेड पर 1 फ़ीट की दुरी पर पौध की रोपाई की जाती है उसके बाद खेत में पौध को लगाकर पानी से सिचाई करनी चाहिए। इसके पौधे की पौध रोपाई जुलाई के महीने करना उचित माना जाता है इसके अलावा आप सितम्बर और जनवरी के महीने में भी कर सकते है। अगर इसके पोधो की अच्छी देखभाल की जाये तो 6 महीने तक पैदावार देते है।

शिमला की फसल में खरपतवार को नियंत्रण करना

बता दे की इसकी खेती की अच्छी पैदावार के लिए खरपतवार को नियंत्रित करना आवश्यक होता है इसकी खेती को कम से कम 5 गुड़ाई की आवश्यकता होती होती है ,इसकी गुड़ाई 10 दिनों के अंतराल पर करनी चाहिए ,इसके अलावा आवश्यकता होने पर खेत में गुड़ाई करनी चाहिए।

रोग और रोकथाम के उपाय

उकठा रोग

यह रोग सब्जियों और औषधीय पोधो पर दिखाई देता है। यह रोग पोधो की जड़ो पर सीधे आक्रमण करता है और फसल को नष्ट कर देता है। यह रोग ज्यादातर बरसात के मौसम में अधिक दिखाई देता है। जिससे पौधा पूरी तरह से नष्ट हो जाता है ,और सुखकर गिर जाता है ।

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर का घोल बनाकर पोधो पर छिड़काव करना चाहिए।

पाउडर मिलोडी

यह रोग पौधे की पत्तियों पर आक्रमण करता है और उसके पौधे पर पत्तियों में छिद्र हो जाते है ,यह रोग पत्तियों पर सफेद रंग का पाउडर छोड़ता है। जो पौधे को पूरी तरह नष्ट करता है।

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए सल्फर की मात्रा को पानी में गोलकार पोधो पर छिड़काव करे।

इसके अलावा भी भी इसकी फसल में अन्य रोग दिखाई देते है जैसे – मोजेक रोग ,कीटों द्वारा रोग द्वारा भी यह रोग होता है।

शिमला मिर्च की तुड़ाई और प्राप्त होने वाली पैदावार

आपको बता दे की शिमला मिर्च की तुड़ाई तब की जाती है ,जब मिर्च का आकर पूरा हो जाये और रंग आकर्षक हो जाये ,तब इसकी तुड़ाई करनी चाहिए ,और इसके पौधे पौध रोपाई के 70 से 80 दिनों के बाद पैदावार देने के लिए तैयार होते है

किसान भाई को इसकी खेत से अच्छा लाभ प्राप्त होता है। इसकी खेती प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 300 से 550 किवंटल की पैदावार देती है। ,जिससे किसानो को इसकी अच्छी पैदावार से अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है ,इसका बाजारी भाव भी अन्य मिर्च के तुलना में ज्यादा होता है ,इसकी खेती से अच्छी कमाई हो सकती है।

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