बाजरा की खेती कैसे करें, देखिये बाजरे की खेती का सही तरीका जो बना देगा मालामाल

Written by Priyanshi

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नई दिल्ली. Millet Cultivation: बाजरा की खेती करने से किसानो को दो लाभ एक साथ होते है। पहला तो किसानो को खाने के लिए बाजरा मिल जाता है और दूसरा पशुओं के लिए चारे के रूप में बाजरे की कड़बी मिल जाती है। बाजरे की खेती का इतिहास भारत में बहुत प्राचीन है। आपको बता दें की बाजरे की खेती एक ऐसी खेती है जिसमे ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ता फिर भी पैदावार अच्छी हो जाती है। बाजरे की रोटी खाने की बात अगर करें तो आपको बता दें की बाजरे की रोटी गेहूं की रोटी से अधिक शक्ति और ऊर्जा इंसानी शरीर को देती है। बाजरा एक खरीफ की फसल होती है लेकिन गुजरात जैसे राज्य में लगभग हर समय ही बाजरे की खेती किसानो के द्वारा की जाती है।

बाजरा की खेती कैसे करें

बाजरा की खेती बहुत ही आसान खेती होती है। इसके लिए किसान भाइयों को पहले खेत की तयारी करनी होती है। वैसे बाजरा की फसल बारिश के समय में होती है इसलिए जनि दें का झंझट नहीं होता और साथ में बाजरे की फसल में ज्यादा उर्वरकों का भी इस्तेमाल नहीं करना होता। आज भी जब भी हमारे देश में रोटी का नाम लिया जाता है तो सबके दिमाग में केवल गेहूं की रोटी और उसकी तस्वीरें सामने आने लगती है। लेकिन इसके इसके अलावा बाजरे की भी रोटी होती है जो सेहत के लिए बहुत अधिक फायदेमंद होती है। बाजरे की रोटी पेट की पाचन से जुडी सभी समस्याओं को ख़त्म कर देती है। भारत में बाजरे की पैदावार पूरी दुनिया में सबसे अधिक होती है। हालांकि भारत और पाकिस्तान के अलावा दुनिया में शायद ही कोई ये बात जनता हो की बाजरे की रोटी भी होती है जो की स्वास्थ की दृस्टि से बहुत ही फायदेमंद होती है।

बाजरे की खेती के लिए खेत की तैयारी।

बाजरे की फसल के लिए बीजों की बुवाई से पहले खेत की तैयारी करनी होती है। इसके लिए आपको सबसे पहले खेत को दो से तीन बार जुताई कर देना चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाये। इसके बाद गोबर की सड़ी हुई खाद को प्योर खेत में फैला देना चाहिए और ऊपर से फिर से एक जुताई कर देनी चाहिए। जुताई के बाद खेत को पलटा मार कर समतल कर देना चाहिए ताकि खेत में पानी का जमावड़ा होने से बचाव किया जा सके।

बाजरे की बुवाई कब की जाती है?

बाजरे की बुवाई का सही समय वर्षा ऋतू का होता है। बाजरे की फसल वर्षा ऋतू पर आधारित फसल होती है। जून के महीने में बाजरे की फसल के लिए तैयार किये गए खेतों में बीजों की बुवाई कर दी जाती है। बाजरे की बुवाई के लिए बीजों को 2 से 4 सेमि जमीन के अंदर डाला जाता है। इससे अधिक गहराई में बीजों को डालने पर बीजों से निकली पौधे की कोम्पल को बहार निकलने में परेशानी होगी। लेकिन एक तरफ जहाँ बाजरे की खेती वर्षा पर आधारित होती है वहीं आपको जानकर हैरानी होगी की कम पानी वाले क्षेत्रों में भी बाजरे की खेती में किसान भाई अधिक उत्पादन ले सकते है।

बाजरे की खेती के लिए आमतौर पर तापमान 20 से 25 डिग्री ठीक रहता है तो वहीं आप बाजरे की खेती को 40 से 45 डिग्री के तापमान में भी बहुत आसानी से कर सकते है। गुजरात में जैसा की हमने आपको ऊपर इसी आर्टिकल में बताया था की गुजरात में बाजरे की खेती लगभग हर समय की जाती है। वहां पर गर्मियों में भी बाजरे की खेती होती है जबकि उस समय वहां का तापमान बहुत अधिक होता है।

बाजरा की उन्नत किस्में कौन कौन सी हैं?

भारत में बाजरा की अनेक किस्मों की बुवाई किसानो के द्वारा की जाती है। इनमे से कुछ प्रमुख किस्मों के नाम हमने यहां निचे दिए है जिनके जरिये आपको एक अंदाजा लग जायेगा की कौन कौन सी किस्म होती है बाजरे की। देखिये बाजरे की उन्नत किस्मों के नाम:-

  • आई.सी. एम.बी 155 बाजरे की किस्म
  • डब्लू.सी.सी.75 बाजरे की किस्म
  • आई.सी. टी.बी.8203 बाजरे की किस्म
  • राज-171 बाजरे की किस्म
  • एचएचबी 299 बाजरे की किस्म
  • रेवती 2123 बाजरे की किस्म
  • एम एच 143 बाजरे की किस्म
  • पूसा-322 बाजरे की किस्म
  • पूसा 23 बाजरे की किस्म
  • बायर-9444 बाजरे की किस्म
  • एएचबी 1200 बाजरे की किस्म

बाजरा की खेती में बिजाई का सही समय

भारत के ज्यादातर हिस्सों में पहली बारिश के साथ ही बाजरे की बिजाई कर दी जाती है। बाजरे की बिजाई दो तरीकों से किसान भाई कर सकते है जिसमे एक तो अपने मशीन से बाजरे की बिजाई करते है जिसमे आजकल बहुत जोर दिया जा रहा है और दूसरा तरीका है की बाजरे को खेत में छिड़काव करने के बाद उसके ऊपर से उसकी हलकी जुताई कर दी जाए। दोनों तरीकों से ही बाजरे की बिजाई की जाती है।

बिजाई के समय दोनों ही तरीकों में इस बात का ध्यान रखा जाता है की बीज जमीन के अंदर 2 से 3 सेमि से अधिक गहराई में नहीं जाने चाहिए। इसके अलावा अगर आप मशीन के द्वारा बाजरे की बिजाई अपने खेतों में कर रहे है तो आपको ये भी ध्यान रखना है की एक कतार से दूसरी कतार के बीच की दूरी 10 सेमी के करीब होनी चाहिए। आप अगर एक एकड़ में बाजरे की बिजाई करना चाहते है तो आपको करीब डेढ़ किलो के आसपास बाजरे के बीज की जरुरत होगी।

बाजरे की खेती में निराई गुड़ाई का कार्य कैसे करना चाहिए

वैसे तो बाजरे की खेती में ज्यादा निराई गुड़ाई की जरुरत नहीं होती लेकिन फिर भी अगर खरपतवार बाजरे की फसल में उग आते है तो आपको अपने खेत में खरपतवार नाशक दवाइयों का छिड़काव कर देना चाहिए। इसके लिए आपको अपने खेत में एट्राजीन (50 प्रतिशत डब्ल्यू.सी.) 0.75-1.0 कि.ग्रा./एकड़ के हिसाब से घोल बनाकर उसका छिड़काव कर देना चाहिए। इससे आपके बाजरे की फसल में खरपतवार खत्म हो जाएगी।

बाजरे की खेती में सिंचाई कब और कैसे करें।

बाजरे की फसल वैसे तो बारिश की फसल होती है। लेकिन कई बार बारिश नहीं होने के कारण पानी देने की जरुरत पड़ जाती है। बाजरे में अगर बारिश नहीं होती है तो आपको उसमे पानी देने की जरुरत होती है। पानी नहीं देने से बाजरे की खेती में खुश्की आ जाती है और पौधों की पत्तियां फोल्ड होने लगती है। इसलिए अगर लम्बे समय से बारिश नहीं होती है तो आपको इसमें पानी देना है। ऐसे में हर 15 दिन के अंतराल पर आपको सिंचाई करनी पड़ सकती है। कई किसान बाजरे को हरे चारे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बोते है तो ऐसे में हर 10 दिन में आपको सिंचाई करनी होती है।

बाजरे की खेती में उर्वरक कैसे देना चाहिए

अगर आपने बाजरे की फसल की बुवाई करने से पहले अगर खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद डाली थी तो आपको फिर इसमें उर्वरक देने की जरुरत नहीं होती है। लेकिन जब बाजरे के पौधे एक महीने के हो जाएँ तो उसमे आपको 25 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से नाइट्रोजन का छिड़काव कर देना चाहिए। इस समय बाजरे में पौटे आने का समय होता है और ऐसे में ये उर्वरक पौटों की गुणवत्ता को अच्छा करने के काम आता है।

बाजरे की खेती में कटाई कब करें।

बाजरे की फसल की कटाई कब करनी चाहिए इसके बारे में आपको बताते है। बाजरे की फसल का साइकल लगभग 80 दिन के करीब होता है। लेकिन इसमें भी आपको ये देखना होता है की जब बाजरे के डेन कठोर हो जाए और उनका रंग भूरा होने लगे तो आपको उसकी कटाई कर देनी चाहिए। बाजरे के सिट्टों की भी कटाई कर सकते है और पौधों की कटाई के बाद भी आप सिट्टों की कटाई कर सकते है।

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