तेज पत्ता की खेत की सम्पूर्ण जानकरी : जलवायु ,मिट्टी ,तापमान और पैदावार

Written by Saloni Yadav

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Bay Leaf Cultivation :

तेज पत्ता की खेत भारत में मुख्य रूप से की जाती है ,साथ ही सूखे तेज पत्ते को सब्जी में डालने से सब्जी का स्वाद काफी अच्छा हो जाता है। एडिक्टेर इस पत्ते का प्रयोग खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है। साथ ही इसका प्रयोग बीमारियों को ख़त्म करने और आयुर्वेदिक ओषधियो को बनाने में किया जाता है। भारत के अलावा तेज पत्ता की खेती फ्रांस, इटली,रूस,मध्य अमेरिका ,बेल्जियम और उत्तर अमेरिका में की जाती है। अगर भारत की बात करे तो भारत में इस मसाले की खेती उत्तर भारत के पहाड़ी इलाको में ,केरल, कर्नाटक और बिहार में मुख्य रूप से की जाती है। इस फसल की खेती मसाले के रूप में की जाती है ,इस मसाले को भी अन्य मसालों की तरह महत्व दिया जाता है। इस मसाले की खेती वर्षो में की जाती है। तेज पत्ते को खास तौर से पनीर की सब्जी में डाला जाता है। इसकी बाजार में मांग अधिक होती है ,और तह फसल किसानो को अधिक मुनाफा भी देती है। इसके लिए आपको इसकी सम्पूर्ण जानकारी को होना आवश्यक है

तेज पत्ते को अग्रजी में Bay Leaf कहा जाता है। इसकी खेती करना ज्यादा कठिन नहीं है पहले इसकी खेती भारत में नहीं की जाती है ,लेकिन आजकल इस खेती को कई देशो में की जाती है। तेज पत्ता शुष्क और सुगन्धित पत्ता होता है ,जिसको सब्जी में मसले के रूप में डाला जाता है। तेज पत्ते को उपयोग मनुष्य की सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है ,कोई भी फल या सब्जी हो सभी सेहत के लिए लाभदायक होती है ,ऐसी प्रकार तेज पत्ता भी काफी अच्छा होता है ,इसका पत्ता सुखकार काम में लिया जाता है। तेज पत्ता एक सदाहरित पेड़ होता है ,जिसकी लम्बाई 7 मीटर के आस -पास पाई जाती है ,यह लाल रंग का और अंडाकार होता है ,इसकी लम्बाई 13 से 14 mm होती है। इसमें आने वाले पत्ते हल्के पीले और तथा गुलाबी रंग के होते है।

तेज पत्ते का प्रयोग कई आध्यात्मिक कार्यो के लिए भी किया जाता है। अगर आप भी इसकी खेती करना चाहते है तो आपको इसकी जानकारी का होना जरूरी है। इसलिए आप हम आपको इस केटी कैसे की जाती है ,इसकी खेती के लिए आवश्यक जलवायु ,तापमान ,मिट्टी और पैदावार की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

तेज पत्ते की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान

तेज पत्ते की खेती उष्ण और और ठंडी दोनों प्रकार की जलवायु में की जा सकती है। किसी भी फसल के लिए जलवायु का होना आवश्यक है ,इसके आलावा इसकी खेती को सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही बेजो के अंकुरण के समय ताप उच्च हो तो काफी अच्छी पेडववार हो सकती है।

तेज पत्ते की खेती के लिए आवश्यक मिट्टी और सिचाई

इसकी खेती के लिए उपजाऊ मिट्टी अच्छी मानी जाती है ,इसके लिए मिट्टी का PH मान 7 से 8 होना चाहिए। इस्सके अलावा खेत की मिट्टी में कार्बनिक पदार्थो की मात्रा और पोषक तत्वों की मात्रा होनी चाहिए।

सिचाई की बात करे तो इसकी खेती में अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है ,इसके लिए बारिश के मौसम में भी अगर बारिश नहीं हो तो भी सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है। और सर्दियों के मौसम में आवश्यकता होने पर ही सिचाई करनी चाहिए ,इसके अलावा गर्मियों के मौसम में सप्ताह में एक बाद सिचाई करनी चाहिए।

तेज पत्ते में पोषक तत्वों की मात्रा

तेज पत्ते में अनेक पोषक तत्व पाए जाते है ,जो हमारे शरीर के लिए काफी लाभदायक होते है ,100 ग्राम तेज पत्ते में मिलने वाले पोषक तत्व इस प्रकार है –

  • 834 MG कैल्शियम
  • 46.5 ML विटामिन C
  • 26.3 फाइबर
  • 8.36 गम फैट
  • 4.97 GM कार्बोहाइड्रेट
  • 5.44 GM पानी
  • 7.61 GM प्रोटीन
  • 313 GM कैलोरी

तेज पत्ते की खेती के लिए खेत की तैयारी और पौध रोपाई

आपको बता दे की सबसे पहले खेती की अच्छे से गहरी जुताई करनी चाहिए ,उसके बाद खेत में पुरानी फसल के अवशेषो को नष्ट करना छाइये ,फिर खेत में गोबर की खाद डाले और उसको मिट्टी में अच्छे से मिला दे ,फिर खेत में पानी से पलेव करना चाहिए ,उसके बाद खेत को कुछ समय के लिए खुला छोड़ दे ,और फिर उसमे गहरी जुताई करके पाटा द्वारा समतल करवा दे ,ताकि खेती की मिट्टी भुरभुरी हो जाए। और उसके फसल की पैदावार अच्छी हो सके।

तेज पत्ते की बुआई पौधे के रूप में की जानी चाहिए ,क्योकि बीजो इस तैयार पौध में पैदावार देने में समय लगता है ,इसलिए पौध के रूप में रोपाई की जानी चाहिए। पौध की रोपाई के लिए सबसे पहले खेत में गढ्डे खोदने चाहिए ,और पौध से पौधे की दूरी 4 से 6 मीटर होनी चाहिए। पौध रोपाई के बाद सिचाई करनी चाहिए ,इसकी खेती को सर्दियों में गिरने वाले पाले से बचाना चाहिए। इस पर पड़ने वाले पाले से फसल की पैदावार कम होती है।

तेज पत्ते का प्रयोग किन चीजों में किया जाता है

  • तेज पत्ते में अनेक प्रकार के पोषक तत्व मौजूद होते है ,जिस कारण से इसको प्रयोग आयुर्वेदिक दवाइयों को बनाने में किया जाता है।
  • तेज पत्ते को उपयोग सूजन को कम करने में भी किया जाता है।
  • यह त्वचा से सम्बन्धित रोगो को भी दूर करता है।
  • इसका प्रयोग साबुन , इत्र और क्रीम बनाने में किया जाता है।
  • इसको प्रयोग अन्य रोग की दवाइयों को बनाने में किया जाता है जैसे – दंत रोग, कैंसर, मधुमेह आदि।
  • तेज पत्ता किडनी सम्बन्धित बीमारी को कम करता है।
  • इसको खाने से त्वचा का रंग साफ होता है।

तेज पत्ते में लगने वाले रोग और रोकथाम

आपको बात दे की तेज पत्ते में कम से कम ही कीट और रोग देखने को मिलते है। वे कीट जो इसकी फसल में कभी -कभी देखने को मिलते है ,जैसे – एफिड्स ,हार्ड शैलेड स्केल और माईट्स कीट आदि है

रोकथाम के लिए

  • इन रोगो के रोकथाम के लिए खेत में खरपतवार पर नियंत्रण रखे ,और इस कीट से बचने के लिए नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए।
  • इसके अलावा बीजो को उपचारित करके बुआई करनी चाहिए।

तेज पत्ते की कटाई और पैदावार

तेज पत्ते पौध रोपाई के 6 साल बाद पैदावार देते है। इसकी तुड़ाई कर इनको छायादार स्थान पर कुछ दिनों के लिए सूखा लिया जाता है। इस फसल से पेल भी निकाला जाता है ,इसके लिए आश्वासन यंत्र को प्रयोग किया जाता है।

इसकी किस्मो और देखभाल के आधार पर पैदावार होती है ,अगर तेज पत्ते की खेत करते समय इसकी अधिक देखभाल करनी होती है ,तभी जाकर इसकी पैदावार काफी अच्छी होती जिससे किसानो को काफी मुनाफा मिलता है ,तेज पत्ते को बाजारी भाव काफी अच्छा पाया जाता है इसका बाजार में भाव 2000 से 2200 के बीच पाया जाता है ,जिससे किसान काफी कमा सकता है।

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