टमाटर की खेती में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय की सम्पूर्ण जानकारी

Written by Saloni Yadav

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Diseases In Tomato Cultivation :

आपको बता दे की टमाटर की खेती भारत में मुख्य रूप से की जाती है ,और टमाटर अधिक मुलायम होने के कारण इसमें जल्दी ही रोग देखने को मिल जाते है ,इसलिए अगर टमाटर की खेती में रोग लग भी जाये तो रोग के उपचार की आवश्यकता होती है। इसलिए समय से पहले ही उपचार करना चाहिए। वैसे को आजकल टमाटर का भाव भी अधिक हो गया है ,और इसके बिना किसी भी सब्जी का स्वाद अधूरा है रहा है ,इसलिए इसको किसी भी सब्जी के साथ बनाया जा सकता है ,इसकी सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनती है। आपको बता दे की कुछ रोग एसे होते है जो एक पौधे को लगकर पूरी फसल में फैल जाते है। और फसल को नष्ट कर देते है , और इस रोग के लगने से फसल की पैदावार में भी कमी आती है। और एसे में किसानो को अधिक हानि उठानी पद सकती है ,टमाटर की अनेक किस्मे पाई जाती है ,जिन किस्मो में तरह -तरह के रोग देखने को मिलते है। ऐसे में टमाटर की खेती में रोग को नियंत्रित करना आवश्यक होता है।

अगर टमाटर पौधे पर लगे -लगे खराब हो जाये तो तुड़ाई तक पूरी तरह से नष्ट हो जाते है ,और इसको कोई मूल्य नहीं रहता है। जब खेत में अधिक नमी और अधिक उर्वरको के उपयोग से भी इसकी खेती में रोग लगने की संभावना रहती है। अगर आप भी टमाटर की खेती में लगने वाली रोग की सम्पूर्ण जानकारी लेना चाहते है तो आज हम आपको इसकी रोग और रोकथाम की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

टमाटर में लगने वाले रोग और रोकथाम के उपाय की जानकारी

उकटा रोग के लगने पर

यह पौधे की पत्तियों पर सीधे आक्रमण करता है ,जिससे पौधे की पत्ती का निचला भाग पीला होकर पूरी तरह से झुलस जाता है और थोड़े दिनोंके बाद पौधा पूरी तरह सूख जाता है और सूखकर गिर जाता है ,जिससे पौधा विकास नहीं कर पता है और किसको को इस रोग से अधिक हानि पहुँचती है। यह रोग ओक्सीस्पोरम लाइकोपर्सिकी कवक के कारण हो जाता है।

रोकथम के उपाय

इस रोग के लग जाने से फसल की पौध रोपाई से एक महीने के बाद कार्बेन्डाजिम 25 % + मैंकोजेब 50 % और 1 % WS की मात्रा में छिड़काव करना चाहिए ,जिससे रोग को कम किया जा सकता है।

आर्द्र गलन रोग

आपको बता दे की यह रोग पौधे के तने पर ज्यादा आकर्मण करता ही ,जिससे पौधे पूरी तरह से सुख जाता है ,लेकिन इस रोग के लक्षण कम जगह पर ही दिखाई देते है। यह रोग नर्सरी में दिखाई देता है ,जिससे इसको प्रकोप अन्य पौधे पर भी हो जाता है ,और पूरी नर्सरी इस रोग से प्रभावित होती है ,और इसके पौधे सूखकर गिर जाते है। आपको बता दे की यह रोग राइजोक्टोनिया तथा फाइोफ्थोरा कवकों दे द्वारा अधिक फैलता है।

रोकथाम के उपाय

आपको बता दे की इस रोग के हो जाने से बीजो को बोन से पहले केप्टान या थायरम से अच्छे से उपचार करना चाहिए ,उसके बाद बीजो को पौध के लिए तैयार किया जाता है। आप को बता दे की इस किस्म के पौधे को उत्तम जल निकास की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही इस रोग से प्रभावित पौधे को खेत से या अन्य पोधो से अलग कर देना चाहिए। ताकि यह रोग अन्य पोधो पर भी न फैल सके।

पर्ण कुंचन रोग

आपको बता दे की यह रोग टमाटर की इस किस्म में विषाणु के द्वारा होता है। और इस रोग का पौधे पर काफी असर पड़ता है और इस रोग के हो जाने से पौधे छोटे और इसके साथ पौधे की टहनिया भी छोटी होने लगती है ,साथ ही पोधी की पत्तिया भी किनारो से मुड़ने लग जाती है। यह रोग एक प्रकार की सफेद मक्खी द्वारा दूसरे पोधो पर फैलता है। इस रोग से पौधे पर फूलो और फलो की पैदावार कम होती है ,और किसानो को नुकसान भी अधिक उठाना पड़ता है।

रोकथाम के उपाय

इस रोग के रोकथाम के लिए पौधे पर ईमिडाक्लोक्रिड 17.8 एस एल 1 मिलीलीटर को पानी में मिलकर स्प्रै करनी चाहिए। जिससे सफेद मक्खी नष्ट हो जाती है।

मूल ग्रन्थि रोग होने पर

यह रोग पौधे की जड़ो को काफी प्रभावित करता है ,और पौधे को काफी नुकसान पहुँचता है ,जिससे पौधा पीला पद जाता है और अच्छे से विकास नहीं कर पाता है यह रोग ज्यातर सूत्रकृमि मेलिडोगायनी जेवेनिका कवक के करना हो जाता है। भूमि में उर्वरक की मात्रा कम होने पर यहरोग पौधे पर दिखाई देना लग जाता है।

रोकथाम के उपाय

इस रोग के रोकथाम के लिए खेत में पौध रोपाई से पहले कार्बोसल्फॉन 25 ई सी के 500 पी पी एम के घोल में डूबाकर खेत लगाना चाहिए। इसके अलावा गेंदे के फूल भी लगा सकते हो जिससे रोक की लगने की क्षमता कम हो जाती है।

चक्षु सड़न रोग होने पर

इस रोग से टमाटर के आधे पके फलो पर काफी असर पड़ता है और टमाटर के पौधे पर काले रंग के धब्बे दिखाई देना इस रोग के लक्षण होते है। और कुछ दिनों के बाद ही यह धब्बे अधिक गहरे और बड़े हो जाते है। और इन धब्बो के चारो तरफ भूरे रंग की वलय बन जाती है।

रोकथाम के उपाय

इस रोग के रोकथाम के लिए सबसे पहले पोधो को एक लकड़ी के सहारे की आवश्यकता होती है इस रोग से बचने की लिए खेत में प्रोपीनेब 70 डब्ल्यू पी 0.21 % करना चाहिए ,जिससे इस रोग को रोका जा सकता है।

अगेती झुलसा का रोग लगने पर

आपको बता दे की इस रोग के हो जाने से पौधे की पत्तियों पर छोटे -छोटे और काले रंग के धब्बे दिखाई देते है और बाद में यह धब्बे बढ़ने लग जाते है। और पौधे की पत्तिया भी पूरी तरह से सूखकर गिर जाती है।

रोकथाम के उपाय

इस रोग के रोकथाम के लिए इस रोग से प्रभावित पौध को खेत से बाहर नष्ट करना चाहिए ,अगर यह खेत में रहेगा तो अन्य पोधो में लग जाने का खतरा बना रहेगा ,जिससे फसल कमजोर हो जाएगी ,और किसनो को भी भरी मात्रा में नुकसान होगा। इसके साथ ही बीजो को केप्टान 75 डब्ल्यू पी से 2 ग्राम/किलो के हिसाब से बीजो को उपचारित कर खेत में लग्न चाहिए ,उसके अलावा मैंकोजेब 75 डब्ल्यू पी की पौधे पर स्प्रै करनी चाहिए।

पिछेती झुलसा रोग

इस रोग से भी पौधे की पत्तिया जय डा प्रभावित होती है ,और पत्तियों पर जलीय आकार के धब्बे बनने लग जाते है आपको बता दे की खेत में अधिक नमी के कारण यह रोग पौधे की टहनियों पर दिखाई देता है। जिससे पौधे के तने पर काले और भूरे धब्बे दिखाई देते है।

रोकथाम के उपाय

पौधे पर इस रोग के दिखाई देने पर रोग से प्रभावित पौधे को खेत से बाहर नष्ट करना चाहिए ,उसके अलावा खेत में पौधे पर मेटालेक्सिल 4 %+ मैंकोजेब 64 % WP को पानी में मिलकर स्प्रै करनी चाहिए।

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