आम की खेती करने का सबसे बेहतरीन तरीका, कमाओगे लाखों हर साल

Written by Saloni Yadav

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नई दिल्ली. किसान भाइयों आप सभी जानते है की भारत के आम दुनिया भर में पसंद किये जाते है। भारत्त में बहुत अधिक मात्रा में आमों की खेती होती है और भारत से ही दुनिया भर में हजारों टन आम दुनिया भर के अलग अलग देशो में भेजे जाते है।किसान भाइयों आप सभी जानते है की भारत के आम दुनिया भर में पसंद किये जाते है। भारत्त में बहुत अधिक मात्रा में आमों की खेती होती है और भारत से ही दुनिया भर में हजारों टन आम दुनिया भर के अलग अलग देशो में भेजे जाते है।

आम को फलों का राजा भी कहा जाता है और इतना ही नहीं आम के फल को खाने के बहुत सारे फायदे भी होते है जिनकी चर्चा हम आगे ऐसी आर्टिकल में करें। लेकिन उससे पहले आपको बता दें की आज के इस आर्टिकल में हम आपको इसी आम के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देंगे। आम की खेती कैसे करते है? आम की खेती के फायदे और नुकसान क्या है? आम की खेती में ध्यान रखने वाली बातें कौन कौन सी होती है? आम की खेती में लगत और मुनाफा कितना होता है आदि आदि सभी तरफ की जानकारी इस आर्टिकल में आपको दी जाएगी।

आम की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

आम फलों का राजा होता है और आपने देख होगा की गर्मियों के सीजन में आपको बाजार में चारों और आम ही आम दिखाई देंगे। लेकिन ऐसा नहीं है की गर्मियों में ही सिर्फ आम होते है। और भी मौसम हैं जिनमे आम की खेती की जा सकती है। आजकल कृषि वैज्ञानिकों ने आम की इतनी साड़ी किस्में ईजाद की हैं जिनमे से बहुत सी इसी किस्में भी हैं जिनको आप किसी भी तरफ की जलवायु में ऊगा सकते हो।

फिर भी साधारण रूप से आम की खेती के लिए तापमान 20 डिग्री से लेकर 28 डिग्री के बीच सबसे उत्तम माना जाता है। आम की खेती में आम के पौधों पर जब फूल का समय होता है तो उस समय शुष्क मौसम सबसे बढ़िया रहता है लेकिन जब फल आने लगते है तो उस समय अगर हलकी बारिश हो जाये तो ये फलों की ग्रोथ और उनके पकने को लेकर सबसे सही माना जाता है।

इसके अलावा आपको बता दें की ज्यादा गर्म इलाकों में भी आम की खेती हो तो जाती है लेकिन पैदावार के मामले में सही नहीं रहती। इसके अलावा जायदा तेज हवाएं चलने वाले इलाकों में भी आम की खेती नहीं की जा सकती। तेज आँधियों के चलते आम के पौधों पर आने वाला बगर निचे गिर जाता है और इस वजह से आम के पौधों पर फल नहीं लग पाते।

आम की खेती के लिए भूमि कैसी होनी चाहिए

आम की अच्छी खेती करने के लिए तो दोमट और जलोढ़ मिटटी की जरुरत होती है जहाँ पर पानी की निकासी का अच्छा खासा प्रबंध भी होना चाहिए। लेकिन आजकल बहुत साड़ी इसी किस्मे भी ईजाद कर ली गई है जिनकी पैदावार किसी भी प्रकार की मिटटी में ली जा सकती है। अभी हाल ही में एक खबर के मुताबित राजस्थान के एक किसान के रेगिस्तान में आम का बाग़ लगाकार उससे पैदावार लेना शुरू कर दिया है तो ये इसका एक उदहारण है की आज के समय में आम की खेती कहीं पर भी की जा सकती है।

आम की खेती उपजाऊ या फिर बंजर दोनों ही प्रकार की भूमि पर की जा सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं है की आज भी बहुत सारे आम के बाग़ आपको इसी जगह पर मिल जायेंगे जो जगह कृषि योग्य नहीं थी और बिलकुल बंजर भूमि में शामिल थी। लेकिन पथरीली या क्षारीय भूमि में आम की खेती अच्छे से नहीं की जा सकती ये भी एक सच्चाई है। उस भूमि में आम की फसल बौने से पहले जमीं में उर्वरकों के माध्यम से सुधार किया जाता है और उसके बाद ही वहां पर इसकी खेती की जा सकती है।

आम की खेती के लिए भूमि की तयारी कैसे करनी चाहिए?

जिस भी खेत में या फिर मैदान में आपको आम की खेती करनी है और आम के बाग़ लगाने है उस जगह को सबसे पहले आपको समतल करना होगा। इसके बाद आपको उस जमीं में आम के पौधे लगाने के लिए गड्ढों का निर्माण करना होगा।
गढ्ढों का निर्माण कैसे करना है ये आगे हमने इसी आर्टिकल में बताया है।

गढ्ढे बनाने के बाद आपको उसमे गोबर की सड़ी हुए खाद को मिटटी के साथ में मिलकर उन गढ्ढों में भरनी है। लेकिन आपको इसके साथ में ये भी ध्यान में रखना है की यदि आपके द्वारा निर्धारित की गई जमीन में दीमक का प्रकोप अधिक है तो आपको इस खाद और मिट्टी के मिश्रण के साथ में पार्टी गढ्ढे 200 ग्राम क्लोरपाइरीफॉस पाउडर को मि मिश्रित करके डालना होगा। गढ्ढों की खुदाई का काम बारिश के मौसम से पहले पूरा कर देना है और खाद का मिश्रण डालकर उनको छोड़ देना है।

खेत में आम के पौधे लगाने के लिए आपको गढ्ढों का निर्माण आम की किस्म के आधार पर करना है। आम की आम्रपाली किस्म के लिए गढ्ढों का निर्माण 2.5 x 2.5 मीटर की दुरी पर किया जाना चाहिए क्योंकि इस किस्म का पौधा जायदा ऊंचाई पर नहीं जाता और कद में छोटा होता है। लेकिन बाकि की किश्मे जिनमे पौधे की ऊंचाई काफी ज्यादा जाती है उनके लिए आपको 10 से 12 के गुणांक के हिसाब से गढ्ढों का निर्माण करना है।

आम के पौधे लगाने का तरीका क्या है?

आम के पौधों को खेत में रोपण करने से पहले आपको ये निर्ह्दारित करना होगा की आम के पौधों आप सीधे गढ्ढों में बौना चाहते हैं या फिर उनके पौधे कहीं बाहर से लेकर आना चाहते है। वैसे आपको बता दें की दोनों की परिस्थितियों में आपको आम के पौधों का रोपण बारिश के मौसम में कर देना चाहिए। ज्यादा गर्मी वाली जगहों पर गर्मी के कारन पौधे मुरझा जायेंगे इसलिए बारिश का समय इसके लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस समय ना तो ज्यादा गर्मी होती और ना ही जायदा अधिक धूप रहती है।

आम के पौधे कैसे तैयार करें

आप के पौधे तैयार करने के लिए आपको इसकी गुठलियों को जून जुलाई महिनेमे जमीन में बानी क्यारियों में बो दिया जाता है। जब इनसे पौधे तैयार होने लगे और लगभग एक महीने के पौधे हो जाएँ तब इनको जमीन से उखाड़कर पौधों के लिए बनी स्पेशल पॉलीथिन में डाल दिया जाता है जिमे की लगभग एक साल तक पौधा रहता है। पॉलिथीन में पौधा रोपण करने से पहले थैलियों में गोबर की सड़ी हुई खाद का मिश्रण करके भरा जाता है ताकि पौधों को खाद की कमी ना रहे और उनकी ग्रोथ अच्छी हो। जब पौधे एक साल के हो जायें तब ये खेत में लगाने के लायक हो जाते है।

आम की खेती में खाद का प्रबंध कैसे करना है?

अगर आम के पौधे लगाने से पहले अगर आपने गढ्ढों में गोबर के खाद का मिश्रण भरा था तो आपको एक साल तक की भी तरफ के खाद को पौधों में डालने की जररत नहीं होती। जब पौधों को खेत में लगाए पूरा एक साल हो जाए तब आपको पौधों को खाद देना होता है। इसके लिए आपको नाइट्रोजन 100 ग्राम, 50 ग्राम फास्फोरस और 100 ग्राम पोटास खाद का मिश्रण करके प्रति पौधे के हिसाब से देना शुरू करना होता है और ये प्रक्रिया प्रति वर्ष के हिसाब से चलती रहती है। लेकिन हर साल आपको इसके मिश्रण में मात्रा बढ़ाते जाना है क्योंकि हर साल पौधे बड़े होते जायेंगे और उनको फिर जयादा खाद की जरुरत होगी। इसके लिए आपको बता दें की जब पौधा 10 साल का होता है तो उसको नाइट्रोजन 1 किलोग्राम, 500 ग्राम फास्फोरस और 1 किलोग्राम पोटास खाद की जरुरत होती है।

आम के खेतों में जब पौधों से फल लगने लग जाते हैं तो फलों को गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए गोबर की सड़ी हुई खाद के साथ में जैविक खाद का मिश्रण करने पौधों में डाल देना चाहिए। साथ में आम के खेतों में खाद डालने से पहले उसकी निराई गिदाई अच्छे से करनी जरुरी होती है ताकि डाले गए खाद का भरपूर फायदा सिर्फ पौधे को ही मिले।

आम की खेती में सिंचाई कैसे करनी चाहिए?

आम के खेतों में सिंचाई पौधों की उम्र और मौसम के अनुसार की जाती है। अगर आपने पौधों में जरुरत से जायदा पानी दे दिया तो वो भी पौधों के लिए हानिकारक होता है। वैसे गर्मी के मौसम में जायदा ध्यान रखना होता है। जब पौधे नए नए खेत में लगाए हैं तो उनमे हर तीसरे दिन पानी की जरुरत होती है। लेकिन जब पौधे 4 से 5 साल के हो जाते हैं तो उनमे हर सप्ताह में एक बार पानी देना चाहिए। इसी तरह से जब पौधे 6 से 8 साल के हों तो उनमे हर महीने में दो बार पानी देने भी फिर सही रहता है क्योंकि इस समय पौधों की जड़ें काफी अंदर तक जा चुकी होती है और जमीन की गहराई से वो अपने लिए पानी की कमी को पूरा करने में सक्षम हो जाते है।

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