मटर की उन्नत किस्में देगी किसानो को फसल में अधिक मुनाफा ,जानिए कौनसी है मटर की वे उन्नत किस्मे

Written by Saloni Yadav

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Improved Varieties Of Peas :

मटर की फसल कम समय में भी अधिक पैदावार देती है। और इसकी खेती ठन्डे क्षेत्रों में की जाती है।वैसे तो भारत में अनेक प्रकार की सब्जिया उगाई जाती है ,लेकिन सभी सब्जियों में मटर को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है मटर के दानो की ज्यादतर सब्जी बनाई जाती है ,लेकिन इसका प्रयोग सब्जी के अलावा अन्य चीजों में भी किया जाता है मटर में अमीनो एसिड और प्रोटीन की मात्रा अच्छी पाई जाती है। इसका प्रयोग लोग पशुओ को खिलने में भी किया जाता है। मटर से सूखी दाल बनाई जाती है। और इसके अलावा मटर को अच्छे से सूखकर कई दिनों तक रख सकते है। मटर एक दलहनी फसल मानी जाती यही। आपको बता दे की सर्दियों में मटर का भाव बढ़ जाता है ,जिससे बाजार में इसकी मांग अधिक पाई जाती है। मटर की खेती को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। क्योकि इसकी खेती सर्दियों के मौसम में की जाती है। मटर को खाने से शरीर में अनेक प्रकार से लाभ होते है। मटर में उनके पोषक तत्व पाए जाते है ,जो शरीर के लिए काफी लाभदायक होते है ,इसके साथ ही मटर में फास्फोरस ,आयरन ,प्रोटीन और विटामिन उचित मात्रा में मिलता है। खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए मटर की खेती की जाती है ,जिससे मिट्टी उपजाऊ हो जाती है और उसके बाद उसमे किसी भी खेती को किया जा सकता है।

आपको बता दे की मटर का पौधा द्विबीजपत्री पौधा होता है ,जिसके पोषे में हरे रंग के मटर के दाने निकलते है इसकी एकक फली में 10 से 12 दाने निकलते है ,इसकी खेती भारत में कर्णाटक ,हरियाणा ,हिमाचल प्रदेश और बिहार में मुख्य रूप से की जाती है। मटर की यह फसल लैग्यूमिनसियाइ परिवार से संबंध रखती है। अगर आप भी मटर की खेती में अच्छी पैदावार प्राप्त करना चाहते है तो आज हम आपको मटर की उन्नत किस्मो की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

मटर की उन्नतशील किस्म

आपको बता दे की मटर कोई अनेक उन्नत किस्मे पाई जाती है ,और अच्छी पैदावार के लिए अच्छी किस्मो का चयन करना चाहिए ,मटर की अनेक किस्मे ऐसी है जो कम समय में भी अच्छी पैदावार दे सकती है। इसलिए मटर की किस्मो का चयन कर बोना चाहिए ,उससे पहले आप को इसकी किस्मो की जानकरी होना आवश्यक है। मटर की कुछ किस्मे इस प्रकार है –

पंजाब 89 किस्म

आपको बता दे की यह किस्म पंजाब में बोई जाती है ,इसलिए इसका नाम पंजाब रखा है। इस किस्म के पौधे में फलिया हरे रंग की होती है ,और यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 60 से 70 किवंटल की पैदावार देती है। और इसके के पोधो की फलियों में 50 % दाने पाए जाते है। और यह किस्म पौध रोपाई के 90 से 95 दिनों के बाद पैदावार देती है ,यह किस्म एक प्रमुख किस्म मानी जाती है।

पंत 157 किस्म

यह किस्म मटर की संकर किस्म कहलाती है ,और इस किस्म में फली छेदक रोग लगने की संभावना कम दिखाई देती है ,यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 80 किवंटल के पैदावार देती है। और पौध रोपाई के 130 से 135 में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है ,यह किस्म की तुड़ाई कम समय में की जा सकती है।

मालवीय मटर – 2 किस्म

मटर की यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 30 से 35 किवंटल की पैदावार देती है ,और इस किस्म को अधिक पैदावार के लिए भारत के पूर्वी मैदानों में उगाई जाती है मटर की यह किस्म पौध रोपाई के 130 से 140 दिनों के बाद फल तुड़ाई के लिए तैयार होती है। इस किस्म में सफेद रोग नहीं देखने को मिलता है।

AP – 3 किस्म

मटर की यह किस्म बहुत जल्दी पककर तैयार हो जाती है और फिर इसकी तुड़ाई की जा सकती है। यह किस्म अक्टूबर महीने में बाई जाती है ,और उसके 75 दिनों के बाद पैदावार देना शुरू कर देती है। और यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 35 -40 किवंटल की पैदावार दे सकती है।

जवाहर बीज किस्मे

आपको बता दे की इस किस्म के पौधे की प्रत्येक फली में 7 से 10 बीज तक मिल जाते है ,और यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 130 से 145 किवंटल की पैदावार देती है। और पौध रोपाई के 70 से 75 दिनों के बाद पैदावार देना शुरू कर देती है। यह किस्म किसानो के लिए अच्छी किस्म होती है ,जो कम समय में अधिक पैदावार देती है।

BL अगेती किस्म

मटर की इस किस्म को विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा द्वारा तैयार की था। इस कसिम के पौधे उचाई में छोटे ही रहते है ,इसलिए इसको बोनी किस्मे भी कहा जाता है ,यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 10 टन की पैदावार देती है ,और इसकी फलिया लम्बाई में 8 cm की होती है।

आर्किल मटर की किस्म

यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 70 से 75 किवंटल के पैदावार देती है और इसकी फलियों की लम्बाई 50 से 60 cm तक होती है ,जो बोनी किस्म कहलाती है। किसानो को इस किस्म पर काफी विश्वास है ,क्योकि यह किस्म अच्छी पैदावार देती है।

IPF 6 – 3 किस्म

यह किस्म उतर प्रदेश में मुख्य रूप से उगाई जाती है ,और प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 18 से 20 किवंटल की पैदावार देती है। यह किस्म पौध रोपाई के 110 से 120 दिनों के बाद पैदावार देती है।

HFP – 529 किस्म

मटर की इस किस्म को उतर प्रदेश के मैदानी भागो में उगाया जाता है ,और यह किस्म प्रति हेक्टैयर के क्षेत्र में 25 से 30 किवंटल की पैदावार देती है। और यह किस्म पौध रोपाई के 120 से 130 दिनों के बाद पैदावार देती है। इस किस्म के पौधे उचाई में छोटे पाए जाते है ,यह किस्म पाउडरी मिल्ड्यू रोग से प्रतिरोधक किस्म है।

TRCP – 8 किस्म

इस किस्म को गोमती के नाम से भी जाना जाता है ,यह किस्म भारत के उत्तरी पूर्वी भागो में उगाई जाती है और यह प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 20 से 25 किवंटल की पैदावार देती है ,यह किस्म पौध रोपाई के 140 दिनों के बाद पैदावार देती है।

DMR – 7 किस्म

मटर की यह किस्म उतर पश्चिमी प्रदेशो में उगाई जाती है ,और यह किस्म 130 से 135 दिनों के बाद पैदावार देती है ,और यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 25 से 30 किवंटल की पैदावार देती है।

अर्ली दिसंबर की किस्म

यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 90 से 100 किवंटल की पैदावार देती है यह किस्म मटर की अगेती किस्म है ,और पौध रोपाई की 55 से 65 किवंटल की पैदावार देती है इस किस्म की फलिया नकुली और लम्बी होती है।

आजाद मटर 3

यह मटर की अगेती किस्म है ,जो प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 80 किवंटल की पैदावार देती है इस किस्म की फलिया हरे रंग की और मध्यम उचाई वाली होती है। और पौध रोपाई के 80 दिनों के बाद मटर की पैदावार देती है।

इसके आलावा भी मटर की अन्य किस्मे पाई जाती है जो इस प्रकार है –

आजाद मटर 1 किस्म ,काशी शक्ति किस्म ,अर्ली बैजर किस्म , असौजी किस्म ,T – 19 किस्म ,T – 59 किस्म ,NP – 29 किस्म ,पंत मटर 155 किस्म ,पंत मटर 157 किस्म वी एल अगेती मटर किस्म ,विवेक मटर 8 और 9 किस्म ,काशी उदय किस्म ,काशी मुक्ति किस्म ,पूसा श्री किस्म ,पूसा पन्ना (2001 ) ,बायोसीड पी 10 किस्म और पूसा भारत किस्म आदि किस्मे है।

राज्य में किस्मो की बुआई

राजस्थान में बोई जाने वाली किस्मे

पंत मटर- 42 किस्म और DMR – 7 किस्म ये किस्मे राजस्थान में उगाई जाती है।

बिहार में बोई जाने वाली किस्मे

पूसा प्रभात DDR – 23 किस्म और VL – 42 किस्म आदि किस्म बिहार में बोई जाती है।

उतरप्रदेश में बोई जाने वाली किस्मे

मालवीय मटर किस्म ,आई पी एफ- 4-9 किस्म, के पी एफ डी- 24 और के पी एम आर- 1441 आदि किस्मे है।

पंजाब में बोई जाने वाली

पंत मटर- 41 ,के एफ पी- 103 किस्म ,आई पी एफ- 5-19 किस्म और एच एफ पी- 8909 आदि किस्मे है।

हरियाणा में बोई जाने वाली किस्मे

एच एफ पी- 8712 ,आई पी एफ- 5-19 ,एच एफ पी- 8909 ,पूसा पन्ना और एच एफ पी- 9907 बी आदि किस्मे है।

इस प्रकार इसकी कई किस्मे है ,जो बाजार में मिलती है ,और मटर की इन किस्मो से किसानो को अधिक मुनाफा देती है ,इसलिए ध्यान रहे की उन्नत किस्मो का चयन कर के खेती में बीज की रोपाई नहीं करे

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