काले अंगूर की खेती कैसे की जाती है ,जानिए इसकी उन्नत खेती की सम्पूर्ण जानकारी

Written by Saloni Yadav

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Cultivation Of Black Grapes :

आपको बता दे की काले अंगूर की खेती फूल के रूप में की जाती है। इसका रंग काला होती है और इसके साथ ही इसका स्वाद काफी मीठा होता है। इस फल को ज्यादातर लोग पसंद करते है ,जब कभी आप बाजार जाते है तो अगर आपको काले अंगूर दिखाई देता है तो आपके मुँह में पानी आ जाता है, क्योकि इसका रंग इतना अच्छा होता है की काले अंगूर को देखकर खाने का मन करता है। अंगूर से अनेक खाद्य पदार्थ बनाये जाते है ,जैसे जैम ,जेली ,किसमिस जैसे अन्य चीजे भी बनाई जाती है ,इसके अलावा इससे बने पदार्थ से भी अन्य चीजे बनाई जाती है ,जैसे किसमिस का प्रयोग आप हलवे में डालने ,और अन्य चीजों में भी डालकर स्वाद बढ़ाया जाता है ,किसमिस को किसी भी खाने की चीजों में डालने से उसका स्वाद काफी अच्छा हो जाता है । इस अंगूर की खेती करने के लिए अधिक मेहनत और देखभाल की आवश्यकता होती है। काले अंगूर का दाम हरे अंगूर से कुछ अधिक होता है और काले अंगूर की मांग भी अधिक होती है ,इसके साथ ही इसका बजरी भाव अधिक होता है।

भारत में अंगूर की खेती मुख्य रूप से कर्नाटक ,तमिलनाडु ,पंजाब ,मिजोरम ,जम्मू कश्मीर ,हिमाचल प्रदेश ,हरियाणा और आन्ध्रप्रदेश आदि राज्यों में की जाती है ।

अंगूर में विटामिन E मुख्य रूप से पाया जाता है ,जो बालो और त्वचा की खूबसूरती को बढ़ाने का कार्य करता है। और काले अंगूर हमारे शरीर को काफी लाभ पहुँचता है। इस फल को खाने से आखो की रोशनी तेज हो जाती है। यह फल रस से भरा होता ही ,जिसका रसीलापन लोगो को अधिक अच्छा लगता है। इस फल को खाने से शरीर में काफी फायदे होते है। बाजार में उनके रंग के अंगूर होते है। लेकिन अधिकतर लोगो को काले अंगूर ज्यादा पसंद होते है। अगर आप भी अंगूर की खेती करने का मन बना रहे है तो आज हम आपको काले अंगूर की खेती कैसे करे और इसकी उन्नत किस्मे ,तापमान ,जलवायु और पैदावार की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

काले अंगूर की खेती के लिए आवश्यक मिट्टी

आपको बता दे की अंगूर का पौधा काफी मजबूत होता है ,जिस वजह से इसको किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है। जैसे रेतीली मिट्टी ,चिकनी मिट्टी ,ककरीली मिट्टी और गहरी दोमट मिट्टी में भी इसकी खेती अच्छी पैदावार देती है। वैसे तो इसकी खेती के लिए गहरी दोमट मिट्टी काफी अच्छी मानी जाती है।

काले अंगूर की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान

आपको बता दे की इसकी खेती में गर्म और शुष्क जलवायु उपयुक्त मानी जाती है ,इसकी खेती को ठंडे क्षेत्रों में नहीं किया जा सकता है ,अंगूर के विकास के समय गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है।

आपको बता दे की इसकी खेती को तापमान की अधिक आवश्यकता होती है ,लेकिन तापमान अधिक से अधिक होने पर इसकी खेती को अधिक मात्रा में नुकसान पहुँचता है इसके अलावा आद्रता के होने से भी इसके पौधे में रोग लग जाते है ,तापमान काले अंगूर की बनावट ,और गुणों पर अधिक असर डालता है।

अंगूर की उन्नत किस्मे

आपको बता दे की अंगूर की अनेक प्रकार की किस्मे पाई जाती है ,जो बाजार में हर समय उपलब्ध होती है ,अंगूर की कुछ किस्मे कम समय में भी अधिक पैदावार देती है अंगूर की कुछ किस्म इस प्रकार है –

अरका कृष्णा किस्म

इस किस्म का अधिक प्रयोग जूस बनाने के लिए किया जाता है ,और यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 33 किवंटल की पैदावार देती है। और इसका फल की बेरिया होती है जो की काली और गोलाकार होती है। इस किस्म के फल में TSS की मात्रा 20 से 25 % पाई जाती है।

गुलाबी किस्म

आपको बता दे की काले अंगूर की यह किस्म छोटे आकार की और अच्छी क्वालिटी की होती है ,इसका रंग बैंगनी पाया जाता है ,यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 10 से 12 किवंटल की पैदावार देती है। और यह किस्म अच्छी होती है ,जो कम समय में भी अच्छी पैदावार देती है।

अरका नील मणि किस्म

इस किस्म में तस्स की मात्रा 22 से 24 % पाई जाती है ,इस किस्म का प्रयोग ज्यादातर शराब बनाने में किया जाता है। यह किस्म प्रति हेक्टैयर के क्षेत्र में 30 किवंटल की पैदावार देती है।

बंगलौर ब्लू किस्म

इस किस्म में TSS की मात्रा 18 से 20 सबसे अधिक पाई जाती है,इस किस्म के पैदावार अच्छी होती है ,इसका प्रयोग ज्यादातर जूस और शराब के लिए किया जाता है। एस्किसम के बीज छोटे और अंडाकार होते है ,इस फल से बैगनी रंग का रस निकलता है। जो की साफ और शुद्ध होता है। इस किस्म को सबसे ज्यादा कर्नाटक में उत्पादित किया जाता है। यह किस्म कोमल फफूंद के प्रति संवेदनशील होती है।

ब्युटी सीडलेस

यह किस्म जल्दी पकने वाली होती है ,इसका गुदा मुलायम होता है और इसके दाने छोटे और मध्यम आकर की होती है। इसमें TSS की मात्रा 19 से 20 % के आस पास पाई जाती है। इस किस्म का ज्यादातर प्रयोग जूस को पीने की लिए किया जाता है। यह किस्म जून में पकती है। इस किस्म में लगने वाली फल मध्यम आकर के होते है।

काली शाहबी

यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 12 से 15 किवंटल की पैदावार देती है ,और यह आकर में भी मध्यम होती है इस किस्म में TSS की मात्रा 22 % पाई जाती है ,यह किस्म मुख्य रूप से महाराष्ट और आन्ध्रप्रदेश में में अधिक उगाई जाती है।

काले अंगूर को कलम द्वारा तैयार करना

आपको बता दे की काले अंगूर को खेत में लगने से पहले उसकी पौध को तैयार किया जाता है और पौध को कलम विधि से तैयार किया जाता है ,जब अंगूर के पोधो की कटिंग की जाती है ,उस समय उसमे से कलम विधो से तैयार किया जाता है ,ध्यान रहे की टहनिया स्वस्थ और रोग रहित होनी चाहिए ,कलम को अच्छे से तैयार कर क्यारियों में लगया जाता है। जब कलम 1 वर्ष पुरानी हो जाये तब कलम को खेत में क्यारियों में लगाना चाहिए।

काले अंगूर की खेती के लिए खेत को तैयार करना और रोपाई करना

आपको बता दे की काले अंगूर की खेती के लिए खेत की अच्छे से जुताई करनी चाहिए ,और खेत की मिट्टी में उर्वरको का प्रयोग करना चाहिए। उसके बाद ही पोधो की रोपाई करनी चाहिए।
इसके बाद खेत में पौध की रोपाई से पहले मिट्टी को अच्छे से परख लेना चाहिए। किस्मे के आधार पर ही मिट्टी का चयन करना चाहिए ,पौधे की रोपाई से पहले मिट्टी में गोबर की खाद को गड्डे में अच्छे से मिलकर गड्डे को अच्छे से भर देना चाहिए। और उसके बाद पानी देना चाहिए। ध्यान रहे की 1 साल पुरानी कलम को ही लगाना चाहिए।

काले अंगूर की खेती में सिचाई की आवश्यकता

आपको बता दे की काले अंगूरों की देखभाल करने से ही फल की पैदावार अच्छी होती है ,नवंबर और दिसम्बर की महीने में सिचाई नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही सिचाई तब करे जब फूल आने लगे और इसने पोधो की छटाई की जाये ,इसके अलावा फल लग जाये तब सिचाई न करे ,वरना फल फटने और सड़ने लग जाते है। अधिक गर्मी होने पर । 6 से 7 दिनों के अंतराल पर सिचाई करनी चाहिए।और फल तुड़ाई से पहले 1 बार सिचाई और करनी चाहिए।

काले अंगूर में होने वाली पैदावार और कमाई

काले अंगूर का उत्पादन प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 30 टन के आस पास होता है ,विश्व में इसका उत्पादन अधिक किया जाता है । आप को बता दे की फसल की अच्छी पैदावार उसकी किस्म ,जलवायु ,मिट्टी और तापमान पर निर्भर करती है ये सब फल के अनुकूल होंगे तो फसल में पैदावार अच्छी होगी।

बाजार में काले अंगूरों को भाव कम से कम 50 से 60 रूपये किलो पाया जाता है। काले अंगूरों का भाव हरे अंगूर से ज्यादा होता है। इस हिसाब से किसनो की अच्छी कमाई हो जाती है। इस फसल पर खर्च लगा उसको निकलने के बाद भी किसानो को अच्छा मुनाफा होता है।

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