सोयाबीन की खेती कैसे करे ? और इसकी खेती में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय

Written by Saloni Yadav

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Diseases In Soybean Cultivation :

आपको बता दे की विश्व में सोयाबीन की खेती एक प्रमुख फसल मानी जाती है। सोयाबीन की खेती भारत में मुख्य रूप से मध्य्प्रदेश में की जाती है। सोयाबीन में अधिक मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते है। और इसकी खेती तिलहनी फसल के रूप की जाती है ,क्योकि सोयाबीन के बीजो से तेल भी निकला जा सकता है। सोयाबीन का प्रयोग सब्जी बनाने में भी किया जाता है। सोयाबीन मानव शरीर के लिए काफी लाभदायक होती है। ,इसकी सब्जी भी बहुत अच्छी बनती है ,और इससे आयर्वेदिक दवाइया भी बनाई जा सकती है। सोयाबीन में 22 % वसा ,12 % नमी ,44 % प्रोटीन और 21 % कार्बोहाइड्रेट और 5 % भस्म आदि सभी उचित मात्रा में मिलते है। सोयाबीन में अम्ल भी पाए जाते है।

भारत में सोयाबीन की खेती मुख्य रूप से वानस्पतिक तेल के लिए की जाती है। सोयाबीन को खाने से शरीर में अनेक फायदे होते है ,सोयाबीन मुख्य रूप से मध्य्प्रदेश में उपजाया जाता है ,इसकी खेती गर्म और नरम जलवायु में की जाये तो यह फसल में अच्छी पैदावार देती है। सोयाबीन में प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है। सोयाबीन को भारत में पीला सोना खा जाता है। इसकी खेती कर किसानो को अधिक मुनाफा प्राप्त होता है। सोयाबीन का सेवन करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता है। सोयाबीन में कई प्रकार के विटामिन मिनरल्स और विटामिन A और B की मात्रा अधिक पाई जाती है। सोयाबीन की खेती मुनाफे की खेती कहलाती है ,

आपको बता दे की अगर आप भी सोयाबीन की खेती करने और उसमे लगने वाले रोगो की रोकथाम के जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो आज हम आपको इस की खेती में लगने वाले रोगो की समूर्ण जानकारी देंगे

सोयाबीन की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

आपको बता दे की किसी भी खेती के लिए जलवायु का अधिक महत्व होता है। इसी प्रकार सोयाबीन की खेती के लिए भी जलवायु का महत्व है ,इसलिए सोयाबीन के लिए उष्ण जलवायु अच्छी मानी जाती है। इसकी खेती गर्म और नम जलवायु में अच्छी पैदावार देती है।

सोयाबीन के लिए आवश्यक तापमान

आप को बता दे की सोयबीन के लिए अधिक तापमान की आवश्यकता नहीं होती है ,इसकी खेती तो सामान्य तापमान में भी अच्छी उपज देती है। बीज पकते समय उच्च तापमान होना चाहिए जिससे पौधे अच्छे से पकते है। और बीज अंकुरण के समय में 20 डिग्री के आस पास तापमान होना चाहिए।

सोयाबीन की खेती के लिए मिट्टी

आपको बता दे की इसकी खेती कई प्रकार की मिट्टियो में की जा सकती है लेकिन अच्छी पैदावार के लिए उच्च जल निकास की चिकनी मिट्टी अच्छी होती है। इसके साथ ही भूमि का PH मान 7 के आस पास होना चाहिए।

सोयाबीन की खेती के लिए सिचाई की आवश्यकता

आपको बता दे की सोयाबीन की बीज रोपाई जून ,जुलाई के महीने में की जाती ह। जिस समय सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इसके साथ ही बारिश न होने पर खेत की सिचाई करनी चाहिए ,जिससे खेत में नमी बनी रहेगी। सोयाबीन की खेती में हल्की -हल्की सिचाई की आवश्यकता होती है ,जिससे अच्छी पैदावार प्राप्त होती है।

सोयाबीन के खेत में खरपतवार नियंत्रण

आपको बता दे की खेत में खरपतवार को होना अधिक फसल को अधिक हानि पहुंचा सकता है इसके लिए समय पर इसे नष्ट करना चाहिए। खरपतवार को नष्ट करने के लिए प्राकृतिक तरिके को प्रयोग करे ,यानी की खेत में निराई -गुड़ाई करनी चाहिए। जिससे खरपतवार को नष्ट किया जा सकता है ,और पौधे की पहली गुड़ाई 20 से 30 दिनों के अंतराल पर की जानी चाहिए।

सोयाबीन की खेती में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय

आपको बात दे की फसलो में अनेक प्रकार के रोग दिखाई देते है जैसे पत्तियों पर काले और भूरे रंग के धब्बे होना ,पत्तियों का पीला होना ,तने का पूरी तरह से सूख जाना आदि रोग पौधे पर मिल जाते है ,इसे में रोग से छुटकारा पाने के लिए दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए। कुछ रोग इस प्रकार है –

कामलिया रोग

यह रोग पौधे पर लगने वाले दानो पर सीधा आक्रमण करता है यह रोग फसल को नष्ट कर पैदावार को कम करता है ,यह पौधे की पत्तियों ,तनो जैसे नाजुक भागो को खाकर नष्ट करता है।

रोकथाम के उपाय
इस रोग से बचने के लिए आपको पौधे पर इन्डोक्साकार्ब, रेनेक्सीपायर या प्रोपेनफास की उचित मात्रा में घोल बनाकर स्प्रै करनी चाहिए ,जिससे पौधे पर लगे रोग को कम किया जा सकता है।

पीला मोजेक रोग

यह एक प्रकार की मक्खी होती है ,जो इस बीमारी को उत्त्पन करती है। यह मक्खी पौधे के तने के पास अंडे देकर जीवाणुओं को पैदा करती है ,जिससे पौधे की पत्तिया पीली हो जाती है और सूखकर गिरने लगती है ,और यह मक्खी फसल को जल्दी ही नष्ट करती है ,यह रोग ऐसा है जो दूसरे पोधो पर फैल जाता है।

रोकथाम क उपाय
इस रोग को रोकने के लिए खेत में पोधो पर इमिडाक्लोप्रीड, लैम्ब्डा सिहलोथ्रिन काघोल बनाकर स्प्रै करनी चाहिए। इसके अलावा यह रोग दिखाई दे तब इससे प्रभावित पौधे को उखाड़कर नष्ट करना चाहिए ,नहीं तो यह रोग अन्य पोधो पर भी हो सकता है।

पत्ती धब्बा रोग

मायरोथिसियम रोडीरम नामक कवक से यह रोग पत्तियों में देखने को मिलता है ,यह रोग पत्तियों को काफी नुक्सान पहुँचता है। यह रोग फसल पर तब लगता है जब फसल के पौधे विकास करते है ,जब यह रोग उनके विकास को रोक देता है। इस रोग के पत्तियों पर गोल और भूरे रंग के धब्बे हो जाते है,कुछ दिनों के बाद ये धब्बे बड़े हो जाते है।

रोकथाम के उपाय
बीजो को बोन से पहले उपचारित करे ,या रोग दिखाई दे तब पौधे पर थायोफिनेट मिथाईल का घोल बनाकर स्प्रै करनी चाहिए।

खेती की तैयारी कैसे करे ?

आपको बता दे की सोयबीन की खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छे से जुताई करनी चाहिए उसके बाद खेत में पुराणी खेती के अवशषों को नष्ट करे। उसक बाद खेत में गोबर की खाद डालनी चाहिए ,उसके बाद खाद को मिट्टी में अच्छे से मिलाना चाहिए। फिर से खेती की अच्छी जुताई कर खेत में पाटा लगवाकर खेत को समतल करना चाहिए।

सोयाबीन के बीजो की रोपाई और समय

आपको बता दे की समतल खेत में बीजो को मशीनों द्वारा बोया जाता है ,वैसे तो आजकल मशीनों द्वारा ही किया जाता है। खेत में सोयाबीन की रोपाई बीजो के रूप में की जाती है। रोपाई के लिए खेत में पक्तियो को तैयार कर ले और ध्यान रहे की दुरी 30 cm होनी चाहिए। और जमीन में बीजो को 3 cm गहरा बोना चाहिए।

सोयाबीन के बीजो को खेत में जून और जुलाई के महीने में बोना चाहिए ,जिससे इसको शुरुआत में पानी की आवश्यकता नहीं होती है ,क्योकि बारिश होती है ,इतना पानी काफी होता है इसकी फलस के लिए।

सोयाबीन की फसल से मिलने वाली पैदावार

जब सोयाबीन की फलिया भूरी हो जाये तब इसकी तुड़ाई कर लेनी चाहिए। सोयाबीन की फसल 25 से 30 किवंटल की पैदावार एक हेक्टैयर के क्षेत्र में करती है। और यह किसानो को अच्छा मुनाफा देते है ,इस फसल को बाजार में भाव 4000 से 4500 रूपये किवंटल पाया जाता है ,जिससे किसान भाई की अच्छी -खासी कमाई हो जाती है।

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