तुलसी की खेती की सम्पूर्ण जानकारी : जलवायु ,मिट्टी ,पैदावार ,और रोग और रोकथाम के उपाय

Written by Saloni Yadav

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Cultivation Of Tulsi :

तुलसी को पौधा देखने में झाड़ीनुमा होता है। तुलसी में अनेक गन पाए जाते है ,तुलसी को भारत में माता लक्ष्मी के समान पूजा जाता है ,हिन्दू समाज में तुलसी का अधिक महत्व होता है ,तुलसी से अनेक प्रकार की आयर्वेदिक दवाइया बनाई जाती है ,तुलसी को पौधा छोटा -सा होता है। इसका उपयोग किसी न किसी रूप में किया जाता है ,तुलसी के पौधे को घरो में लगाया जाता है ,और रोज स्नान कर इसकी पूजा – अर्चना की जाती है तुलसी के पौधे की लम्बाई 2 से 4 फ़ीट पाई जाती है ,भारत में कई क्षेत्रों में तुलसी की मांग होती है ,क्योकि इसका प्रयोग यूनानी आयर्वेदिक दवाइयों में किया जाता है। इसकी खेती कर किसान भाई अच्छा मुनाफा कमा लेते है। तुसी के पौधे में रोग कम दिखाई देते है ,क्योकि इसके पौधे में रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। सर्दियों के मौसम में खासी ,जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों के चाय बनाकर पीने से इनसे छूटकर पा सकते है।

तुसली का वानस्पतिक नाम ओसिमम सैंकशम होता है ,जो एक औषधीय पौधा होता है ,तुलसी को अनेक नाम से जाना जाता है। तुलसी को सम्पूर्ण पौधा हल्के हरे रंग का होता है ,परन्तु उसमे निकलने वाले फूल जामुनी रंग के होते है। भारत के मध्य प्रदेश राज्य में इसकी खेती आमतौर से की जाती है। भारत में इसकी खेती बड़े स्तर पर की जाती है। तुलसी की खेत कम खर्च और समय में अधिक पैदावार देती है। धार्मिक ग्रंथो में इस पौधे का अधिक महत्व पाया जाता है। आपको बता दे की तुलसी की लगभग 150 से अधिक किस्मे पाई जाती है ,जिनका भी बहुत महत्व होता है।

इस तरह तुलसी की खेती कर किसान अच्छा लाभ कमा सकते है। वास्तुशास्त्र में कहा गया है की तुलसी की पत्तियों को दांत से नहीं चबाना चाहिए ,क्योकि ऐसा करने पर पाप लगता है। तुलसी के पौधे को हिन्दू समाज में बहुत महत्व दिया जाता है ,अगर आप भी इसकी खेती करने का मन बना रहे है तो आज हम आपको तुलसी की खेत कैसे करे ,इसके लिए उपयुक्त जलवायु मिट्टी ,और इसकी खेती में कुछ रोगो के उपाय की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

तुलसी की खेत के लिए आवश्यक जलवायु ,तापमान

आपको बता दे की तुलसी ककी खेती उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक मात्रा में पैदावार देती है। और इसकी खेती को सर्दी में गिरने वाले पाले से बचना चाहिए ,जिससे भरी मात्रा में नुकसान होता है।

तुलसी की खेत के लिए अधिक तापमान के आवश्यकता नहीं होती है । इसके लिए सामान्य तापमान होना चाहिए ,सामान्य तापमान में तुलसी के पौधे अच्छे से विकसित होते है। इसलिए इसकी खेती सामान्य तापमान वाले क्षेत्रों में की जानी चाहिए।

तुलसी की खेत के लिए आवश्यक मिट्टी और सिचाई

तुलसी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा पोषक तत्वों से भरपूर उच्च जल निकास वाली मिट्टी में इसकी उपज अच्छी होती है ,इसके साथ ही फसल की अच्छी पैदावार के लिए भूमि का PH मान 5 से 7 के बीच होना आवश्यक होता है।

तुलसी के पौधे में एक वर्ष में 9 से 11 सिचाई की जानी चाहिए ,तुलसी के पोधो की रोपाई सूखी भूमि में की जाती है ,इसलिए पौध रोपी के तुरंत बाद सिचाई की आवश्यकता होती है ,उसके बाद तुलसी के खेत में नमि बनाये रखने के लिए 4 से 5 दिनों तक लगातार सिचाई करे। बारिश होने पर इसके खेत में हल्की सिचाई करनी चाहिए।

तुलसी के खेत की तैयारी कैसे करे

आपको बात दे की तुलसी की खेती पुरे 3 साल तक हरी -भरी रहती है ,इसलिए खेत की अच्छी और गहरी जुताई कर खेत को अच्छे से तैयार करना चाहिए ,उसके बाद खेत को कुछ समय के लिए ऐसे हो छोड़ देना चाहिए ,ताकि खेत की मिट्टी को धूप लग सके और उसके बाद खेत में गोबर की खाद को प्रति हेक्टैयर के हिसाब से डालना चाहिए ,इसके अलावा आप कम्पोस्ट खाद कर उपयोग भी कर सकते है ,उसके बाद खाद को मिट्टी में हल की सहायता से मिलाना चाहिए उसके बाद खेत में पानी से पलेव करे और जब मिट्टी कुछ सूख जाये तब फिर से गहरी जुताई करनी चाहिए उसके बाद खेत में पाटा लगवाकर खेत को समतल करे।

तुलसी के पौधे की पौध रोपाई

आपको बता दे की तुलसी की रोपाई पौध के रूप में की जाती है ,इसके लिए पौध को पहले नर्सरी में तैयार किया जाता है ,उसके 1 साल बाद पौध की खेत में रोपाई की जाती है। पौध रोपाई के लिए खेत में 1 फ़ीट की दुरी पर मेड बनाये और मेड़ो पर पौध को मशीनों की सहायता से लगाना चाहिए।
तुलसी की पौध रोपाई अप्रैल के महीने में करनी चाहिए ,क्योकि यह महीना इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है।

तुलसी के खेत में खरपतवार नियंत्रण

आपको बता दे की खरपतवार को नियंत्रण करने के दो तरीके है ,लेकिन तुलसी के खेत में रासायनिक तरीके का प्रयोग नहीं करना चाहिए ,क्योकि इसकी खेती आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने के लिए की जाती है। इसके लिए इसकी खेती में प्राकृतिक तरीके का प्रयोग की जाता है ,जिसके लिए खेत में खरपतवार को नष्ट करने के लिए खेत की निराई -गुड़ाई की जाती है। इसके अलावा खेत में 2 से 3 गुड़ाई करनी चाहिए।

तुलसी की उन्नतशील किस्मे

आपको बता दे की तुलसी की 150 से भी अधिक किस्मे पाई जाती है ,तुलसी की कुछ किस्मे कम समय में भी अधिक पैदावार देती है ,तुलसी की खेती ओषधियो को बनाने में की जाती है। तुलसी की कुछ किस्मे इस प्रकार है –

  • ओसिमम किलिमण्डस्क्रिकम किस्म
  • ओसिमम सैंकटम किस्म
  • कर्पूर तुलसी किस्म
  • कृष्ण तुलसी किस्म
  • अमृता तुलसी किस्म
  • ओसिमम ग्रेटिसियम किस्म
  • रामा तुलसी किस्म
  • ओसियम बेसीलिकम किस्म

तुलसी में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय

आपको बता दे की तुलसी के पौधे में जल्दी से रोग दिखाई नहीं देते है ,क्योकि तुलसी के पौधे में रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। लेकिन फिर भी कभी रोग लग जाते है ,जो इस प्रकार है –

पत्ती झुलसा रोग

तह रोग तुलसी की पत्तियों पर देखने को मिलता है ,इसको प्रभाव ज्यादातर पत्तियों पर पाया जाता है ,यह रोग गर्मियों में लगता है ,इस रोग से पौधे की पत्तियों पर धब्बे पाए जाते है

रोकथाम के उपाय
इस रोग को रोकने के लिए फाइटो सैनिटरी विधि का इस्तेमालकिया जाता है।

जड़ गलन रोग

यह रोग तुलसी के पौधे पर अक्सर जलभराव की स्थिति में लगता है। इससे पौधे की पत्तियों तो पीली हो जाती है और पौधे की जड़े गलने लगती है ,यह रोग पूrरे पौधे पर फैल जाता है

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए सबसे ज्यादा जरूरी की खेत में जलभराव की स्थिति न होने दे और अगर यह रोग लग जाये तो बाविस्टिन का छिड़काव करना चाहिए।

तुलसी की खेती की कटाई और उपज

आपको बता दे की तुलसी की कटाई तब करे जब पौधा पूरी तरह विकास कर ले और पौधे के नीचे से इसकी पत्तिया सूखने लगे और अच्छे से फूल भी आ जाए। इसकी कतई भूमि से 20 cm की उचाई पर की जानी चाहिए।

तुलसी की खेती एक हेक्टैयर के हिसाब से खेत में 25 से 30 टन की पैदावार देती है ,तुलसी का बाजार में भाव 500 रूपये किलो होता है। तुलसी से तेल भी निकाला जाता है ,जिससे किसानो को काफी मात्रा में मुनाफा मिलता है।

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