Earthworm Farming: केंचुआ पालन कैसे करना चाहिए ताकि हर महीने मिले लाखों रूपए की कमाई

Written by Priyanshi Rao

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नई दिल्ली. Earthworm Farming: किसान भाई अगर अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते है तो ये आर्टिकल उनके लिए बहुत ही फायदेमंद रहने वाला है क्योंकि इस आर्टिकल में आपको हम केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने की सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहे है। केंचुआ पालन करके किसान भाई आसानी से हर महीने लाखों में कमाई कर सकते है। इसलिए केंचुआ पालन (Kenchua Palan) की पूरी जानकारी के लिए इस आर्टिकल को आखिर तक जरूर पढ़ें ताकि आपको सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।

भारत में खेतों में उर्वरकों का इस्तेमाल साल 1970 में शुरू हुआ था। खेतों में फसल की पैदावार बढ़ने के लिए उर्वरकों के इस्तेमाल पर जायदा जोर दिया जाने लगा और इसका परिणाम बहुत ही हानिकारक रहा। खेतो में मिटटी की सारी उपजाऊ शक्ति उर्वरकों ने ख़त्म कर दी। और इस वजा से आज आलम ये हो गया है की किसी भी खेत में बिना उर्वरकों के कोई भी फसल नहीं पैदा की जा सकती। लेकिन साथ में उर्वरकों के इस्तेमाल से पैदा की गई फसलों ने इंसानों को बीमार बना दिया।

फसल में बिलकुल भी पौष्टिक तत्व नहीं होते और धीरे धीरे फसलें पैदावार के मामले में तो सही रहने लगी लेकिन पौष्टिक तत्वों के मामले में पिछड़ने लगी। इन सब चीजों ने वैज्ञानिकों को परेशान कर दिया और फिर उनकी नजर में ये एक छोटा सा प्राणी जिसको हम केंचुआ (Earthworm) कहते है ये आया। क्योंकि केंचुआ की मदद से मिटटी को फिर से सही किया जा सकता है और जमीन की उपजाऊ छमता फिर से हासिल की जा सकती है। केंचुआ की मदद से किसान भाई वर्मी कम्पोस्ट खाद (Vermi Compost Manure) आसानी से बना सकते है जिनको अपने खेतों में इस्तेमाल करके ख़राब हुई मिटटी को सुधारा जा सकता है। पूरी दुनिया की अगर बात करें तो दुनिया भर में करीब 700 तरह की केंचुआ की प्रजातियां पाई जाती है।

केंचुआ पालन करने के लाभ कौन कौन से है?

सभी किसान भाइयों को जो केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करना चाहते है उनको सबसे पहले इसके फायदों के बारे में जरूर जानकारी होनी चाहिए। तो देखिये केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने से आपको क्या क्या लाभ मिलने वाले हैं जो सीधे सीधे आपके खेतों से जुड़े हैं।

  • केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने से आपके खेतों की जमीन के अंदर छोटे और सूक्षम जीवों की संख्या में अचानक से बढ़ौतरी होने लगती है जिनसे आपकी खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनने में मदद मिलती है।
  • केंचुआ पालन से प्राप्त होने वाली खाद जिसको वर्मी कम्पोस्ट (Vermi Compost) कहते है से पौधों को बहुत ही आसानी से वे सारे पौषक तत्व मिल जाते है जिनसे उनको ग्रोथ होती है और इससे आपकी पैदावार में इजाफा होता है।
  • खेतों में वर्मी कम्पोस्ट खाद (Vermi Compost) के इस्तेमाल से आपके खेतों में जीवाश्मों की मात्रा में काफी बढ़ौतरी होती है।
  • आपके खेतों की मिट्टी में जल धारण करने की छमता में भरी इजाफा होता है और मिट्टी के अंदर वायु का संचार भी सुवचरु रूप से होने लगता है।

किसान भाई अगर अपने खेतों में वर्मी कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल करते है तो उस खेत में पैदा की गई फसल की गुणवत्ता बाकि दूसरे खेतों के मिक़बले में बहुत अधिक और अच्छी होती है। उस खेत में पैदा की गई फसल में स्वाद और पौस्टिक तत्व अधिक होते है जो इंसान के लिए बहुत ही फायदेमंद रहते है।

केंचुआ पालन करने में बरती जाने वाली सावधानियां

अगर आप केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने का बिज़नेस शुरू करना चाहते है तो उसमे आपको बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना होता है और बहुत सारी सावधानिया भी बरतनी होती है। इसलिए किसान भाइयों को ये भी मालूम होना जरुरी हो जाता हिअ की केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने के काम में किन किन सावधानियों को बरतना चाहिए ताकि किसान भाई ज्याद पैसे की कमाई कर सकतें। देखिये केंचुआ पालन में बरती जाने वाली सावधानिया :-

  • कभी भी केंचुआ पालन (Earthworm Farming) के लिए तैयार किये गए बेड में ताजा गोबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आप बेड में ताजा गोबर डालेंगे तो उसमे गर्मी होती है जिससे आपके केंचुएं मर सकते है।
  • 10 दिन में एक बार केंचुआ पालन (Earthworm Farming) के लिए बनाये गए बेड को पलट देना चाहिए ताकि उसमे डाला गया गोबर भी ऊपर निचे हो जाए और साथ में बेड के अंदर हवा का साँचल भी हो सके।
  • केंचुआ पालन (Earthworm Farming) के लिए बनाये बेड पर ये ध्यान रखना है की वहां पर नमी हमेशा बानी रहे। इसलिए किसान भाइयों को समय समय पर वहां पर हल्का पानी का छिड़काव करते रहना चाहिए।
  • केंचुआ पालन (Earthworm Farming) में सबसे जायदा खतरा छिपकली, मेंढक और दीमक वगैरह का होता है जो आपके केंचुओं को नुकसान पहुंचा सकते है। इसके लिए किसान भाइयों को केंचुआ पालन के लिए बनाये गए बेड के चरों और बारीक़ जाली लगा देनी चाहिए। दीमक आदि के प्रकोप से बचने के लिए नीम के पानी का छिड़काव बेड के आस पास में कर देना चाहिए।
  • केंचुआ पालन (Earthworm Farming) के लिए बनाये गए बेड का तापमान 10 से 30 डिग्री के बीच में सबसे बेहतर माना जाता है इसलिए हमेशा इस बात का ख्याल रखना होता है की तापमान इससे ना तो निचे जाए और ना ही ऊपर जाए। इस तापमान में केंचुओं के द्वारा अधिक खाद का निर्माण होता है।

केंचुओं की कितनी प्रजाति होती है?

केंचुओं की बहुत सारी प्रजातियां होती है। केंचुओं की प्रजातियां (Earthworm Species) सभी प्रकार की मिट्टी के हिसाब से अलग अलग होती है। अगर बात पूरी दुनिया की करें तो अभी तक लगभग 2500 तरह की केंचुओं की प्रजातियों के बारे में पता चल पाया है। लेकिन इसमें सबसे अच्छी बात किसान भाइयों के लिए ये होती है की केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने के लिए आपको किसी खास प्रजाति की जरुरत नहीं होती है। आप जहाँ पर भी केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करना चाहते है तो आपको वहीं पर उसी मिट्टी के हिसाब से केंचुआ पैसा हो जायेंगे। अकेले भारत में अभी तक वैज्ञानिकों ने करीब 600 तरह के केंचुओं की प्रजातियों (Earthworm Species) को ढूंढ निकला है।

केंचुआ पालन में लागत और कमाई कितनी होती है?

अगर किसान भाई केंचुओं का पालन (Earthworm Farming) करने का व्यवसाय शुरू करने जा रहे है तो उनके लिए हम यहां लागत और बचत के बारे में भी बता देते है। अगर आप इसके लिए केंचुओं को बाजार में खरीदने जायेंगे तो करीब 800 रुपये में 100 केंचुएं आपको मिलेंगे। इसलिए अगर आप अपने केंचुआ पालन का व्यवसाय अगर 1 हजार वर्ग गज से भी शुरू करते है तो इसमें आपको लगभग 4000 केंचुओं की जरुरत होगी। इसके अलावा केंचुआ पालन के लिए आपको बेड का निर्माण भी करना होगा जिसमे भी आपको खर्चा करना होगा। 50X50 साइज के बेड के निर्माण के लिए आपके लगभग 1 लाख रुपये तक खर्च होंगे। कुल मिलकर अगर खर्चे की बात करें तो 50X50 साइज के बेड के साथ केंचुआ पालन (Earthworm Farming) करने में आपको लगभग 2 से 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे। अगर बात कमाई की करें तो आप बड़ी आसानी से एक 50X50 साइज के बेड से ढाई से तीन लाख तक की कमाई कर सकते है।

 

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