लीची की खेती की सम्पूर्ण जानकारी : लीची की उन्नत किस्मे ,उपयुक्त जलवायु ,तापमान और पैदावार

Written by Saloni Yadav

Updated on:

लीची की उन्नत किस्मे ,उपयुक्त जलवायु ,तापमान और पैदावार:

हम आपको बता दे की लीची की खेती का उत्पादन भारत में किया जाता है और भारत में लीची का उत्पादन दूसरे नंबर पर किया जाता है। इसकी खेती कर किसान मालामाल हो सकते है ,क्योकि इसका बाजार में भाव अधिक रूपये किलो पाया जाता है। अगर पुरे देश की बाद करे तो 40 % लीची की खेती बिहार राज्य में की जाती है। लीची में अनेक गुण पाए जाते है ,लीची का फल मीठा होता है ,और स्वादिष्ट भी होता है ,इसकी खेती विश्व में चीन में अधिक मात्रा में की जाती है। लीची के फल की खोज चीन के दक्षिणी भाग में की गयी थी।
लीची की खेती फल के रूप में की जाती है ,लीची का रंग लाल होता है ,यानि लीची का छिलका लाल होता है और अंदर से सफेद होता है ,जिसको खाया जाता है। लीची का प्रयोग जेएम ,जेली और जूस बनाने में अधिक किया जाता है। इसके साथ शरबत और अन्य पदार्थ बनाने में भी किया जाता है।

आपको बता दे की लीची का फल शरीर के लिए काफी लाभदायक होता है ,और इसकी मांग भी बाजार में अधिक पाई जाती है ,लीची में मुख्य रूप से विटामिन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है ,और लीची क खेती किसानो को अधिक पैदावार देती है ,जिससे किसान मालामाल हो सकते है ,अगर आप भी लीची की खेती करना चाहते है तो आज हम आपको लीची की खेती कैसे करे ,उपयुक्त जलवायु ,तापमान ,और पैदावार की सम्पूर्ण जानकारी देंगे।

लीची की खेती के लिए आवश्यक जलवायु

लीची के पौधे को गर्म जलवायु में उगाय जाता है ,गर्म जलवायु में लीची के फूल अच्छे से विकास करते है ,और इसके अलावा फल पकते समय लीची के पौधे को सामान्य तापमान की आवश्यकता होती है। सामान्य तापमान में ही लीची के पौधे अच्छे से विकास करते है। किसी भी फसल को बोन से पहले जलवायु पर आवश्यक ध्यान देना चाहिए ,क्योकि अधिकतर खेती जलवायु पर निर्भर होकर अच्छी पैदावार देती है।

लीची की खेती के लिए आवश्यक तापमान

आपको बता दे की लीची की खेती के लिए तापमान महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ ही इसके पौधे सामान्य तापमान में अच्छे विकास करते है। गर्मियों का मौसम इसके पौधे के लिए काफी अच्छा होता है ,इसलिए लीची की खेती उन प्रदेशो में करे ,जिन प्रदेशो का तापमान सामान्य पाया जाता है।

लीची की खेती के लिए आवश्यक मिट्टी और सिचाई

आपको बता दे की लीची की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली गहरी और उपजाऊ मिट्टी आवश्यक मानी जाती है । लीची की अलग -अलग किस्मो को अलग अलग मिट्टी में उगाया जाता है ,और इसकी खेती नमक वाली खारी मिट्टी में नहीं जनि चाहिए ,इससे पौधे का विकास भी नहीं होता है और पौधा पैदावार भी नहीं देता है ,इसकी खेती के लिए भूमि का PH मान 7 से 8 के बीच होना चाहिए।

आपको बता दे की लीची की खेती में सामान्य पानी की आवश्यकता होती है ,लीची की बुआई के समय इसको अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इसके पौधे को गर्मी में सप्ताह में दो बार सिचाई करनी चाहिए। बारिश न होने पर खेत की सिचाई करनी चाहिए ,इसके अलावा आवश्यकता होने पर भी खेत में सिचाई करनी चाहिए।

लीची के लिए खेत की तैयारी कैसे करे ?

आपको बता दे की इसकी खेती के लिए सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करनी चाहिए और उसके बाद खेत में पुराणी फसल के अवशेषो को पूरी तरह से नष्ट कर देना चाहिए उसके बाद खेत में गोबर की खाद का प्रयोग करे ,और खाद को अच्छे से मिट्टी में मिलाना चाहिए ,उसके बाद खेत में पानी से पलेव करे और जब खेत की मिट्टी थोड़ी सूख जाये तब उसमे अच्छी जुताई करनी चाहिए। और उसके बार खेत में पाटा लगवाकर खेती को समतल करवा देना चाहिए ,ताकि खेत में जलभराव की समस्या हो सके।

इसके बाद खेत में गड्डो को तैयार करे और उसके लीची के पौध की रोपाई करनी चाहिए ,लेकिन गड्डो में खाद डाले और उसको गड्डे की मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए ,उसके बाद गड्डो में पौध को लगाकर उसको मिट्टी से भर देना चाहिए।

लीची की पौध रोपाई का तरीका क्या है

आपको बता दे की लीची के बीजो को नहीं बोया जाता है ,उसके लिए पौध को नर्सरी में तैयार किया जाता है ,उसके बाद खेत में लगाया जाता है ध्यान रखे की पौध 2 से 3 साल पुरानी होनी चाहिए। उसके बाद लीची के पौधे को खेत में लगा देना चाहिए।

लीची के पौध रोपाई का सही समय

आपको बता दे की लीची के पौध को जून या जुलाई के महीने में ही रोपाई की जाती है और और इसके बाद इसको पानी की आवश्यकता नहीं होती है ,क्योकि जून और जुलाई में बारिश होती है ,जिससे लीची के पौधे को विकास अच्छे से हो पाता है।

लीची के खेत में खरपतवार नियंत्रण

आपको बता दे की लीची की अच्छी पैदावार के लिए खेत में खरपतवार को नियंत्रण करना आवश्यक होता है। अगर खेत में खरपतवार जैसे अनावश्यक पौधे उग जायेगे तो फसल की पैदावार में कमी हो सकती है। खरपतवार नियंत्रण के दो तरीके होते है लेकिन हमे प्राकृतिक तरीके से खेत की निराई -गुड़ाई करनी चाहिए। ,जिसके बाद खेत में पौधे अच्छे से विकास करेंगे।

लीची की उन्नत किस्मे कोनसी है ?

कलकतिया किस्म लीची

आपको बता दे की लीची की यह किस्म एक बार लगाने से 20 से 21 वर्षो तक पेड़वार देता ही और यह किस्म जुलाई के महीने में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इस प्रकार की किस्म का स्वाद काफी मीठा होता है और यह किस्मे काफी देर से भी पकती है।

स्वर्ण रूपा किस्म की लीची

आपको बता दे की लीची की यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 90 से 100 किलो की पैदावार देती है। और इस किस्म के फलो का रंग गुलाबी होता है। इस किस्म में शर्करा की मात्रा 9 से 10 % पाई जाती है।

स्वर्ण रूपा किस्म की लीची

आपको बता दे की लीची के इस फल में गुदा अधिक पाया जाता है। इसका रंग भी लाल होता है और ये आकर में मध्यम होती है। यह किस्म प्रति हेक्टैयर के हिसाब से 70 से 80 किवंटल की पैदावार देती है।

मुजफ्फरपुर

आपको बता दे की मुजफ्फरपुर एक जिला जो लीची उत्पादन में आगे है और मुजफ्फरपुर नाम से इस किस्म का नाम मुजफ्फरपुर पड़ा है। इस किस्म को लेट लार्ज रेड किस्म भी कह सकते है।

स्वर्ण रूपा किस्म की लीची

इस किस्म का पौधा पूर्ण रूप से विक्षित होने पर 100 KG तक का उत्पादन करती है और इस किस्म को कई स्थानों पर भी उगाया जाता है ,इसके फल का रंग गुलाबी रंग का होता है। इस कसम के फल में गुदा अधिक मात्रा में मिलता है।

इसके अलावा भी लीची की अन्य किस्मे भी होती है ,जो कम समय में भी अधिक पैदावार देती है ,कुछ किस्मे इस प्रकार है -सीडलेस लेट ,देहरादून ,शाही लीची ,अर्ली बेदाना लीची , आदि किस्मे मुख्य रूप से पाई जाती है।

लीची की खेती के कटाई और पैदावार

आपको बता दे की लीची की तुड़ाई मई के महीने में की जाती है ,जब इसके फल गुलाबी रंग के हो जाये तब इसके फलो क कटाई करनी शाहिये ,इसकी तुड़ाई डंठलो सहित करनी चाहिए ,उसके बाद इसको बाजार में बेच देना छलीची की खेती एक हेक्टैयर के क्षेत्र एक वर्ष में 100 किलो की पैदावार देती है। जिससे किसानो को अधिक मात्रा में मुनाफा प्राप्त होता है।

Leave a Comment