भैंस पालन कैसे करते है ,भैंस पालन कर किसानो को मिलेगा अधिक मुनाफा ,जानिए इसकी सम्पूर्ण जानकरी

Written by Saloni Yadav

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Buffalo Farming Business :

आपको बता दे की आजकल किसानो ने खेती के साथ -साथ पशु पालन व्यवसाय भी करना शुरू कर दिया है ,यानी दोनों को साथ कर किसान अधिक मात्रा में डबल मुनाफा कमाना चाहते है। यह ऐसा व्यवसाय है ,जो किसानो को मुनाफ ही देती है ,यह व्यवसाय किसानो का एकमात्र जीविका का साधन बन गया है ,अगर आप पशु पालन करना चाहते है तो तो आपको इसकी जानकारी का होना जरूरी है इसके लिए हमारी यह पोस्ट आपके लिए काफी लाभदायक होने वाली है। इसलिए आप पशु पालन करने से पहले भेंसो की उन्नत नस्लों की जानकारी होना आवश्यक है , क्योकि अच्छी नस्ल को पालकर आप अच्छा मुनाफा प्रपात कर सकते है।

आपको बता दे की अच्छी नस्ल की भैंस अधिक मात्रा में दूध देती है ,और जिससे किसान अच्छी कमाई कर सकेगा। किसी भी व्यवसाय को शुरू करने से पहले उसकी जानकरी का होना जरूरी है। अगर आप भी पशु पालन व्यवसाय करना चाहते है तो आज हम आपको इसकी सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

भैंस पालन करने के लिए मूलभूत आवश्यकताए

आपको बता दे की किसी भी व्यवसाय को करने के लिए आवश्यक चीजों की आवश्यकता होती है ,आवश्यक चीजों के अभाव में किसी भी व्यवसाय को नहीं किया जा सकता है। भैंस पालन के लिए आवश्यक मूलभूत चीजों जो इस प्रकार है –

सबसे पहले जमीन की आवश्यकता

आपको बता दे की किसी भी व्यवसाय को करने से पहले जमीन का होना आवश्यक है ,क्योकि जमीन के अभाव में भैंस पालन नहीं किया जा सकता है। जमीन को पशु की संख्या के आधार पर खरीदना चाहिए ,अगर जमीन है तो अपनी ही जमीन में करे। किसान 2 या 3 भैंस रखकर भी इस व्यवसाय को शुरू कर सकते है। अगर बड़े स्तर पर व्यवसाय को शुरू करना है तो काफी जमीन की जरूरत होती है।

पशु की सुरक्षा के लिए बड़े की व्यवस्था

आपको बात दे की पशुओ को रखने के लिए स्थानों की मिट्टी सूखी हुई होनी चाहिए ,मिट्टी गीली रखने पर पशुओ में अनेक प्रकार की बीमारिया होती है ,और भैंसो में दूध का उत्पादन भी कम हो जाता है। और जिससे भैंस पालन में कमी दिखाई देने लग जाती है ,अगर किसान बड़े स्तर पर व्यवसाय करना चाहते है ,तो उसके लिए बाड़े को चारो और से दीवार करनी चाहिए ,ताकि बाड़े में अन्य कोई खतरनाक जानवर न जा सके ,और उसके बाद बाड़े को ऊपर से बंद करे ,और चारो तरफ से खुली हवा आने दे ,जिको सर्दियों में अच्छे से ढाका जा सके ,और गर्मियों के मौसम में अच्छे से हवा आ सके।

पशुओ का भोजन की आवश्यकता

आपको बता दे की किसी भी सजीव वस्तु को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है ,इसी प्रकार पशुओ को भी भोजन की आवश्यकता होती है ,दूध देने वाले पशुओ को तो कुछ चीजे दी जाती है जैसे गेहूँ ,मक्का ,बाजरा ,जो और उसके दूध को बढ़ाने के लिए खल की भी आवश्यकता होती है ,वैसे तो सबसे ज्यादा भूसे की आवशयकता पड़ती है ,इसलिए भैस पालन के लिए भोजन का होना जरूरी है।

पानी की व्यवस्था का होना

आपको बता दे की भैस पालन के लिए पनी की भी आवश्यकता होती ही ,पानी के बिना आप या व्यवसाय से अच्छी कमाई नहीं कर सकते है ,भैसो को अन्य पशुओ से ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है ,और गर्मियों के मौसम में तो भैस को रोजाना नहलाना पड़ता है ,और यह अधिक मात्रा में पानी भी पीते है ,इसलिए इनके लिए पानी की व्यवस्था करनी आवश्यक है।

भैस पालन करते समय ध्यान रखे आवश्यक बाते –

  • किसी भी पशु को खरीदने से पहले भैस की अच्छी नस्ल को ही खरीदे।
  • पशुओ को उचित समय पर भोजन और पानी को आवश्यकता अनुसार देना चाहिए।
  • अगर किसी भी पशु में किसी भी प्रकार की बीमारिया दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
  • गीली मिट्टी में पशुओ को नहीं रखे ,ताकि पशु बीमार नहीं पड़े।

सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि

आपको बता दे की किसान भी अगर 3 से 4 भैंस रखना चाहते है तो उनको 4 से 5 लाख रूपये की आवश्यकता होती है। क्योकि भैंस काफी महगी होती है ,उनका रेट 50 हजार से तो कभी कम नहीं होता है ,इस प्रकार सरकार द्वारा भैंस पालन करने वाले किसानो को अनुदान राशि दी जाती है। ताकि किसान भी भैंस ख़रीदकर आर्थिक तंगी से छुटकारा प् सके। यह राशि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए अधिक होती है ,और अन्य के लिए थोड़ी कम होती है। यानी अन्य को लगभग डेढ़ से दो लाख तक अनुदान राशि दे जाति है। इस राशि को प्राप्त करने के लिए लोगो को आवदेन करना होता है ,जिससे इस योजना का लाभ मिल सकता है।

भैंसो में फैलने वाली बीमारिया

आपको बता दे की भेंसो में उनके बीमारिया चलती है ,अगर समय पर पशुओ की देखभाल नहीं की जाति है ,तो पशु को अधिक परेशानिया तो होती ही है ,लेकिन किसानो को भी हानि होती है। कई बार तो किसानो को अधिक मात्रा में नुकसान होता है। भैसो में पाई जाने वाली कुछ बीमारिया इस प्रकार है – मुंहपका खुरपका रोग ,गलघोटू रोग और
पैरों का गलना रोग भी हो जाता है। वैसे तो समय -समय पर पशुओ को टीका लगवाना चाहिए ,और बीमार पड़ने पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

भेंसो की उन्नत नस्ले कोनसी है ?

आपको बता दे की भैंसो की अनेक उन्नत नस्ले पाई जाती है कुछ नस्ले देखने में कफ सूंदर होती है ,और कुछ नस्ले अधिक मात्रा में दूध देती है और कुछ नस्ले सुंदरता के आधार पर भी पाली जाति है भैंस की कुछ किस्मे इस प्रकार है –

मुर्रा नस्ल

इस बहस की नस्ल की उत्पति रोहतक ( हरियाणा ) में मानी जाती है। यह नस्ल बढ़िया होती है ,इस नस्ल के भैस देखने में अन्य भेंसो की तुलना में सुन्दर होती है ,इन भेंसो की कीमत इसकी सुंदरता को देखकर ली जाती है। इस नस्ल की भैंसे 15 से 20 लेटर तक दूध देती है। ,इसके दूध में 7 % प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। इसके सिग पतले होते है और अंदर की तरह मुड़े हुए होते है। इस किस्म की भैंसो की पूछ भी लम्बी पाई जाती है।

जाफराबादी नस्ल की भैंस

आपको बता दे की इस नस्ल की भैंस अधिक मात्रा में दूध देती है ,और यह नस्ल मुख्य रूप से गुजरात में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंसो में माथे पर सफेद रंग का टिका पाया जाता है। इस नस्ल की उत्पति कच्छव, जामनगर जिला में मानी जाती है।

गोदावरी नस्ल की भैस

भैंसो की यह नस्ल आन्ध्रप्रदेश के गोदावरी जिले में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंसो के दूध में वसा की मात्रा अधिक पाई जाती है।

इसके आलावा भी भैंसो की कई नस्ले पाई जाती है ,जिनको अलग – अलग क्षेत्रों में पाला जाता है ,कुछ नस्ल इस प्रकार है ,जैसे – मेहसाना, तराई, टोड़ा , नागपुरी ,साथकनारा , संबलपुरी ,सुरती आदि नस्ले है।

भैंस पालन व्यवसाय से होने वाला लाभ

आपको बता दे की किसानो को किसी भी व्यवसाय से मुनाफा होता है ,लेकिन भैंस से तो अधिक मुनाफा होता है ,इनकी अच्छे से देखरेख की जाये तो इनकी अच्छी नस्ल काफी मुनाफा देती है ,इसके अलावा पशु पालन व्यवसाय करने वाले किसानो को सरकार द्वारा पशु धन क्रेडिट कार्ड से राशि दी जाती है ,जिससे किसानो को होने वाल आर्थिक तंगी से छुटकारा मिलता है। इस प्रकार किसानो को पशु पालन से काफी कमाई होती है।

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