Kisan News: धान की फसल में यूरिया कब और कितना डालना चाहिए, देखें सही तरीका

Written by Priyanshi

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नई दिल्ली. Kisan News: हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बहुत भोले भाले होते है। वे खेती पीढ़ी दर पीढ़ी करते आ रहे है लेकिन उनको आज भी खेती करने से सही से तरीकों के बारे में मालूम नहीं है। इसका कारण ये है की किसान भाई सदियों से ऑर्गनिक खेती करते आ रहे है लेकिन आजकल अलग अलग तरफ से खाद डालने के बाद फसल पैदा होती है और किसान भाई कंफ्यूज हो जाते है की किस फसल में कितना खाद डालना चाहिए और कितनी मात्रा में डालना चाहिए। अब अगर धान की फसल की बात करें तो उसमे भी कुछ ऐसा ही है।

बहुत से हमारे किसान भाई अधिक पैदावार और फसल को जल्दी तैयार करने के चक्कर में अधिक यूरिया खाद फसल में दाल देते है। लेकिन ये बहुत गलत है और ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए। फसल में यूरिया खाद को सिमित मात्रा में ही डालना लाभकारी रहता है। अधिक मात्रा में डाला हुआ यूरिया खाद ना तो फसल के लिए अच्छा है और ना ही मनुष्य की सेहत के लिए अच्छा है। साथ में जिस खेत में किसान भाई अधिक यूरिया खाद का प्रयोग करते है उस खेत की उपजाऊ शक्ति धीरे धीरे कमजोर हो जाती है। इस समय ऐसा आता है जब उस खेत में फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों ही घट जाती है।

किसान भाई अगर अपनी फसल में नियम के अनुसार खाद का प्रयोग करते है तो उससे खेत में फसल के अंदर रोग लगने के चांस भी काम हो जाते है। इसके साथ में किसान भाइयों का फसल में लगने वाले खर्चे में भी कमी आती है। इसलिए हमेशा खेत में सही समय पर ही खाद देना चाहिए। देखिये धान की फसल में खाद डालने की पूरी डिटेल।

धान की फसल में यूरिया कब डालना चाहिए

सबसे अफ्ले तो किसान भाइयों को बता दें की जब आप धान की रोपाई कर देते है तो उसके एक सप्ताह के बाद आपको धान की फसल में एक बोरी डीएपी खाद प्रति एकड़ के हिसाब से डालना चाहिए। किसी कारण से अगर आपके पास डीएपी नहीं मिल पा रहा है तो किसान भाई इसकी जगह पर सिंगल सुपर फास्फेट का भी इस्तेमाल कर सकते है।

धान की फसल में पहली बार यूरिया कब डालें

इसके बाद जब धान की फसल की रोपाई किये हुए 20 दिन हो जाये तो किसान भाइयों को 50 किलोग्राम यूरिया खाद प्रति अकड़ के हिसाब से अपनी धान की फसल में डालना चाहिए। इससे धान के पौधों की जड़ों में ऑक्सीजन का संचार होता है और धान की फसल में रोगों के लगने की सम्भावना भी काम हो जाती है। यूरिया का छिड़काव करते समय किसान भाइयों को ये ध्यान में रखना है की जिस समय यूरिया का छिड़काव करना है उस समय खेत में पानी की मात्रा काम होनी चाहिए।

धान की फसल में दूसरी बार यूरिया कब डालें

इसके बाद किसान भाइयों को जब उनकी धान की फसल में कंसे बाहर आने लगे तब यूरिया खाद को डालना होता है। ऐसे एक तो धान की फसल में तना छेदक रोग नहीं लगता और साथ में फसल में ग्रोथ भी अच्छी होने लगती है। इस समय आपको यूरिया खाद के साथ में जिनक के पाउडर को मिक्स करके अपनी धान की फसल में डालना होता है। मात्रा की बात करें तो 50 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़ के हिसाब से आपको इस्तेमाल करना होता है।

धान की फसल में तीसरी बार यूरिया कब डालें

अब आखिरी बार किसान भाइयों को अपनी धान की फसल में खाद का इस्तेमाल तब करना होता है जब धान की फसल में पौधों से बालियान निकलने लग जाये। इस समय 50 किलोग्राम यूरिया खाद के साथ में आपको लगभग 25 किलोग्राम पोटाश को भी मिक्स करके इसका छिड़काव अपनी धान की फसल में करना होता है। इससे पौधों में मजबूती आती है और बालियान भी लम्बी तथा बड़ी होती है।

धान की फसल में खाद की मात्रा कितनी लगती है

किसान भाई वैसे तो सदियों से धान की फसल बोते आये है और उनको खाद की मात्रा में पहले से ही जानकारी होगी। लेकिन फिर भी बहुत से किसान भाई ऐसे भी हैं जिनको इसके बारे में पता नहीं होता। उनके लिए हम यहां बता देते है की धान की एक एकड़ फसल में किसान भाइयों को पुरे सीजन में 130 से 150 किलोग्राम यूरिया खाद मि जरुरत होती है। इसके अलावा लगभग एक बोरी डीएपी खाद और साथ में 2 बोरी के लगभग सिंगल सुपर फास्फेट खाद की जरुरत पड़ती है। पोटाश खाद की बात करें तो ये लगभग 25 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से पुरे सीजन में किसान भाइयों को जरुरत पड़ती है।

किसान भाइयों से निवेदन है की इसके अलावे अधिक खाद का इस्तेमाल अपनी धान की फसल में ना करें। इसके साथ ही कोशिश करें की धान की खेती जिस भी खेत में कर रहे है उसमे धान की रोपाई से पूर्व जब खेत की तयारी की जाती है उसी समय सड़े गोबर की खाद का भरपूर मात्रा में इस्तेमाल करें। इससे आपको खेत में यूरिया की मात्रा काम देनी पड़ेगी। इससे पैदावार भी अधिक होगी और धान भी पौष्टिक उत्पन्न होगा।

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