सेब की खेती कैसे की जाती है , जानिए सेब में लगने वाली रोग व् रोकथाम के उपाय

Written by Saloni Yadav

Published on:

2023 Apple Cultivation :

भारत में अनेक फलो की खेती की जाती है ,लेकिन अनेक फलो में सेब का स्वाद काफी अच्छा होता है ,इसका भाव अन्य फलो की अपेक्षा काफी अच्छा मिलता है। इसमें विटामिन की मात्रा भी अधिक पायी जाती जाती है। सेब की खेती फल के रूप में की जाती है ,और यह फल सभी को पसंद करते है। इसका वानस्पतिक नाम ”मेलस डोमेस्टिका” है। इसका सेवन करने से कई प्रकार की बीमरियों से छूटकर मिलता है। इसका रोज सेवन शरीर के लिए काफी अच्छा होता है । प्राचीन काल से सेब को यूरोप और एशिया में उगाया जाता है। सेब का रंग लाल रंग का होता है। और थोड़ा हरे रंग का भी होता है। अगर को व्यक्ति बीमार हो जाता है तो डॉक्टर भी उसे सेब खाने के लिए बताता है। इसमें विटामिन के साथ साथ पोषक तत्वों की भी अधिक मात्रा पाई जाती है। सेब मनुष्य के स्वस्थ के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। भारत में भी कई राज्यों में भी सेब की खेती की जाती है। और यह किहेति किसानो को भी अच्छा मुनाफा देती है। सेब की खेती किसानो की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना का एक साधन है। स्वस्थ को संतुलित आहार की अधिक आवश्यकता होती है ,इसलिए रोजाना सेब खाना चाहिए।

सेब की खेती में भारत को 9 वा स्थान है। जब को मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर जैसे ठंडे प्रदेशो में उगाया जाता है। सेब की खेती भारत में मुख्य रूप से उत्तराखंड,उतरप्रदेश ,अरूणाचल प्रदेश, नगालैंड, पंजाब ,हिनचाल प्रदेश और सिक्किम आदि राज्यों में की जाती है। भारत में प्रति वर्ष सेब का उत्पादन 1.48 मिलियन टन होता है।

सेब की खेती किसानो की स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाती है। कम लागत में भी सेब की खेती अच्छी पैदावार देती है। वैसे तो सेब की खेती ठंडे प्रदेशो में अच्छी पैदावार देती है ,लेकिन अब तो सेब की बहुत किस्मे विकसित हो गयी है ,जिसको मैदानी भागों में भी उगाया जा सकता है। अगर आप भी सेब की खेती करने के लिए उत्सुक है तो आज इसकी खेती की सम्पूर्ण जानकरी देंगे।

सेब की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान

आप को बता दे की की सेब की खेती ठंडे प्रदेशो में अधिक की जाती है ,और ठंडे प्रदेशो में इसकी खेत उपज भी अच्छी होती है। सेब की खेती में जलवायु का अच्छा ध्यान रखा जाता है और इसके पौधे भी ठंडी जलवायु में अधिक विकास करते है ,गर्म जलवायु इसकी खेती के लिए अच्छी नहीं होती है। सेब के पौधे को 200 घंटे सूर्य की रोशनी की आवश्यकता होती है ,सर्दी के मौसम में गिरने वाला पाला इसकी खेती के लिए हानिकारक होता है। इसकी खेती को अधिक बारिश की भी जरूरत नहीं होती है।

आपको बता दे की इसकी खेती के लिए तापमान का होना आवश्यक होता है ,परन्त्तु इसके पौधे ठंडे प्रदेशों में अधिक वृद्धि करते है ,पौधे के विकास के लिए 20 % और फल के पकने के समय 7 % तापमान की आवश्यकता होती है।

सेब की खेती के लिए आवश्यक मिट्टी और सिचाई

सेब की खेती के लिए गहरी दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है ,जिससे खेत की भूमि का PH मान 5.5 से 6.5 के मध्य होना चाहिए। सेब की खेती जलभराव वाली भूमि में नहीं की जनि चाहिए ,क्योकि खेत में पौधे पर रोग लगने का खतरा होता है। जिससे किसानो को भरी नुकसान हो सकता है।

सेब की खेती के लिए अधिक सिचाई की आवश्यकता नहीं होती है। सेब के पौधे की बीज रोपाई ठंडे मौसम में की जाती है। लेकिन अधिक गर्मी या गर्मी के मौसम में अधिक पानी की जरूरत होती यही। सर्दी के मौसम में 3 से 4 सिचाई की आवश्यकत होती है। और गर्मी के मौसम में सप्ताह में 1 सिचाई अवश्य करनी चाहिए ,इसके अलावा आवश्यकता होने पर भी सिकहै करनी चाहिए।

सेब के पौधे में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय

जब के पौधे में कई प्रकार के रोग देखने को मिलते है ,जो पौधे को पूरी तरह नष्ट कर देते है और फलो की पैदावार को कम कर देते है। जो इस प्रकार है –

सेब पपड़ी रोग

यह रोग सेब की पत्तियों को ज्यादा प्रभावित करता है इस रोग से पौधे की पत्तिया मूड जाती है ,और कमजोर हो जाती है। और तह रोग पत्तियों के साथ -साथ फलो को भी प्रभावित करता है ,इस रोग से प्रभवित फल पर काले रंग का धब्बे हो जाते है और फल पूरी तरह से खराब हो जाता है ,यह रोग फल और फूल दोनों के लिए हानिकारक होता है।

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे पर बाविस्टिन या मैंकोजेब का छिड़काव करना चाहिए।

सेब क्लियरविंग मोठ रोग

यह रोग पौधे पर तब लगता है जब पौधा पूरी तरह से विकसित हो जाता है। यह पौधे को काफी नुकसान देता है और फल की उपज को भी कम करता है। यह रोग पौधे की छाल में छेद कर देता है ,जिससे उसके अंदर अन्य रोग लग जाते है।

रोकथाम के उपाय
इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे पर क्लोरपीरिफॉस का छिडकाव करना चाहिए ,जिससे पौधे से रोग को नष्ट किया जा सकता है।

सेब की खेती में खरपतवार को नियंत्रित करना

सेब की खेती में खरपतवार को नियंत्रित करना चाहिए ,जिससे पौधे अच्छे से विकास करेंगे। साथ ही खरपतवार नियंत्रण दो तरीको से किया जाता है ,एक रासायनिक और दूसरा प्राकृतिक तरके से। लेकिन सेब की खेती में खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक तरीके का प्रयोग करना चाहिए। प्राकृतिक तरीके से खेत की निराई -गुड़ाई करनी चाहिए। समय पर खेत की गुड़ाई करनी चाहिए ,जिससे खेत में फलो की अच्छी पैदावार होती है।

सेब की खेती के लिए खेत की तैयारी और पौधे को तैयार करना

आपको बता दे की सेब की खेती के लिए खेत के अच्छे से गहरी जुताई करनी चाहिए। उअके बाद खेत में पुरानी फसलों के अवशेषो को पूरी तरह से नष्ट करना चाहिए ,उसके बाद खेत में गोबर की खाद को डालना चाहिए ,उसके बाद खेत में मिट्टी को अच्छे से मिला देना चाहिए। उसके बाद खेत को कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए। फिर कुछ दिनों के बाद खेत की जुताई कर खेत को समतल करवा देना चाहिए ,उसके बाद खेत में पक्तियो में गड्डे खोद लेने चाहिए। और पंक्ति के बीच 10 फ़ीट की दुरी होना आवश्यक है। उसक बाद जब गड्डे अच्छे से तैयार हो जाये तब खेत में गड्डो की सिचाई करनी चाहिए।

सेब के बीजो को खेत में नहीं बोया जाता है ,लेकिन सेब की पौध को तैयार किया जाता है। उसके बाद ही खेत में बोया जाता है। सेब की पौध को कलम विधि से तैयार की जाता है। उसके बाद खेत में लगाया जाता है।

सेब के पौधे को खेत में लगाना

आपको बता दे की सेब की पौधे को कलम विधि से तैयार कर खेत के गड्डो में लगाया जाता है और बीज को बोन से पहले गोमूत्र या रासायनिक तरीके से उपचारित करना चाहिए। उसके बाद पौध को खेत में लगाना चाहिए और उसकी सिचाई करनी चाहिए। नर्सरी से लाये गए पौधे स्वस्थ होने चाहिए और अच्छी किस्म के होने चाहिए। पोधो की रोपाई जनवरी के महीने में की जाती है।

सेब की तुड़ाई और उपज

आपको बता दे की सेब के फूल आने के 140 से 150 दिनों के बाद खेत में फलो की तुड़ाई कर सकते है,इसका रंग पूरी तरह से आकर्षक दिखाई दे और आपने आकार में आ जाये तब इसकी तुड़ाई करनी चाहिए ,उसक बाद फूलो को डंढ़लो के साथ तोडना चाहिए। जिसे पौधे कुछ दिनों तक ताजे रहते है। इसके बाद इसको बाजार में बेच देते है।

आपको बता दे की सेब के पौधे 3 से 4 वर्ष के बाद फलो की पैदावार देते है। यह पौधा पूर्ण विकसित होने पर फलो की अच्छी पैदावार देता है। और किसानो को भी अच्छी पैदावार मिटी है और अच्छा मुनाफा होता है।

Leave a Comment