तिल की खेती कैसे करे ,जानिए इसकी उन्नत किस्मे के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

Written by Saloni Yadav

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Sesame cultivation : आपको बता दे की हमारे देश में अनेक तिलहनी फसल की खेती की जाती है ,और यह फसल तिलहनी फसल में प्रमुख स्थान रखती है ,इसकी खेती भारत में खरीफ की फसल के साथ की जाती है ,तिल को विश्व की पहली तिलहनी फसल भी कहा जाता है ,इसके दानो से तेल भी निकला जाता है। तिल के पौधे पर बैगनी और सफेद रंग की फूल आते है ,और भारत में मुख्य दो प्रकार के तिल पाए जाते है एक तो सफेद और दूसरा काला। आपको बता दे की सफेद तेल को प्रयोग मिठाइयों को बनाने के साथ -साथ अधिक मात्रा में तेल को निकलने में भी किया जाता है। काले तिल का भी प्रयोग बहुत – सी चीजों में किया जाता है। इसके पौधे ज्यादा लम्बे नहीं होते है ,जिसकी लम्बाई 1 मीटर पाई जाती है। तिल को प्रयोग त्यौहार ,पूजा – पाठ ,दवाइयों में किया जाता है।

आपको बात दे की इसकी खेती भारत में मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल,तमिलनाडू , गुजरात, महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश ,तेलांगना और राजस्थान अदि राज्यों में की जाती है। भारत के UP राज्यों में बुंदेलखंड में सबसे अधिक उत्पादन किया जाता है ,इसकी खेती से किसानो को अच्छा मुनाफा होता है ,अगर आप भी इसकी खेती को करना चाहते है ,तो उसके लिए आपको इसकी उन्नत किस्मो की जानकारी का होना जरूरी है। क्योकि उन्नत किस्मो से ही पैदावार होती है ,इसकी कई किस्मे कम समय में भी अधिक मात्रा में पैदावार देती है। इसलिए आपको इसकी उन्नत किस्मो का चयन कर खेत में रोपाई करनी चाहिए।

तिल भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख तिलहन फसल है ,अनेक कार्यो में इसको प्रयोग अधिक मात्रा में किया जाता है। अगर आपभी इसकी खेती करना चाहते है तो आपको इसकी उन्नत किस्मो की जानकारी लेनी होगी। तभी किसान भाई अच्छी पैदावार प्राप्त कर मुनाफा कमा सकते है। इसलिए आज हम आपको तिल की उन्नत किस्मो की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

तिल की उन्नतशील किस्मे कौनसी है ,जानिए

RT 46 किस्म

आपको बता दे की यह किम्स बीज रोपाई के 80 से 85 दिनों के बाद पैदावार शुरू करती है देती है। और इसके पौधे 100 से 150 cm लम्बे पाए जाते है। इनके बीजो से 48 से 50 % तेल की मात्रा पाई जाती है। यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 5 से10 किवंटल की पैदावार देती है। इस किस्म के पौधे में 4 शाखाए होती है।

RT 346 किस्म

आपको बता दे की तिल की इस किस्म को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में अधिक मात्रा में उगाया जाता है। इस किस्म को चेतक नाम से भी जाना जाता है। इस किस्म को कम सिचाई की आवश्यकता होती है , यह किस्म कम सिचाई में भी अधिक पैदावार देती है। और बीज रोपाई के 80 से 85 दिनों के बाद पैदावार देना शुरू कर देती है यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 7 से 10 किवंटल की पैदावार देती है। इसमें तेल की मात्रा 50 % तक पाई जाती है।

T 78 किस्म

यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 8 से 10 किवंटल की पैदावार देती है ,और इसके पौधे की लम्बाई 100 cm की होती है ,और इसके दानो में 50 % ताल की मात्रा पाई जाती है। इसके पोधो को बीज रोपाई के 85 दिनों के बाद पैदावार देती है। और यह किस्म सामान्य उपज देती है।

आर. टी. 127 किस्म

इस किस्म से 48 % तेल की मात्रा पाई जाती है और प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 10 किवंटल की पैदावार देती है। और इस किस्म को बीज रोपाई के बाद पैदावार देने में 90 दिन का समय लगता है।

तिल की वे किस्मे जो राज्यों में मुख्य रूप से पाई जाती है ।

आपको बता दे की भारत के राज्यों में अलग -अलग किस्मो को उगाया जाता है जो राज्यों के अनुसार इस प्रकार है –

राजस्थान में पाई जाने वाली मुख्य किस्मे

T – 13 किस्म ,RT – 46 ,RT – 103 किस्म ,प्रताप ,TC – 25 ,और T – 125 आदि किस्मे है ,जो खरीफ की फसल के साथ जून जुलाई के महीने रोपाई की लिए तैयार किया जाता है।

गुजरात में पाई जाने वाली किस्मे

आपको बता दे की गुजरात में उगाई जाने वाली यह किस्म जायद की खेती के बाद जुलाई में उगाई जाती है। जो इस प्रकार है – गुजरात तिल नं- 2,आर टी- 103 गुजरात तिल नं- 1 और पुरवा 1 किस्म आदि है।

महाराष्ट में उत्पादित की जाने वाले किस्मे

आपको बात दे की इसमें ताप्ती, पदमा, आर टी- 54, आर टी- 103 ,और ताप्ती पूरवा- 1, आर टी- 54 आदि किस्मे पाई जाती है।

आंध्रप्रदेश में पाई जाने वाली किस्मे

आपको बता दे की जो किस्म आन्ध्रप्रदेश में उगाई जाती है ,जो इस प्रकार है – माधवी किस्म , राजेश्वरी,माधवी, टी- 85, आर टी- 54, आदि है।

इसके आलावा भी तिल की अन्य किस्मे पाई जाती है ,जो इस प्रकार है – पंजाब तिल ,प्रगति किस्म ,प्रताप किस्मे ,कनीकी सफेद किस्म ,राजस्थान तिल – 346 किस्म तरूण, गुजरात तिल- 4, पंजाब तिल- 1, ब्रजेश्वरी आदि किस्मे है।

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