जुकीनी की खेती कैसे करे ? जानिए इसकी उन्नत किस्मे ,जलवायु और रोकथाम के उपाय

Written by Saloni Yadav

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Cultivation Of Zucchini :

आपको बता दे की इसकी खेती सब्जी के रूप में की जाती है। आजकल जुकीनी की मांग अधिक बढ़ रही है ,और किसानो को भी अधिक मुनाफा प्राप्त होता है ,इस सब्जी को चप्पल कद्दू की नाम से भी जाना जाता है आपको बता दे की इसकी खेत पहले समय में विदेशो में की जाती है ,परन्तु आजकल इसकी खेती भारत में भी की जाने लगी है। जुकिन का फल हरे या पीले रंग का होता है। इसकी लम्बाई 3 से 4 फ़ीट होती है। अगर अच्छी किस्मो का चयन कर वैज्ञानिक तरिके से इसकी खेती की जाए तो अच्छी पैदावार में किसानो को अधिक मुनाफा हो सकता है। जुकीनी लता वर्गीय पौधा होता है ,इसका ज्यादातर प्रयोग सब्जी बनाने मि किया जाता है। और यह विटामिन का अच्छा स्तोत्र माना जाता है ,इसमें विटामिन ”A ” और ”C ” के साथ पोटेशियम और पोषक तत्वों की मात्रा पाई जाती है। इसको सेवन शरीर में केरोटीन की मात्रा को पूरा करता है। इसकी अनेक किस्मे पाई जाती है ,इसकी सब्जी भी खाने में काफी स्वादिष्ट होती है ,इसकी खेती भारत में भी बड़े स्तर पर की जाती है। जुकीनी कई प्रकार के आकार में पाई जाती है ,जैसे गोल और लम्बे तो होते ही है ,इसमें से पीले रंग में इसको जुकीनी के नाम से जाना जाता है। और इसके साथ ही हरे रंग के धारीदार जुकीनी को औस्ट्रेलियन ग्रीन के नाम से भी जाना जाता है।

जुकीनी का वानस्पतिक नाम क्यूकुरबिटा पीपो होता है। इसको तोरु के नाम से भी जाना जाता है। इसकी अनेक किस्मे पाई जाती है जो कम समय में भी अच्छी पैदावार देती है।
हमारी डाइट में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बीमार पड़ने र डॉक्टर भी ह्री सब्जी खाने की सलाह देता है ,और हरी सब्जी में जुकीनी का पहले नाम लिया जाता है। इसकी खेती कर किसानो को मुनाफा ही प्राप्त होता है। इसको भारत में तोरु ,तोरी ,तुरई और नेनुआ आदि नामो से जाना जाता है।

जुकीनी की खेती नवंबर और दिसंबर की महीने में की जाती है। और इसकी अच्छे से देखभाल करने पर यह किसानो को कई लाखो का मुनाफा देती है। इनका रंग हरा होता है और लम्बी होती है ,इसके साथ ही चमकदार नहीं होती है। देखने में काफी सुन्दर लगती है अगर आपभी जुकीनी की खेती करना चाहते है तो आज हम आपको इसकी खेती की सम्पूर्ण जानकरी देंगे।

जुकीनी की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान

इसकी खेती के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। इसकी फसल रबी के सीजन में की जाती है। इसकी खेती को सर्दी में गिरने वाले पीला से बचना चाहिए। इसके पौधे सर्दी को सहन कर लेते है , परन्तु गर्मी के मौसम में धूप और अधिक गर्मी से इसकी खेती को बचना चाहिए। इसकी खेती सामान्य तापमान में अच्छी पैदावार देती है। किसी भी खेती के लिए जलवायु का अधिक महत्व होता है।

जुकीनी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

जुकीनी की खेती को बलुई दोमट मिट्टी अच्छी होती है इसके अलावा उच्च जल निकास वाली और पोषक तत्व से भरपूर मिट्टी में अच्छी पैदावार होती है। क्षारीय और अम्लीय भूमि में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए ,इसकी खेती के लिए भूमि का PH मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए। इसकी भूमि में कार्बनिक पदार्थो की मात्रा भी पाई जानो चाहिए ,जिससे खेती की उपज में काफी बढ़ोतरी होती है।

जुकीनी की खेती के लिए उपयुक्त सिचाई

इस की खेती के लिए अधिक सिचाई की आवश्यकता होती है ,इसकी पौधे रोपाई के तुरंत बाद सिचाई करनी चाहिए ,और बीजो के अंकुरण के समय में खेत की मिट्टी में नमि को बनाये रखे जिससे बाजो का अंकुरण अच्छे से हो जाता है। बीज अंकुरण और फसल तैयारी पर सिचाई अवश्य करनी चाहिए। जुकीनी की फ़स्ल को तैयार होने तक 9 से 10 सिचाई की जरूरत होती है।

जुकीनी की खेती में खरपतवार नियंत्रण

आपको बता दे की इसकी खेती में फसल में खरपतवार को नियंत्रित करना आवश्यक है ,क्योकि खरपतवार पैदावार को कम करती है ,जिससे किसानो को अधिक मुनफा नहीं होता है। इसके साथ ही इसकी खेती में खरपतवार को प्राकृतिक तरीके से नियंत्रण करना चाहिए। इसके लिए खेत में निराई -गुड़ाई करनी चाहिए। इसकी गुड़ाई 15 दिनों के अंतराल पर करनी चाहिए ,और इसकी खेती में कम से कम 2 से 3 गुड़ाई करनी ही चाहिए।

जुकीनी की खेती में उर्वरक की मात्रा

अन्य फल की तरह ही इसकी खेती में भी खाद और उर्वरक की आवश्यकता होती है ,इसके लिए खेत की जुताई करते समय सड़ी गोबर की खाद प्रति हेक्टैयर के हिसाब से डालनी चाहिए ,इसके अलावा रासायनिक खाद भी डाल सकते है। इसके लिए खेत की आखरी जुताई के समय खेत में एन. पी. के. का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए ,उसके अलावा आप खेत में सिचाई के दौरान 20 KG यूरिया खाद प्रति हेक्टैयर के क्षेत्र में छिड़काव करे।

जुकीनी की खेती के लिए खेत की तैयारी

जुकीनी की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छे से गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी में सभी पोषक तत्व मिल सकते ,उसके बाद खेत में पुरानी फसल के अवशेषों को पूरी तरह नष्ट कर उसमे गोबर की सड़ी खाद डालनी चाहिए ,उसके बाद खाद को अच्छे से मिट्टी में मिलाना चाहिए। उसके बाद खेत में पानी से पलेव करे और कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ दे और कुछ दिनों के बाद गहरी जुताई करे ,और खेत में पाटा लगवाकर खेत को समतल करे। उसके बाद खेत में बीजो की बुआई के लिए मेड तैयार करे।

जुकीनी के बीज की बुआई

जुकीनी के बीज की ही खेत में रोपाई की जाती है ,इसके लिए अलग से बीज से पौध को तैयार नहीं किया जाता है। इसके बीज को खेत में बोन से पहले बीजो को कार्बेन्डाजिम और थीरम से उपचारित करना चाहिए। 6 से 7 KG बीज को प्रति हेक्टैयर के हिसाब से रोपाई करनी चाहिए। उसके बाद खेत में बीजो को तैयार की गयी मेड़ो में लगाना चाहिए। बीजो को 2 से 3 फ़ीट की गहराई में रोपाई करे ,और मेड़ो के बीच डेढ़ फ़ीट की दुरी होनी चाहिए। आपको बता दे की इसकी खेती अक्टूबर और नवम्बर के महीने में की जाती है।

जुकीनी की फसल में लगने वाले कीट और रोग इस प्रकार है –

जुकीनी के पौधे में अनेक प्रकार के रोग दिखाई देती है। उसके लिए रोगो को नियंत्रित करना आवश्यक है कुछ रोग इस प्रकार है –

  • स्कैश बग रोग
  • स्लग रोग
  • एफिड्स रोग
  • घोंघे रोग
  • सफ़ेद धब्बा रोग
  • चेपा रोग
  • फल मक्खी रोग
  • काली सुंडी रोग

इन रोगो से बचाव के लिए बीज रोपाई से पहले बीजो कार्बेन्डाजिम का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा इस रोग का अधिक प्रकोप होने पर पौधे पर थाइमैथोक्सम और डाइमेथोएट या मैलाथियान का छिड़काव करना चाहिए।

जुकीनी की फसल की तुड़ाई और पैदावार

आपको बता दे की इसकी अच्छी गुणवत्ता के लिए फलो कटाई सही अवस्था में करनी चाहिए ,अगर जुकीनी का आकार अधिक बड़ा हो जाता है तो यह पौधे पर लगा -लगा सड़ने लगता है ,इसलिए सही समय पर इसकी तुड़ाई करनी चाहिए ,जुकीनी को तोड़ने के बजाय काटना चाहिए। इसकी तुड़ाई कर बाजार में बेच सकते है।

जुकीनी की खेत प्रति हेक्टैयर के क्षेत्र में 150 से 160 किवंटल की पैदावार देती है ,और इसका बाजारी भाव 30 से 40 रूपये किलो के आस पास पाया जाता है ,जिससे भी किसानो को अधिक मात्रा में मुनाफा होता है। जुकीनी की फसल कम समय में अधिक पैदावार देने वाली फसल है।

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