जरबेरा फूल की खेती कैसे करे जानिए इसकी खेती की सम्पूर्ण जानकारी

Written by Saloni Yadav

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Gerbera Flower Cultivation :

जरबेरा फूल की खेती फूल के रूप में की जाती है। जरबेरा फूल काफी लोकप्रिय फूल होता है जो की शादी -विवाह और समाहरो आदि में सजावट करने के काम में लिया जाता है। इस फूल की काफी मांग होती है ,और यह फूल किसानो की आय का मूल स्तोत्र होता है। इस फूल को कई प्रकार की मिट्टी में भी ऊगा सकते है। इस फूल से किसानो को बहुत अच्छी आमदनी प्राप्त होती है। इसको प्रयोग हमारे देश के साथ -साथ अन्य देश भी करते है , जरबेरा फूल की खेती पूरे विश्व में की जाती है। इस फूल को पौधा बहुवर्षीय होता है और इस फूल का ज्यादातर प्रयोग सजावट के लिए किया जाता है। इस फूल को ‘अफ्रीकन डेजी’ या ‘ट्रांसवाल डेजी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती कर किसानो को अधिक मात्रा में फायदा मिलता है ,जरबेरा के फूल की खेती कम लागत में अधिक पैदावार देती है। इस फूल की एक खास बात होती है की इस फूल को आप बोतल में डालकर रखते है तो यह फूल दो दिनों तक ऐसा ही रहता है। इसका फूल का पौधा बारहमासी होता है।

आपको बता दे की इस फूल के लिए झारखण्ड की खेती उपयुक्त मानी जाती है। यह फूल देखने में काफी सुन्दर है ,इसकी खेती कर किसान अच्छी कमाई कर सकता है। इस फूल के दाम बह काफी अच्छे होते है। आपको बता दे की झारखण्ड में इस फूल की अधिकता के कारण इसकी खेती करने वाले किसानो की सख्या में बढ़ोतरी हुई है। झारखण्ड में इस फूल का काफी महत्व होता है। इस फूल का इस्तेमाल आयर्वेदिक दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है ,और इस फूल से कई प्रकार की चीजों को सजाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। एक बात और है की राज्य सरकार उद्यान विभाग के द्वारा इस फूल की खेती करने पर किसानो को आर्थिक मदद के रूप में राशि दी जाती है।

आपको बता दे की इस फूल को भारत में उत्साह का प्रतीक भी माना जाता है और यह फूल अनेक रंग लिए होता है इस फूल की पंखुड़ियों से मनुष्य को होने वाले तनाव से छुटकारा मिलता है और यह फूल हमे सकारत्मक ऊर्जा देता है ,इस फूल का उपयोग बहुत तरह से किया जाता है ,आहार आप भी इस फूल की खेती करने का मन बना रहे है तो आज हम आपको इस की खेती से सम्बन्धित सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

जरबेरा की खेती के लिए आवश्यक जलवायु

जरबेरा की खेत के लिए समशीतोष्ण जलवायु में अच्छी पैदावार देती है। इसकी खेती को सर्दियों में थोड़ी धूप चाहिए होती है और गर्मियों में इसको थोड़ी छाया चाहिए होती है। इसकी खेती पाली हाउस में अच्छी उपज देती है। इसकी खेती में इसके पौधे अधिक तापमान में अच्छे से विकास नहीं कर पाते है। गर्मी के मौसम में इसके पौधे को छाया के साथ -साथ पानी की भी अधिक आवश्यकता होती है।

जरबेरा की खेती के लिए आवश्यक तापमान

आपको बता दे की इसकी खेत के लिए अधिक तापमान नहीं होना चाहिए ,इसके बीजो को अंकुरित होने में सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है। और इस फूल को गर्मी में अधिकतम 37 डिग्री और सर्दियों में रात का तापमान 10 डिग्री उचित माना जाता है। इसकी खेती के लिए रात में तापमान 17 डिग्री और दिन का तापमान 25 डिग्री होना इसकी खेती की पैदावार को अच्छा करता है।

जरबेरा की खेती के लिए आवश्यक मिट्टी

इसकी खेती के लिए जलभराव वाली मिट्टी नहीं होनी चाहिए ,इसकी खेती में उपजाऊ मिट्टी और बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है फूलो की अधिक पैदावार के लिए लिए मिट्टी में पोषक तत्व और कार्बनिक पदार्थ युक्त मिट्टी का होना आवश्यक है ,जिससे फूल की पैदावार से किसानो को अच्छी आमदनी मिल सकती है। इसकी खेती के लिए मिट्टी का PH मान 5 से 7 के बीज होने चाहिए।

जरबेरा की खेती के लिए आवश्यक सिचाई और खरपतवार

जरबेरा की खेती को गर्मी के मौसम में अधिक पानी की आवश्यकता होती है अधिक मात्रा में इनके पौधे की सिचाई से अच्छी उपज होती है , पौध रोपाई के तुरंत बाद पोधो की सिचाई करे ,और उसके बाद पोधो के विकास के दौरान भी इसके पोधो की सिचाई की जाती है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में सप्ताह में दो बार और सर्दी के मौसम में 14 से 20 दिनों के अंतराल पर की जानी चाहिए।

आपको बता दे की जरबेरा की खेती में खरपतवार को नियंत्रित करना आवश्यक है ,क्योकि इस फूल के पौधे ज्यादा उचाई के नहीं होते है ,इसलिए खरपतवार इनके पौधे को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए जरबेरा की खेती में प्राकृतिक तरिके से निराई -गुड़ाई करनी चाहिए। इसकी खेती में 3 से 4 गुड़ाई की आवश्यकता होती है।

जरबेरा फूल की उन्नतशील किस्मे

आपको बता दे की जरबेरा फूल अनेक रंगो में पाए जाते है ,जिस हिसाब से इस फूल की कई किस्मे पाई जाती है ,इस फूलो को रंग के आधार पर अलग -अलग किस्मो में बता गया है ,कुछ किस्मे इस प्रकार है –

गुलाबी रंग के फूल की उन्नत किस्मे

इस किस्म में फूलो का रंग गुलाभी पाया जाता है इस किस्म की कुछ किस्म वेलेंटाइन, पिंक एलिगेंस,सल्वाडोर. और टेरा क्वीन और मारा आदि इसकी उन्नत किस्मे है ।

सफेद रंग के फूल की उन्नत किस्मे

इस किस्म के फूल सफेद रंग की होते है और कुछ भूरे रंग में भी पाए जाते है ,कुछ किस्मे इस प्रकार है – डेल्फी, डालमा ,फरीदा, व्हाइट मारिया ,स्नोफ्लेक और विंटर क्वीन आदि किस्मे है।

लाल रंग के फूल की उन्नत किस्मे

इस किस्म के फूलो का रंग लाल रंग में पाया जात्ता है फ्रेडोरेल्ला, रुबीरेड, साल्वाडोर ,
इम्पल्स और वेस्टा, तमारा आदि है

पीले रंग के फूल की उन्नत किस्मे

इस फूल का रंग पीला होता है। फ्रेडकिंग, नाडजा ,डोनी, सुपरनोवा ,फूलमून, यूरेनस और तलासा,आदि है।

जरबेरा की खेती के लिए खेती के तैयारी

आपको बता दे की इसकी खेती के लिए खेत को अच्छे से तैयार कर ले ,उसके लिए सबसे पहले खेत की अच्छे से जुताई करके पुरानी फसल को पूरी तरह नष्ट करना चाहिए ,उसके बाद खेत में पानी से पलेव करकर फिर से खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए ,उसके बाद खेत को कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ दे फिर उसके बाद खेत में गोबर की खाद डालकर उसको मिट्टी में अच्छे मिलाना चाहिए। उसके बाद आप खेत की सूखी भूमि पर उर्वरक भी डाल सकते हो ,उसके बाद खेती में पानी से अच्छा पलेव करे और खेत में अच्छी जुताई करे ताकि खेत की मिट्टी भुरभुरी हो सके। उसके बाद खेत में पाटा लगवाकर खेत को समतल कर दे ,उसके बाद खेत में बीज रोपाई के लिए खेत में मेड को तैयार करना चाहिए। ध्यान रहे की मेड़ो के बेच की दुरी दो फ़ीट की होनी चाहिए।

जरबेरा फूल की पौध को तैयार कैसे करे ?

जरबेरा के बीज को सीधे ही खेत में नहीं बोया जाता है ,इसके लिए सबसे पहले इसकी पौध को तैयार किया जाता है ,इसके लिए पौधे को तीन तरह से तैयार किया जाता है ,कुछ इस प्रकार है –

  • बीज के द्वारा पौध को तैयार करना
  • कलम के द्वारा पौध को तैयार करना
  • उत्तक संवर्धन द्वारा पौध तैयार

आपको बता दे की बीज विधि से पौध को तैयार करने के लिए नर्सरी में बीज को लगया जाता है ,बीज से तैयार हुए पौधे अधिक समय में पैदावार देते है ,और कलम विधि से द्वारा पौध को तैयार पौध की कटाई के दौरान कई भी स्वस्थ टहनी को नर्सरी में लगाना चाहिए ,उसके बाद 1 साल में यह पौधे अच्छे से विकास करेगी ,और संवर्धन विधि से से पौध को सबसे उत्तम माना जाता है ,इसलिए सभी पौधे इसके द्वारा ही तैयार की जाती है।

पौधे रोपाई का सही तरीका और सही समय

आपको बात दे की इसके पौध को तैयार खेत की मेड़ो में लगाना चाहिए ,उसके बाद नरसरी में तैयार पोधो को मेड़ो में लगाकर उसके बाद पौध की सिचाई करनी चाहिए ,उसके बाद खेत में पौधे की नै पत्तियों को उसके साथ नहीं दबाना चाहिए। पौध की रोपाई शाम के समय करनी चाहिए ,जिससे खेत में पोधो का विकास अच्छा होगा।

जरबेरा की खेती में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय

जड़ गलन रोग

इसकी खेती में यह रोग सीधे जड़ो पर आक्रमण करता है यह रोग पोधो में अधिक मणि और जलभराव की समस्या के कारण होता है। इस रोग के लगने से पौधे पूरी तरह से विकास करना बंद कर देते है।

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए खेत में पोधो पर ऑक्सिक्लोराइड दवा का घोल बेनक़ार खेत में छिड़काव करे। इसके अलावा खेत में जल जमाव की स्थिति नहीं होने दे।

पत्तों के धब्बे का होना ‘

इस रोग के होने से पौधे की पत्तियों के ऊपर की तरफ भूरे रंग के सफेद धब्बे हो जाते है,जो की कुछ दिनों के बाद आकार में बड़े और और गहरे भूरे हो जाते है

रोकथाम
इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे पर इंडोफिल एम-45 का घोल बनाकर स्प्रे करनी चाहिए।

थ्रिप्स रोग

इस तरह का रोग पौधे की पत्तियों पे मिलता है ,जिससे पौधे पर पौधे की पेटियों पर धब्बे दिखाई देते है ,और कुछ दिनों के बाद पत्तिया सूख जाती है ,और गिर जाती है।

रोकथाम
इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे पर मेटासिस्टोक्स 25 ई सी को 15 दिनों के अंतराल पर स्प्रे करनी चाहिए।

लीफ माइनर रोग

इस रोग से प्रभावित पौधे की पत्तियों पर भूरे रंग की धरिया बेन जाती है और पौधे पूरी तरह पोषक तत्व ग्रहण नहीं कर पते है। और कमजोर हो जाते है इस रोग से प्रभवित पौधे पूरी तरह नष्ट हो जाते है।

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए खेत में पोधो पर क्लोरोडेन या टोक्साफेन दवा का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

जरबेरा फूलो की तुड़ाई और पैदावार

आपको बता दे की इसका पौधा पौध रोपी के 4 से 6 महीनो के बाद फूल देना शुरू करता है ,इसके बाद आप फूलो को तोड़ सकते है ,ध्यान रहे की फूलो की तुड़ाई शाम के समय में करनी चाहिए। फूलो की तुड़ाई करके फूलो पानी मेड डाले ताकि फूल ताजा और रंग -बिरंगे रहे।

आपको बता दे की फूलो का बहुत महत्व होता है ,इसलिए इसकी मांग भी बहुत होती है। इसकी सुंदरता के कारण इसकी मांग होने पर किसानो की अच्छी कमाई होती है। एक वर्ष की में एक वर्ग मिटेर के क्षेत्र में 250 से 300 फूल प्राप्त कर सकते है ,जिससे किसानो को अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है। इन फूलो का बाजारी भाव भी काफी अच्छा होता है

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