खुबानी की सबसे बहतरीन किस्मे ,जो देगी किसानो को बंपर पैदावार

Written by Saloni Yadav

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Best Varieties Of Khubani : आपको बता दे की खुबानी की खेत ज्यादातर ठन्डे प्रदेशो में की जाती है ,खुबानी किसानो की आय का सबसे बड़ा स्तोत्र माना जाता है। इसको शुष्क मेवा के नाम से भी जाना जाता है। खुबानी को सूखने के बाद बादाम ,काजू और अखरोट आदि की तरह ही शुष्क मेवा की तरह प्रयोग में लिया जाता है। खुबानी के आरएसएस काफी स्वादिष्ट होता है। कुबानी की बहुत से किस्मे होती है ,जिसमे इसका स्वाद काफी बादाम की तरह काफी मीठा होता है। खुबानी में 12 % लौह तत्व की मात्रा और 5 % पोषक तत्व की मात्रा पाई जाती है।

कहा जाता है की खुबानी के बीजो में जहर होता है ,इसलिए इसके बीजो को बच्चो को नहीं देना चाहिए ,लेकिन बड़े लोग इसके 2 से 3 बीज खा सकते है ,यानि की इसके बीजो का अधिक मात्रा में सेवन नहीं किया जाना चाहिए। खुबानी की खेती नगदी फसल के रूप में की जाती है ,यह गुठली वर्गीय फसल होती है ,जिसको भारत जैसे राज्यों में चोले के नाम से जाना जाता है। विश्व में खुबानी की खेती उच्च स्तर पर की जाती है। भारत में भी इस ज्यादातर हिमालय वाले प्रदेशो में उगाया जाता है। भारत की बात करे तो इसकी खेती कश्मीर ,उत्तराखंड और हिमाचल आदि राज्यो में की जाती है। खुबानी के पौधे में लाल ,गुलाबी ,पीला ,भूरा और सफेद रंग के फल होते है ,बादाम की तरह खुबानी में बादाम की तरह अंदर की तरफ बीज निकलता है।

कुबानी का वैज्ञानिक नाम प्रूनस आरमीनिआका होता है। इसको अंग्रेजी की भाषा में एप्रिकौट के नाम से जाना जाता है। इसकी उतपति का मूल स्थान अमेरिका को माना जाता है। विश्व में खुबानी का सबसे बड़ा उत्पादक देश तुर्की को माना जाता है ,यानी तुर्की में कुबानी की फसल को अधिक मात्रा में उगाया जाता है। विश्व में तुर्की के अलावा भी इसकी खेती अन्य देशो में की जाती है। जैसे तुर्की ,अमेरिका ,पाकिस्तान ,भारत और अन्य देशो में भी खुबानी की खेती की जाती है। इसकी खेती अधिकतर ठंडे प्रदेशो में की जाती है।

खुबानी को विश्व भर में उगाया जाता है ,यह फसल किसानो की आय के अच्छा मुनाफा देता है। खुबानी का प्रयोग काफी चीजों को बनाने में किया जाता है। इससे मदिरा भी बनाई जाती है ,और तेल भी निकला जाता है। इसमें काफी खनिज तत्व पाए जाते है ,सूखी खुबानी का सेवन शरीर के लिए काफी अच्छा होता है। अगर आप भी खुबानी की अच्छी पैदावार प्राप्त करना चाहते है तो उससे पहले आपको इसकी सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करनी आवश्यक है ,उसके बाद आप बेस्ट किस्मो का चयन कर अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते है इसलिए आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से खुबानी की उन्नतशील किस्मो की जानकारी देंगे।

खुबानी की बेस्ट किस्मे या उन्नत किस्मे

खुबानी की अनेक प्रकार की किस्मे पाई जाती है ,कुछ किस्मे मीठी ,खट्टी और कई प्रकार की किस्मे होती है ,किस्मो के आधार पर ही फसल में पैदावार अच्छी होती है ,,और किसानो को भी अधिक मात्रा में मुनाफे की प्राप्ति होती है। खुबानी की कुछ किस्मे का वर्गीकरण किया गया है जो इस प्रकार है –

कुबानी की मीठी गिरी वाली कुछ किस्मे –

खुबानी की वे किस्मे जिसकी गिरी मीठी पाई जाती है , खाने में काफी स्वादिष्ट होती है और इसका प्रयोग जूस बनाने में भी किया जाता है जो इस प्रकार है – नरी ,शक्करपारा , सफेदा, पैराचिनार, नगेट और चारमग्ज आदि किस्मे है ,जो खाने में मीठी के साथ काफी स्वादिष्ट होती है।

खुबानी की देर से पकने वाली किस्मे

खुबानी की वे किस्मे जिसको पकने में काफी समय लगता है ,या देर से पककर तैयार होती है। कुछ इस प्रकार है – सेन्ट एम्ब्रियोज, एलेक्स ,वुल्कान और रायल आदि किस्मे है जो देर से पकती है।

खुबानी की सूखे मेवा के रूप में उपयोग की जाने वाली किस्मे

खुबानी की वे किस्मे जो सुखाकर तैयार की जाती है ,इसको मेवा की तरह सुखकर भी खाया जाता है ,जो इस प्रकार है – केशा,चारमग्ज, नाटी,शक्करपारा , सफेदा और पैरा पैरोला आदि किस्मे है जो सूखे मेवा के रूप में प्रयोग ली जाती है।

खुबानी की जल्दी या शीघ्र तैयार होने वाली किस्मे

खुबानी की वे किस्मे जो पौध रोपाई के कम दिनों में या जल्दी तैयार हो जाती हो ,जो इस प्रकार है – न्यू लार्जअर्ली, चौबटिया मधु, कैशा,मास्काट ,डुन्स्टान और शिपलेज अर्ली आदि किस्मे है जो शीघ्र ही तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।

खुबानी की सामान्य अवधि में तैयार होने वाली किस्मे

खुबानी की वे किस्मे जो कम और ज्यादा नहीं जबकि सामान्य अवधि में तैयार की जाती है ,जो इस प्रकार है – क्लूथा गोल्ड ,हरकोट, ऐमा, सफेदा ,टर्की, चारमग्ज ,शक्करपारा , मोरपार्क और केशा आदि किस्मे है को सामान्य अवधि में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है।

ठंडे या तराई के क्षेत्रों में की जाने वाली किस्मे

वे किस्मे जो तराई के क्षेत्रों में की जाती है ,जो इस प्रकार है – आस्ट्रेलियन ,पालमपुर स्पेशल और सफेदा आदि जो मुख्य रूप से उगाई जाती है।

खुबानी की कुछ किस्मे इस प्रकार है –

हरकोट किस्म

यह किस्म के पौधे से आकर्षक फल प्राप्त होते है ,और यह किस्म झुलसा रोग से रहित होती है। इसका रंग पीलापन लिए गुलाबी होता है। और यह किस्म जून में पककर तैयार हो जाती है। इसकी खेती ज्यादातर मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में की जाती है।

कैशा किस्म

इस किस्म के फल जून महीने में पककर तैयार हो जाते है। इसके फल का आकार गोल होता है इस किस्म में फल की की गुठली का आकर मध्यम होता है।

शक्करपारा किस्म

आपको बात दे की इस किस्म के फल मध्यम आकार में पाए जाते है ,और छिलके का रंग पीला होता है। यह किस्म में जून के महीने में ही पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म में निकलने वाली गिरी कड़ी होती है।

सफेदा किस्म

यह किस्म भी खुबानी की है इसका आकार आयताकार होता है। इस किस्म के फल काफी रसीले होते है और खाने में भी काफी स्वादिष्ट होते है। यह किस्म भी जून के महीने में पैदावार देना शुरू करती है।

गौरव लाल गाल खुबानी किस्म

इस किस्म में निकालने वाली फल खाने में काफी स्वादिष्ट होते है। यह किस्म वर्ष में एक पेड़ से 80 से 100 KG की उपज देती है। आपको बता दे की खुबानी की यह किस्म गर्म जलवायु को सहन कर लेती है जिस कारण इसके फलो का भंडार काफी होता है।

मेलिटोपोल ब्लैक किस्म

खुबानी यह किस्म एक संकर किस्म है,यह किस्म ठंडे क्षेत्रों में अच्छी पैदावार देती है इस फल का रंग बाहर से काले रंग का होता है तथा अंदर से इसका गुदा लाल रंग का होता है। यह किस्म जुलाई के महीने में अच्छी पैदावार देती है यह किस्म अधिक मात्रा में पैदावार नहीं देती है।

ब्लैक प्रिंस

यह किस्म भी संकर किस्म है ,इस किस्म के पौधे लाल रंग के पाए जाते है ,यह किस्म अन्य किस्मो की तुलना में अधिक मात्रा में पैदावार देती है ,इस किस्म की पौधे की उचाई अधिक न होकर सामान्य पाई जाती है। इस किस्म को ठन्डे प्रदेशो में नहीं उगना चाहिए ,क्योकि यह किस्म अच्छी उपज नहीं देती है। इस किस्म में रोग भी अधिक मात्रा में नहीं लगते है।

इसके अलावा भी खुबानी की अन्य किस्मे पाई जाती है ,जो इस प्रकार है -चारमग्ज ,अनानास खुबानी,काला मखमल ,चौबटिया, अलंकर, चौबटिया मधु, चौबटिया केसरी ,अर्ली सिप्ले, न्यूलार्जअर्ली,न्यूकेस्टल और मोरपार्क आदि किस्मे है।

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