इमली की खेती कैसे करे ? जानिए इसके लिए आवश्यक जलवायु ,मिट्टी ,उन्नत किस्मे ,और पैदावार

Written by Saloni Yadav

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Advanced Cultivation of Tamarind :

आपको बता दे की इमली की खेती खट्टे – मीठे फल के रूप में की जाती है ,इमली को अधिकतर बारिश वाले प्रदेशो में उगाया जाता है इमली को अमेरिका का उष्ण कटिबंधीय पौधा माना जाता है। इमली का स्वाद बहुत ही अच्छा होता है ,जिसके नाम मात्र से ही लोगो के मुँह में पानी आ जाता है ,चाहे बूढ़े हो या बच्चे सभी को यह इमली बहुत पसंद है। इमली की खेती कई राज्यों में मर मसाले की रूप में भी की जाती है। इमली के फूलो का प्रयोग भी भोजन में स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इमली का प्रयोग कई चीजों को बनाने में किया जाता है , इमली के सेवन करने सेइम्युनिटी को मजबूत बनाया जाता है ,इससे पाचनतंत्र को मजबूत भी किया जा सकता है। इमली में मुख्य रूप से पोषक तत्व ,आयरन ,कैल्शियम और पोटेशियम आदि सभी की मात्रा भरपूर पाई जाती है। इसके साथ ही विटामिन भी उचित मात्रा में पाया जाता है ,इमली का पौधा छाया के साथ -साथ लकड़ी और फल भी देता है ,इमली ज्यादतर घरो में पाई जाती है ,इमली से शरीर को काफी लाभ मिलता है।

इमली काका पौधा फलदार पौधा माना जाता है ,जिसकी खेती मसाले के रूप में भारत के अनेक राज्यों में की जाती है। इमली के फूलो और बीजो का प्रयोग सब्जी बनाने में भी किया जाता है। बाजार में भी इमली की काफी मांग होती है। इमली की खेती किसानो को अधिक से अधिक मुनाफा देती है ,इसकी खेत कर किसानो को भी ख़ुशी मिलती है।

इमली की गिरी का प्रयोग पाउडर बनाने में भी किया जाता है। इमली की खेती में अफ्रीका का मूल स्थान है विश्व में इसकी खेती ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और पूरे दक्षिण पूर्व एशिया आदि देशो में की जाती है। भारत में इमली की खेती महाराष्ट ,कर्नाटक ,आन्ध्रप्रदेश ,तमिलनाडु ,मध्य्प्रदेश ,उड़ीसा और तेलंगाना में मुख्य रूप से की जाती है अगर आप भी इमली की खेती करना चाहते है तो आज हम आपको इसकी खेती कैसे करे? ,इसके लिए आवश्यक जलवायु ,मिट्टी ,तापमान ,और पैदावार की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

इमली की खेती के लिए आवश्यक जलवायु

आपको बात दे की इमली की खेती अफ्रीका में मूल रूप से की जाती है। इसलिए यही कारण है की इसकी खेती के लिए उष्ण कटिबंधीय जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। इमली की अच्छी पैदावार के लिए 100 से 200 वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है। इमली की खेत गर्मियों में चलने वाली लू को भी सहन कर सकती है ,लेकिन सर्दियों में पड़ने वाले पाले और ओस इसकी फसल को नुकसान पहुँचती है।

इमली की खेत के लिए आवश्यक मिट्टी

इमली की खेत लगभग सभी प्रकार की भूमि में सफलतापूर्वक की जा सकती है ,लेकिन दोमट मिट्टी ,बलुई और जलोढ़ मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है ,इसके अलावा गहरी दोमट मिट्टी में इसकी खेती अच्छी उपज देती है। इमली को लवण युक्त भूमि में भी आसानी से उगाया जा सकता है। किसी विशेष भी की आवश्यकता नहीं होती है।

इमली की खेती में सिचाई की आवश्यकता

आपको बता दे की इसकी फसल को अधिक सिचाई की जरूरत नहीं होती है ,खेत मे नमी को बनाये रखे और खेत में जल भराव की स्थिति न होने दे नहीं तो पोधो में कीट और रोग लगने का डर रहता है। गर्मियों के मौसम में इसकी सिचाई पर विशेष ध्यान दे ,और सर्दियों के मौसम में 10 से 17 दिनों के अंतराल पर सिचाई करे। तथा बारिश होने पर आवश्यकता होने पर ही सिचाई करे।

इमली की खेती में खरपतवार नियंत्रण

आपको बता दे की किसी भी फसल में खरपतवार पर विशेष ध्यान दिया जाता है ,और इसकी फसल में प्राकृतिक तरिके से खेत की निराई – गुड़ाई करनी चाहिए। ,जिससे फसल की पैदावार अच्छी होगी और किसानो को भी अधिक मात्रा में मुनाफे की प्राप्ति होगी।

इमली की उन्नतशील किस्मे

इमली की अनेक किस्मे पाई जाती है ,इमली की कई किस्मे जलवायु और मिट्टी के आधार पर पैदावार देती है ,इमली की कई किस्मे कम समय में अधिक पैदावार देने के लिए तैयार की जाती है ,इमली की कुछ किस्मे इस प्रकार है –

  • तेतेली किस्मे
  • आमली किस्मे
  • उरगम किस्मे
  • आमली किस्मे
  • चिंतपांडु किस्मे
  • PKM – 1 किस्मे
  • डालिमा किस्मे
  • तिंतिरी किस्मे
  • तेंतुल किस्मे
  • पूली किस्म

इमली की खेती में लगने वाले रोग और कीट व् रोकथाम के उपाय

आपको बता दे की इमली में अनेक रोग नहीं लगते है ,अगर स्क्लेरोशियम रोल्फसाई रोग दिखाई देता है तो उसके लिए उचार करना चाहिए ,यह रोग जब पौधे अंकुरण के लिए जमीन से बाहर आते है तो उस समय यह रोग दिखाई देता है। इस रोग के रोकथाम के लिए रोग से ग्रसित पौधे को अलग करे ,और बीजो की बुआई के पहले उनको उपचारित कर बोए।

इसके साथ ही इमली के पौधे पर कीटो का आक्रमण भी होता है। कीट भी पौधे की फलियों और पत्तियों पर मुख्य रूप से आक्रमण करते है और फूल को नष्ट कर देते है ,जिससे फसल में पैदावार भी अच्छी नहीं होती है। इसके रोकथाम के लिए बीजो की बुआई से पहले बीजो को उच्चारित कर बोना चाहिए ,और कीटनाशक का प्रयोग करे।

इमली की खेत के लिए खेती की तैयारी

आपको बता दे की इमली की खेती के लिए खेत को अच्छे से तैयार करना चाहिए सबसे पहले खेत में पुराणी फसल को पूरी तरह नष्ट करे और उसके बाद खेत में गोबर की खाद को डालना चाहिए ,और उस खाद को मिट्टी में जुताई की सहायता से मिलाए ,और उसमे फिर से गहरी जुताई के बाद खेत में पाटा लगवाककर खेत को समतल करे ,जब मिट्टी भुरभुरी हो जाये तब खेत में फसल की पैदावार भी काफी अच्छी होगी।

इमली की खेती के लिए पौधे की रोपाई

इमली की रोपी पौधे के रूप में की जाती है। इसके लिए पौध को नर्सरी में तैयार किया जाता है बीजो को पौध के रूप में तैयार करने के लिए 24 घंटे पानी में भिगोकर रखना चाहिए ,ताकि बीजो का अंकुरण अच्छे से हो सके। इसके बीजो को मार्च और अप्रैल के महीने में लगाया जता है। इमली की पौध रोपाई के लिए खेत में गड्डो को तैयार करे और उसमे नर्सरी से तैयार पौध को लगाए। ध्यान रहे की नर्सरी से ली गयी पौध स्वस्थ और अच्छी किस्म वाली होनी चाहिए।

इमली की फसल की कटाई और उपज की प्राप्ति

इमली की फसल पौध रोपाई के 8 से 9 साल के बाद पैदावार देना शुरू करती है। जनवरी और अप्रैल के महीने इसकी फल की तुड़ाई की जाती है ,बीजो द्वारा तैयार पौधे अधिक समय लगते है ,लेकिन कलम दुआरा तैयार पौधे 4 से 6 साल में उपज देते है ,जिससे किसानो का काफी लाभ मिलता है।

इमली के प्रत्येक पेड़ 100 Kg फालियो की पैदावार देता है। जिससे किसानो को अधिक मात्रा में मुनाफा मिलता है ,इसका बाजार भाव भी अच्छा पाया जाता है ,वर्ष में पुरे विकसित एक पौधे से 2 किवंटल की पैदावार होती है ,जिससे किसान भाई अच्छी कमाई कर लेते है।

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