अलसी की खेती कैसे की जाती है ,जानिए इसकी सम्पूर्ण जानकारी

Written by Saloni Yadav

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Cultivation Of Linseed : अलसी की खेती तिलहन फसल के रूप में की जाती है। जिसका उपयोग तेल निकलने में और दवाइया बनाने में किया जाता है। इसको तेल खाने के उपयोग में नहीं लिया जाता है। अलसी से रेशा प्राप्त किया जा सकता है। और रेशे से लिनेन तैयार किया जाता है। अलसी का प्रयोग विभिन्न रूपों में की जाती है। अलसी के खली पशु के लिए काफी लाभ दायक होती है। अलसी की खली में पोषक तत्वों की मात्रा अधिक पाई जाती है। भारत में इस अलसी के उत्पादन में तीसरा स्थान है। आपको बता दे की इसमें अनेक प्रकार के गन पाए जाते है। अलसी को प्रत्येक भाग मूल रूप के उपयोगी होता है। इसका उपयोग तेल बनाने में भी किया जाता है। अलसी को प्रयोग खाद के रूप में भी किया जाता है। क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में भारत का दूसरा स्थान है । अलसी के तने से अच्छा रेशा प्राप्त किया जा सकता है ,भारत में अलसी की खेती मुख्य रूप से बिहार, उड़ीसा ,राजस्थान ,उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्य है।

अलसी से निकले वाले रेशे का प्रयोग कागज बनाने के लिए किया जाता है ,तथा इसके अलावा भी इसका प्रयोग अन्य चीजों को बनाने में किया जाता है। वैसे तो अलसी की खेती भारत जैसे देशो में बीज के लिए भी की जाती है। इसके बीजो से तेल निकला जाता है। अलसी के बीज ज्यादा चिकने होती है ,जिससे जल-रोधक फैब्रिक तैयार किया जाता है। इसका प्रयोग प्लास्टिक बनाने में भी किया जाता है।

अलसी को वानस्पतिक नाम ”लाईनम यूसीटैटिसिमम ”होता है अलसी के बीजो में तेल की मात्रा 35 से 49 % पाया जाता है । अलसी का प्रयोग अनकक तेजो को बनाने में किया जाता है। अगर आप भी अलसी की खेती करना चाहते है तो आज हम आपको इसकी खेती कैसे की जाती है ,और इसके लिए आवश्यक जलवायु और तापमान ,मिट्टी और पैदावार की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

अलसी की खेती के लिए आवश्यक जलवायु

आपको बता दे की इसकी खेती के लिए शुष्क जलवायु अच्छी मानी जाती है ,और इसकी खेतीराबी की खेती को काटने के बाद की जाती है। 40 से 45 कम मीटर की अच्छी पैदावार होती है ,किसी भी खेती के लिए जलवायु का अधिक महत्व होता है। इसलिए  खेती को आप ठंडे प्रदेशो में भी कर सकते है।

अलसी की खेत के लिए आवश्यक तापमान

आपको बात दे की फसल की अच्छी पैदावार के लिए तापमान का होना भी आवश्यक है ,इसलिए इसकी खेती के लिए सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है ,अलसी के बीज अंकुरण में 15 से 22 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है ,और इसके पोधो को अच्छे विकास के लिए सामान्य तापमान में होना जरूरी है ,

अलसी की खेती के लिए आवश्यक मिट्टी

आपको बता दे की इसकी खेती के लिए काली चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी गयी है इसके अलावा मिट्टी उच्च जलनिकास की हो तो पोधो का विकास अच्छे से होता है। वैसे तो फसल की अच्छी पैदावार मिट्टी पर भी निर्भर करती है। और इसकी खेती के लिए मिट्टी का PH मान सामान्य होना चाहिए ,न तो अधिक होना चाहिए और न ही कम होना चाहिए।

अलसी की खेती के लिए आवश्यक सिचाई

आपको बता दे की इसकी खेती की अच्छी पैदावार के लिए सिचाई की आवश्यकता होती है। अलसी की फसल असिंचित रूप से की जाती है। लेकिन जहाँ पानी के साधन उपलब्ध होते है ,वह इसकी सिचाई पोधो में फूल आने और दानो के निकलने में की जाती है। वैसे तो इसकी फसल को अधिक मात्रा में सिचाई की जरूरत नहीं होती है। केवल 2 से 3 सिचाई की आवश्यकता होती है। बीजो की बुआई के दौरान इसकी खेती में पानी देना आवश्यक है।

अलसी की खेती के लिए खरपतवार नियंत्रण

इसकी खेती की अच्छी उपज के लिए खेत से खरपतवार का नष्ट करना चाहिए ,उसके बाद आपको बता दे की खरपतवार को दो तरीके से नियंत्रित किया जाता है ,इसलिए आपको प्राकृतिक तरीके से खेत में निराई – गुड़ाई करनी चाहिए। इसके अलावा आप रासायनिक तरीके का प्रयोग भी कर सकते है ,तथा उसके लिया आपको बीजो की रोपाई से पहले बीजो को पेंडीमेथालिन 30 ई.सी. की उचित मात्रा का छिड़काव करना चाहिए।।

अलसी की खेती के लिए खेत को तैयार करना

आपको बात दे की इसकी खेती की अच्छी पैदावार के लिए आपको खेत की गहरी जुताई करनी होती है। उसके बाद खेत की मेटि को धूप लगने के लिए कुछ समय के लिए खुला छोड़ देना चाहिए। फिर कुछ दिनों के बाद खेत में गोबर की खाद डालनी चाहिए तथा खाद को मिट्टी में अच्छे से मिलाना चाहिए ,और उसके बाद आपको खेत में पानी से पलेव करना चाहिए ,जब मिट्टी थोड़ी -बहुत सूख जाये तब उसके फिर से जुताई कर खेत को समतल करवा देना चाहिए।

अलसी के बीजो रोपाई और समय

अलसी के रोपाई पौध के रूप में न करकर बीज के रूप में की जाती है। इसके लिए बीजो की बुआई से पहले बीजो को उपचारित कर बुआई करनी चाहिए ,उसके बाद इसके बीजो को पक्तियो में बोना चाहिए ,इसलिए बीजो को बोन से पहले तैयार खेत में 1 cm की दूरी रखते हुए खेत में पक्तियो को तैयार कर लेना चाहिए ,बीजो को छिड़काव विधि के द्वारा लगाना चाहिए। एक हेक्टैयर के खेत में 40 से 47 KG बीजो की आवश्यकत पड़ती है।

आपको बात दे की अलसी के बीजो की रोपाई असिंचित क्षेत्रों में अक्टूबर के महीने में और सिंचित क्षेत्रों में अक्टूबर के महीने में की जाती है । वैसे तो बीजो की रोपाई ठन्डे मौसम में करना अच्छा माना जाता है।

अलसी की उन्नत किस्मे

आपको बता दे की अलसी की अनेक उन्नत किस्मे पाई जाती है जिससे कम समय में भी अधिक मात्रा में पैदावार प्राप्त कर सकते है इस लिए आपको अलसी की उन्नत किस्मो की जानकारी देंगे।

RLC 6 किस्म

आपको बात दे की अलसी की यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से असिंचित क्षेत्रों में 10 से 11 किवंटल और सिंचित क्षेत्रों में 13 से 15 किवंटल की पैदावार देती है। इस किस्म को दोना क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। इस किस्म के बीजो का आकर छोटा पाया जाता है और इसमें 45 % ताल की मात्रा पाई जाती है।

T 397 किस्म

आपको बता दे की यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 15 से 17 किवंटल के आस -पास पैदावार देती है और इस किस्मे के पौधे में निकलने वाले फूलो का रंग नीला पाया जाता है इसमें तेल की मात्रा 45 % पाई जाती है ,इस किस्म को दोनों क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। इसके पौधे मध्यम उचाई के होते है। इसके पौधे में शाखाए अधिक पाई जाती है

इसके आलावा भी इसकी कई किस्मे पाई जाती है जो इस प्रकार है – जे. एल. एस. – 66 किस्म , सुरभि ,जीवन। पूसा – 3 ,अल सी 185 , के 2 ,शीला , अल सी 2023 और 2063 और जे.एल.एस. – 67 आदि किस्मे है।

अलसी की खेती में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय

भभूतिया रोग

तह रोग पौधे की पत्तियों पर सफेद रंग का अवसाद जमा कर देता है ,और जिससे पौधे की पत्तिया सूख जाती है। यह रोग पोधो में तब दिखाई देता है जब देर से बुआई करे या अधिक वर्षा होने से अधिक समय एक आद्रता बनी रहती है। यह रोग पौधे की पत्तियों को सुखकर नष्ट कर देता है। और इससे पौधे का विकास भी बंद हो जाता है।

रोकथाम के उपाय
इस रोगको रोकने के लिए थायोफिनाईल मिथाईल ,डब्ल्यू. पी. 300 ग्राम प्रति हेक्टैयर के हिसाब से स्प्रे करनी चाहिए।

फली मक्खी

आपको बात दे की यह रोग एक प्रकार की इल्ली होती है ,जो फसल को अधिक नुकसान देती है ,और यह बीजो को ही नष्ट करती है ,तथा बीजो को भूमि से बाहर नहीं आने देती है। यह रोग फली के अंडाशयों को खा जाती है।

रोकथाम के उपाय

इस रोग के रोकथाम के लिए ईमिडाक्लोप्रिड का घोल बनाकर पोधो पर छिड़काव करना चाहिए।

उकठा रोग

आपको बता दे की यह रोग भी पौधे की पत्तियों पर आक्रमण करता है और जिससे पत्तिया अंदर की तरफ होकर मुरझा जाती है ,और इसकी पत्तिया पीली पड़ जाती है ,और पूरी तरह से खराब हो जाती है। और सूखकर भूमि पर गिर जाती है।

रोगथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे पर ट्राइकोडर्मा का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

अलसी फसल की कटाई और पैदावार

आपको बता दे की यह फसल बीज रोपाई के 120 से 130 दिनों के बाद पैदावार देना शुरू कर देती है। जब पौधे सूखने लगे तब कटाई करनी चाहिए। पोधो की कटाई कर बीजो को झाड़कर अलग करना चाहिए ,अलग -अलग किस्मे के आधार पर पौधे पैदावार देते है। जिससे किसानो की अच्छी कमाई होती है

अलसी का बाजारी भाव काफी अच्छा पाया जाता है ,इसके पौधे से 40 % रेशे की प्राप्ति होती है और प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 10 से 15 किवंटल की पैदावार प्राप्त की जा सकती है ,जिस हिसाब से भी किसानो को अच्छा मुनाफा प्राप्त हो सकता है।

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