बाजरे की खेती की सम्पूर्ण जानकारी : उन्नत किस्मे ,पैदावार और रोग व् रोगथाम के उपाय

Written by Saloni Yadav

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Millet Cultivation :

विश्व में भारत देश को बाजरा उत्पादन में सबसे आगे माना गया है ,बाजरे का दाना मोटा होती है ,इसकी खेती मुख्य रूप से सभी राज्यों में की जाती है ,और इसकी खेती खरीफ के मौसम में की जाती है। आपको बता देखी बाजरे की खेती विश्व भर में की जाती है। बाजरे में प्रचुर मात्रा में केल्सियम ,प्रोटीन ,केरोटीन ,कार्बोहाइड्रेट और खनिज तत्वों की मात्रा पाई जाती है। आपको बता दे की बाजरे का उपयोग पशुओ को खिलाने ,और खाने और इसकी रोटी भी बनाई जा सकती है ,और इसकी रोटी को सर्दियों में खाया जाता है ,बाजरे की रोटी के साथ घी ,दूध ,दही और छाछ बहुत अच्छी लगती है। बाजरे में विटामिन B की मात्रा अधिक पाई जाती है। बाजरे में अन्य फसलों की बजाय लोह तत्व की मात्रा भी काफी पाई जाती है।

बाजरे की खेती को बोन के बाद इसको अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है ,आपको बता दे की इस फसल की पैदावार भी अन्य फसलों से काफी अच्छी होती है। बाजरे की काफी अच्छी किस्म पाई जाती है ,जो कम समय में अधिक मात्रा में पैदावार देती है ,इसके अलावा भारत में इसकी खेती उत्तर प्रदेश ,राजस्थान ,हरियाणा ,महाराष्ट ,गुजरात और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में 87 % क्षेत्र पर की जाती है। बाजरे को शुष्क और अर्ध -शुष्क के प्रदेशो में मुख्य रूप से कमाया जाता है। आपको बता दे की इसकी खेती में अगर कोई रोग लग जाता है तो उस रोग के रोकथाम करनी चाहिए ,ताकि फसल की पैदावार अच्छी होती है। इसका प्रयोग पशुओ को खिलने और मानव द्वारा खाने दोनों में किया जाता है। बाजरेमें खनिज तत्वों की मात्रा मुख्य रूप से पाई जाती है ,

बाजरे की फसल का केंद्र दक्षिण अफ्रीका को माना जाता है फसल की अच्छी पैदावार के लीये खेत में शुद्ध और अच्छे बीज बोन चाहिए। अगर आप भी बाजरे की खेती करने का मन बना रहे है तो आज हम आपको इसकी खेती कैसे करे ,इसकी उन्नत किस्मे ,जलवायु ,मिट्टी और पैदावार की सम्पूर्ण जानकारी देंगे

बाजरे की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और तापमान

आपको बता दे की बाजरे की खेती के लिए गर्मी का मौसम ज्यादा उपयुक्त मन जाता है ,कम बारिश होने पर भी बाजार की फसल में काफी पैदावार देखने को मिल जाती है ,और बाजरे के पौधे में सट्टे आने के दौरान खेत में नमि का होना आवश्यक होता है अगर पौध में फूल आते समय पानी नहीं है तो सिचाई करनी चाहिए।

आपको बता दे की जब बाजरे के बीज जमीन से भर निकलते है तो उसके लिए 25 डिग्री तापमान आवश्यक होती है ,और पौधे के अच्छे विकास के लिए 30 से 35 डिग्री तापमान आवश्यक माना जाता है ,और इसके साथ आप चाहते है की बाजार की फसल में पैदावार अच्छी और अधिक मात्रा में हो तो उसके लिए 45 डिग्री तापमान होना आवश्यक है ,इस तरह तापमान में पला पौधा फसल की पैदावार अच्छी देता है ,और किसानो की मालामाल कर देता है।

बाजरे की फसल के लिए उपयुक्त मिट्टी और सिचाई

आपको बता दे की बाजरे की खेती अधिक जल भराव वाली भूमि में नहीं करनी चाहिए क्योकि बाजरे के पौधे में रोक के लग जाने का डर होता है ,और जिससे फसल नष्ट हो जाती है ,और काफी नुकसान किसानो को ही उठना पड़ता है। इसके अलावा बाजरे की खेती बलुई दोमट मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है और यह ही इसकी खेती के लिए ज्याद उपयोग में लाई जाती है। वैसे तो बाजरे की खेती की भी भूमि में की जा सकती है।

आपको बता दे की बाजरे की खेती खरीफ के सीजन में की जाती है ,और इसकी खेती को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। क्योकि इस समय बारिश होती है और बारिश का पानी ही इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है ,इसके साथ ही बारिश न होने पर सिचि करनी चाहिए। इसके अलावा आप को फसल से अच्छा चारा और फसल प्राप्त करने के लिए सप्ताह में 3 से 4 बार सिचाई करनी चाहिए।

बाजरे के खेत में उर्वरक की मात्रा और खरपतवार नियंत्रण

आपको बता दे की इसकी खेती को उर्वरक और खाद की कोई आवश्यकता नहीं होती है। फिर भी बाजरे की अच्छी पैदावार के लिए खेत को तैयार करने से पहले उसमे गोबर की खाद डालनी चाहिए और इसके साथ उर्वरको का भी प्रयोग कर सकते है। उर्वरको में DAP खाद डालना चाहिये

आपको बता दे की खेत में खरपतवार को नियंत्रित करना आवश्यक होता है ,अगर समय से खरपतवार नियंत्रित नहीं किया गया तो फसल की पैदावार में काफी नुकसान हो सकता है ,इसके लिए समय से खेत में 2 से 3 बार प्राकृतिक तरिके से खेत की निराई गुड़ाई करनी चाहिए ,आपको बता दे की किसी भी फसल में खेत की निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।

बाजरे की खेती के लिए खेत की तैयारी कैसे करे

आप को बता दे की किसी भी फसल को को खेत में बुआई से पहले खेत को अच्छे से तैयार कर लेना चाहिए ,जिससे फसल भी अच्छी होगी और मिट्टी की उर्वरा सकती भी बनी रहेगी। साथ ही सबसे पहले आपको खेती की गहरी जुताई करनी चाहिए ,उसके बाद खेत के पड़े पुरानी फसल के अवशेषो को पूरी तरह से नष्ट करना चाहिए ,फिर उसमे गोबर की पुरानी खाद डालनी चाहिए ,और खाद को मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए ,और खेत में पलेव करना चाहिए ,उसके बाद जब खेत की मिट्टी कुछ सूख जाये तब फिर से खेत की अच्छे से जुताई करनी चाहिए। जिससे खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाये। और फसल की पैदावार भी अच्छी होती है।

बाजरे के बीजो की बुआई कैसे करे ?

हम आपको बता दे की बाजरे की बुआई आजकल मशीनो के द्वारा की जाती है और बीज को बोते समय पक्तियो की दूरी 8 cm के लगभग हो और पौधे से पौधे की दुरी लगभग 15 कम की होनी चाहिए। और बाजरे के बीज को जमीन में 2.5cm की गहराई में बोना चाहिए। एक हेक्टैयर के क्षेत्र में लगभग सवा किलो बीज की आवश्यकता होती है।

बाजरे की फसल की कटाई और उपज

आप को बता दे की बाजरे की फसल की बुआई के 80 से 90 दिनों के बाद इसकी खेती पैदावार देना शुरू कर देती है। बाजरे का दाना मोटा और कठोर होता है। आप को बता दे की बाजरे की कटाई करने के बाद जमीन पर रख देते है ,उसके बाद जमीन पर रखे बाजरे से बाजार के सिट्टे की कटाई कर लेते है और उसके बाद बाजरे के दानो को अच्छी तरह से सूखा ले और फिर मशीनों के द्वारा बाजार को निकलवा ले।

आप को बता दे की बाजरे की खेती से किसनो को अच्छी कमाई होती है ,बाजरे की फसल एक हेक्टैयर के क्षेत्र में लगभग 30 से 35 किवंटल की पैदावार देती है। इससे किसनो को अच्छा मुनाफा प्राप्त होता है।

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