कपास की खेती करने का सही तरीका, मिलेगी अधिक पैदावार, देखें कैसे

Written by Priyanshi Rao

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नई दिल्ली. भारत में कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) बहुत अधिक क्षेत्र में की जाती है और इसके लिए हमारे किसान भाई बहुत मेहनत करते है। कपास की खेती में अधिक मेहनत है लेकिन फिर भी किसान भाई इससे पीछे नहीं हटत। इसका सबसे बड़ा कारण है की कपास की फसल को नगदी फसल के रूप में देखा जाता है। कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) से किसानो के आर्थिक हालत में काफी बदलाव देखने को मिले है। लेकिन मेहनत के साथ साथ अगर आपको कपास की फसल की खेती की अगर कुछ और बातें जो पैदावार बढ़ाने में मदगार साबित होती है, के बारे में भी पता होना चाहिए। इसलिए इस आर्टिकल में हम आपको कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे है जिससे आपकी कपास की पैदावार में काफी इजाफा होगा।

एक समय था जब कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) पुरे भारत में नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा राज्यों में की जाती थी और उसका सबसे बड़ा कारण था की जलवायु उपयुक्त नहीं थी। लेकिन हमारे देश के कृषि वैज्ञानिकों ने इसका भी निचोड़ निकल लिया और फिर ऐसी नई नई कपास की किस्में ईजाद की जो किसी भी तरह की जलवायु में पैदा की जा सकती है और पैदावार के मामले में भी अच्छी मानी जाती है। आजकल ज्यादातर उन्ही किस्मों की खेती किसानो के द्वारा की जाती है।

कपास की खेती की शुरुआत कैसे करें

कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) के लिए सबसे पहले कुछ जरुरी बातें जो किसान भाइयों को ध्यान में रखनी होती हैं वो हैं खेत की मिट्टी की जांच, खेत की तैयारी, खाद बीज का प्रबंध और कपास के बीजों की बुवाई आदि। इसके लिए कुछ और भी जरुरी बातें है जो किसान भाइयों को पता होनी चाहिए। उन सबके बारे में हम आपको आगे बताने वाले है।

कपास के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी होती है

कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) अगर आप करना चाहते हैं तो आपको बता दें की कृषि वैज्ञानिकों ने अब ऐसी किस्मों की खोज कर ली है जिनको आप किसी भी तरह की मिट्टी में बोई जा सकती है। लेकिन फिर भी आपको बता दें की कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) के लिए सबसे उत्तम काली मिट्टी को माना जाता है। इसके अलावा आप दोमट मिट्टी में भी कपास की खेती बहुत ही आसानी से कर सकते है।

कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) में मिट्टी के साथ साथ जलवायु का भी अनुकूल होना बहुत जरुरी होता है। अगर जलवायु सही नहीं है तो फिर आपकी फसल से पैदावार अच्छी नहीं होगी। मिट्टी में काली मिट्टी सबसे बेहतरीन इसलिए मानी जाती है क्योंकि काली मिट्टी में मैग्नेशियम, चूना, लौह तत्व तथा कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है जो की कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) के लिए बहुत लाभदायक होती है। भारत में कर्नाटका, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्यों के अंदर काली मिट्टी पाई जाती है इसलिए ही सबसे जयादा कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) वहीं पर होती है।

जलवायु के हिसाब से कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) में बीज को अंकुरित होने के लिए तापमान का 30 से 35 के बीच होना बहुत जरुरी होता है। लेकिन बीजों को अनुकृत होने के बाद जब पौधा बढ़ने लगता है तो फिर कपास के पौधे के विकास के लिए 20 से 25 डिग्री तापमान को सांसे उत्तम माना जाता है। हालाँकि आजकल बहुत सी किस्मे ऐसी भी हैं जो 15 डिग्री तक के तापमान में भी बहुत सी आसानी से पैदा की जा सकती है।

कपास की खेती के लिए खेती की तैयारी कैसे करें?

कपास की खेती (Kapas Ki Kheti) के लिए खेत की तैयारी अच्छे से करनी होती है और आपको बता दें की इससे आपकी फसल की पैदावार पर बहुत असर होता है। इसलिए खेत की तैयारी किसान भाइयों को बहुत अच्छे तरीके से करनी चाहिए। सबसे पहले तो मिट्टी को पलटने वाले हल से खेत की अच्छे से जुताई करें ताकि खेत की सतह पर पड़े खासफूस निचे चले जाए। ये आपको खाद के रूप में काम आएंगे। इसके बाद खेत की जुताई में हैरो का इस्तेमाल करके दो बार क्रॉस जुताई करें। इसके बाद खेत में गोबर की सदी हुई खाद डालकर एक बार फिर से हैरो से जुताई करें और फिर इस खेत में पलटा मारकर खेत को समतल कर देना चाहिए। इसके बाद आपका खेत कपास की बिजाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है।

कपास की बुवाई कैसे करनी चाहिए

जैसा की सभी किसान भाई पहले से ही जानते होंगे की कपास की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय मई के आखिर में और जून के शुरू में होता है। इस दौरान किसान भाइयों को अपने खेतों में कपास की बुवाई कर देनी चाहिए। कपास की बुवाई करने से पहले बीजों को अगर उपचारित कर लिया जाए तो सबसे उत्तम रहता है। इससे जमीं के अंदर के कीटों से बीजों को कोई नुकसान नहीं होता।

कपास की बुवाई के लिए आपको कॉटन प्लांटर मशीन का इस्तेमाल करना चाहिए और बीज से बीज की दूरी का भी सही से ख्याल रखना होता है। बीजों की एक कतार से दूसरी कतार की दूरी लगभग 55 से 60 सेमि होनी चाहिए वहीं एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी लगभग 40 से 45 सेमि के आसपास होनी चाहिए। इससे कपास के पौधों को बड़े होने के बाद अच्छे से फैलाव करने का पर्याप्त स्थान मिलता है जो की उपज को बढ़ने में लाभदायक होता है।

कपास की खेती में आपको बता दें की यदि आप एक एकड़ में खेती कर रहे है तो आपको प्रति एकड़ में लगभग 10 से 13 किलोग्राम बीज की जरुरत पड़ेगी। कई बार किसान भाई ज्यादा बीज दाल देते हैं ये सोचकर की कुछ पौधे ख़राब होने की स्थिति में गहराई से बोई गई कपास के पौधे उनकी जगह काम आएंगे लेकिन ऐसा नहीं है। आपको प्रमाणित बीज को बराबर मात्रा में ही खेत में बुवाई करना चाहिए।

कपास की फसल में सिंचाई कैसे करनी चाहिए

कपास की फसल में सिंचाई का बहुत ही महत्वपूर्ण रोल होता है। आमतौर पर कपास की खेती में पुरे सीजन में लगभग 5 सिंचाई करने की जरुरत पड़ती है। कपास की खेती में पहली सिंचाई 20 दिन बाद करनी चाहिए। सिंचाई से पहले फसल में से निराई गुड़ाई करके खरपतवार को बहार निकाल देना चाहिए ताकि सिंचाई के वक्त जो आप खाद कपास में डालेंगे वो व्यर्थ ना जाये। इसके बाद कपास की खेती में आपको हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी होती है। कपास की खेती में सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई फसल में जब फूल आने लगे तब और दूसरी फूल से जब टिंडे बनने लगते है तब होती है। इस समय की गई सिंचाई का आपकी कपास की फसल की पैदावार पर सीधा सीधा असर डालती है। इस समय सिंचाई में की गई देरी से किसान भाइयों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

 

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